NCERT: एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से क्या होगा फायदा? लोकसभा में सरकार ने दिया जवाब
NCERT: एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में शोध, नवाचार और नए अकादमिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में बताया कि इससे एनसीईआरटी की राष्ट्रीय संसाधन संस्थान के रूप में भूमिका मजबूत होगी।
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NCERT: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को संस्थान डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से शैक्षणिक शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही एनसीईआरटी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को भी आगे बढ़ा सकेगा। यह जानकारी सोमवार को लोकसभा में दी गई।
शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लिखित जवाब में बताया कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी की भूमिका एक थिंक टैंक और राष्ट्रीय संसाधन संस्थान के तौर पर और मजबूत होगी। इससे वह केंद्र और राज्य सरकारों को तकनीकी सहायता देने में भी अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
यूजीसी ने विशेषज्ञ समिति के जरिए किया था आवेदन का मूल्यांकन
मंत्री ने बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने संबंधी आवेदन की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जांच की थी। यह मूल्यांकन यूजीसी (इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) विनियम, 2023 के प्रावधानों के तहत गठित विशेषज्ञ समिति के माध्यम से किया गया।
समिति ने एनसीईआरटी के समग्र मूल्यांकन के बाद उसे इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की सिफारिश की थी। इसके बाद UGC की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर एनसीईआरटी, नई दिल्ली को यूजीसी एक्स, 1956 की धारा 3 के तहत इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी घोषित किया।
शोध और नए अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की शर्त
सुकांत मजूमदार ने बताया कि एनसीईआरटी को दिया गया यह दर्जा एक महत्वपूर्ण शर्त के अधीन है। इसके तहत संस्थान को शोध कार्यक्रमों के साथ-साथ डॉक्टोरल और नए तरह के अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए उचित कदम उठाने होंगे।
सरकार के अनुसार, इस दर्जे से एनसीईआरटी के लिए शिक्षा के क्षेत्र में शोध, नवाचार और उच्च शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के अवसर मजबूत होंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग के जरिए शैक्षणिक गतिविधियों को विस्तार देने में भी मदद मिलेगी।