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Delhi University: डीयू में एक महीने तक सार्वजनिक सभाओं और प्रदर्शनों पर लगी रोक, प्रशासन ने जारी किया आदेश

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 17 Feb 2026 05:28 PM IST
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सार

दिल्ली विश्वविद्यालय ने परिसर में एक महीने तक सार्वजनिक बैठकों, जुलूसों और प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला दिया, जबकि कुछ शिक्षकों ने इसे व्यापक प्रतिबंध बताते हुए आदेश वापस लेने की मांग की।
 

Delhi University Imposes One-Month Ban on Protests, Cites Safety and Law and Order Concerns
दिल्ली विश्वविद्यालय, Delhi University - फोटो : University Of Delhi
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विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने मंगलवार को परिसर में एक महीने के लिए सार्वजनिक बैठकों, जुलूसों, प्रदर्शनों और किसी भी प्रकार के विरोध कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह फैसला ट्रैफिक बाधित होने, सुरक्षा पर खतरे और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है।

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17 फरवरी की तारीख वाले आदेश में डीयू के प्रॉक्टर कार्यालय ने कहा कि उन्हें ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि 'अनियंत्रित सार्वजनिक सभाएं' बढ़ सकती हैं और इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। 

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आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिविल लाइंस के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा पहले ही एक निर्देश जारी किया गया था, जिसमें सार्वजनिक सभाओं, मशाल या इसी तरह की सामग्री लेकर चलने, नारेबाजी और ऐसे भाषणों पर रोक की बात कही गई थी, जो सार्वजनिक शांति या यातायात को प्रभावित कर सकते हैं।

पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी रोक

जारी आदेश के अनुसार, पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, नारे लगाने, भाषण देने तथा किसी भी प्रकार की खतरनाक सामग्री जैसे मशाल या बीकन/टॉर्च लेकर चलने पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और एक महीने तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे पहले वापस न लिया जाए।

डीयू के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने बयान में कहा कि पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं जब आयोजक प्रदर्शनों को नियंत्रित नहीं कर पाए, जिससे स्थिति बिगड़ी और विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।

फैसले पर उठे सवाल

हालांकि, इस निर्णय को लेकर आपत्ति भी सामने आई है। हंसराज कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और डीयू की कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धूसिया ने इसे 'पूरी तरह से व्यापक प्रतिबंध' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और विश्वविद्यालय को व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए, लेकिन 'यातायात बाधा' को आधार बनाकर सभाओं पर पूरी तरह रोक लगाना स्वीकार्य नहीं है।

धूसिया ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन नियुक्तियों, नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, यूजीसी इक्विटी बिल और हाल में शिक्षकों के निलंबन जैसे मुद्दों पर हो रही लामबंदी को रोकना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रॉक्टर कार्यालय एकतरफा तरीके से सार्वजनिक बैठकों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता और आदेश वापस लेने की मांग की।


यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में परिसर में विवादित घटनाएं सामने आई थीं। पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने एक विरोध कार्यक्रम के दौरान दो छात्र समूहों के बीच हुई झड़प के बाद दो एफआईआर दर्ज की थीं। इसके अलावा, 12 फरवरी को एक सामाजिक न्याय कार्यक्रम में बोलते समय इतिहासकार इरफान हबीब पर पानी से भरी बाल्टी फेंके जाने की घटना भी हुई थी।

इन घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने की बात कही है।

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