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Hindi News ›   Education ›   Only 6% Candidates Qualify UGC-NET, 11,750 JRFs Awarded Annually, Government Tells Lok Sabha

UGC NET: सिर्फ छह फीसदी अभ्यर्थी पास करते हैं यूजीसी नेट, सरकार ने बताया हर साल कितनों को मिलती है फेलोशिप

Tue, 21 Jul 2026 09:08 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Tue, 21 Jul 2026 09:08 PM IST
सार

UGC NET: लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि यूजीसी नेट परीक्षा में शामिल होने वाले केवल 6 फीसदी उम्मीदवार ही असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए क्वालिफाई करते हैं। इनमें से हर साल 11,750 अभ्यर्थियों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) दी जाती है।
 

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Only 6% Candidates Qualify UGC-NET, 11,750 JRFs Awarded Annually, Government Tells Lok Sabha
UGC NET - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

UGC NET: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया है कि यूजीसी-नेट परीक्षा में शामिल होने वाले केवल 6 प्रतिशत उम्मीदवार ही देशभर के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पात्र घोषित किए जाते हैं। इनमें से हर साल 11,750 उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) प्रदान की जाती है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के लिखित प्रश्न के जवाब में दी।

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सरकार ने क्या कहा?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के आधार पर जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्रदान करता है। सरकार ने बताया कि-

  • यूजीसी नेट में शामिल होने वाले 6% उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए क्वालिफाई करते हैं।
  • इन्हीं योग्य उम्मीदवारों में से हर साल 11,750 स्लॉट के लिए JRF दी जाती है।
  • इसके अलावा विभिन्न मंत्रालय और सरकारी संस्थाएं भी पीएचडी कर रहे शोधार्थियों को अलग-अलग फेलोशिप उपलब्ध कराती हैं।
  • अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांग (PwD) और सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष फेलोशिप योजनाएं भी संचालित की जाती हैं।
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नॉन-नेट फेलोशिप पर भी सरकार का जवाब

सरकार ने बताया कि कई विश्वविद्यालय ऐसे शोधार्थियों को भी पीएचडी में प्रवेश देते हैं, जिन्हें किसी अन्य स्रोत से वित्तीय सहायता नहीं मिलती। ऐसे छात्रों को आंशिक आर्थिक सहयोग देने के लिए यूजीसी Non-NET Fellowship के रूप में स्टाइपेंड उपलब्ध कराता है।

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शशि थरूर ने क्या सवाल उठाए थे?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार से पूछा था-

  • वर्षवार यूजीसी नेट क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों और जेआरएफ पाने वालों का आंकड़ा क्या है?
  • क्या सरकार जेआरएफ की संख्या बढ़ाने या पात्रता मानदंड में बदलाव करने पर विचार कर रही है?
  • क्या सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया है कि नॉन-नेट फेलोशिप की 8,000 रुपये मासिक राशि 2006 से अब तक नहीं बढ़ाई गई है?

जवाब से असंतुष्ट दिखे शशि थरूर

लोकसभा में जवाब मिलने के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की प्रतिक्रिया को निराशाजनक बताया।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने उनके मुख्य सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया। उनके मुताबिक, सरकार ने न तो वर्षवार आंकड़े साझा किए और न ही यह बताया कि जेआरएफ की संख्या बढ़ाने या पात्रता में बदलाव की कोई योजना है या नहीं।

थरूर ने यह भी कहा कि सरकार ने 2006 से अपरिवर्तित 8,000 रुपये प्रति माह की नॉन-नेट फेलोशिप बढ़ाने के सवाल पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि यह मुद्दा उन्होंने 2023 में भी संसद के जीरो आवर के दौरान उठाया था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई समयसीमा या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है।

शोध व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग

शशि थरूर ने कहा कि केवल आर्थिक सहायता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। देश में शोध को बढ़ावा देने के लिए बेहतर शोध अवसंरचना, पर्याप्त अकादमिक मार्गदर्शन, प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था और रिसर्च फेलोशिप प्रणाली की व्यापक समीक्षा की भी जरूरत है, ताकि भारत का शोध तंत्र शोधार्थियों की अपेक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ सके।

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