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NCERT: किताब में इमरजेंसी चैप्टर जोड़ने के समर्थन में BJP, कहा- नई पीढ़ी को जानना चाहिए लोकतंत्र का काला दौर

Thu, 25 Jun 2026 08:17 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Thu, 25 Jun 2026 08:17 PM IST
सार

NCERT: बीजेपी ने कक्षा 9 की एनसीईआरटी पुस्तक में आपातकाल पर अध्याय शामिल करने का समर्थन किया है। पार्टी ने इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इस दौर की जानकारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न दोहराई जाए।
 

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BJP Supports NCERT Emergency Chapter in Class 9 Textbook, Says Students Must Learn Democratic History
बीजेपी ने किया किताब में इमरजेंसी चैप्टर जोड़ने के फैसले का समर्थन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

NCERT Emergency Chapter: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में आपातकाल से जुड़ा अध्याय शामिल करने के एनसीईआरटी के फैसले का समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र के इस 'काले अध्याय' को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न दोहराई जाए।

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दरअसल, एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में आपातकाल पर एक अलग खंड शामिल किया है। पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है और उल्लेख किया गया है कि उस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था।

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कांग्रेस सच से डरती है: रविशंकर प्रसाद

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी आपातकाल की चर्चा से इसलिए असहज होती है क्योंकि इससे कई सवाल फिर सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह जानने का अधिकार है कि उस दौर में क्या हुआ था।

प्रसाद ने कहा कि यदि आपातकाल पर चर्चा होगी तो लोग पूछेंगे कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण को क्यों गिरफ्तार किया गया, जबरन नसबंदी अभियान क्यों चलाया गया और उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ क्या हुआ। उनके मुताबिक कांग्रेस के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है।

'लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय था आपातकाल': पूनावाला

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र और संविधान के इतिहास का सबसे अंधकारमय दिन था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बनाए रखने की राजनीति के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया।

पूनावाला ने कहा कि उस दौरान संसद, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाया गया।

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छात्रों को इतिहास से सीख मिलेगी

भाजपा नेताओं का कहना है कि एनसीईआरटी का यह कदम छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर से परिचित कराएगा। उनका मानना है कि आपातकाल जैसे घटनाक्रमों के बारे में जानकारी होने से छात्र लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

पूनावाला ने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को याद रखना जरूरी है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों।

कांग्रेस के विरोध पर उठाए सवाल

भाजपा ने कांग्रेस द्वारा इस अध्याय को लेकर जताई जा रही आपत्तियों पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि यदि कांग्रेस वास्तव में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की पक्षधर है, तो उसे इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का स्वागत करना चाहिए।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण, मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव जैसे कई नेताओं ने संघर्ष किया था। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि आज उन नेताओं से जुड़े कई राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ खड़े नजर आते हैं।

1975 से 1977 तक लागू रहा था आपातकाल

गौरतलब है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया था, जो 21 मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे विवादित दौरों में गिना जाता है। एनसीईआरटी की नई पुस्तक में इसी अवधि से जुड़े घटनाक्रमों और उसके प्रभावों को शामिल किया गया है।

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