NTA की गलती की सजा हमें क्यों?: परीक्षा रद्द होने पर छात्रों का फूटा गुस्सा, पूछा- हमारी मेहनत और समय का क्या?
UGC NET Retest: यूजीसी नेट के इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के एनटीए के फैसले से अभ्यर्थियों में नाराजगी है। छात्र सोशल मीडिया पर परीक्षा की तैयारी, तनाव और दोबारा यात्रा-खर्च का मुद्दा उठाते हुए राहत और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
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UGC NET Retest: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से यूजीसी नेट की आंसर-की जारी किए जाने के बाद तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। रद्द किए गए विषयों में इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र शामिल हैं। परीक्षा रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर कई उम्मीदवार एनटीए के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।
री-एग्जाम की फीस नहीं, लेकिन आने-जाने का खर्च कौन देगा?
एनटीए की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पहले ही परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय कर चुके हैं। इसके लिए उन्हें ट्रेन या अन्य साधनों का किराया देना पड़ा। साथ ही रहने और खाने का खर्च भी उठाना पड़ा। अब परीक्षा दोबारा होने की स्थिति में उन्हें एक बार फिर इसी तरह का खर्च करना पड़ सकता है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब दोबारा परीक्षा कराने की वजह एनटीए से जुड़ी समस्या है, तो उसका आर्थिक असर भी छात्रों पर क्यों पड़े?
छात्रों ने उठाया देरी को लेकर भी सवाल
अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने की सूचना दिए जाने के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि एनटीए ने इस मामले पर करीब 50 दिनों तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद जब आंसर की जारी की गई, तब परीक्षा रद्द करने की बात सामने आई।
उम्मीदवारों का कहना है कि अब दोबारा परीक्षा के लिए करीब 20 दिनों का ही समय दिया गया है। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा दोबारा करानी ही थी, तो छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, कम समय में दोबारा तैयारी करना उन अभ्यर्थियों के लिए मुश्किल है, जो पहले ही परीक्षा दे चुके हैं और अब अपनी आगे की प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे थे।
पेपर को लेकर भी अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी
सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पेपर में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं। इनमें वर्तनी की गलतियों से लेकर पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों से सवाल लिए जाने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र में इस तरह की कमियां थीं, तो इसकी जिम्मेदारी परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की होनी चाहिए। छात्रों का इसमें कोई दोष नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने तय समय पर परीक्षा की तैयारी की, परीक्षा केंद्र तक पहुंचे और परीक्षा दी। ऐसे में परीक्षा दोबारा कराने का फैसला होने पर उन्हें फिर से आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।
कुछ उम्मीदवारों ने मांग की है कि यदि परीक्षा दोबारा कराई जा रही है तो एनटीए को उनकी यात्रा का खर्च उठाना चाहिए। इसके अलावा छात्रों को अपने गृह शहर या नजदीकी शहर को परीक्षा केंद्र के रूप में चुनने का विकल्प देने की मांग भी उठ रही है।
'NTA की गलती का खामियाजा अभ्यर्थी क्यों भुगतें?'
अभ्यर्थियों की नाराजगी का एक बड़ा कारण यही है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों की कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर उम्मीदवार पूछ रहे हैं कि जिन समस्याओं को अब पहचाना गया है, उन्हें परीक्षा से पहले क्यों नहीं पकड़ा गया?
कुछ अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि यदि किसी सरकारी विभाग या एजेंसी की गलती से आम लोगों को परेशानी होती है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जाती? उम्मीदवारों की मांग है कि परीक्षा से जुड़ी गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों को हुए नुकसान की भरपाई के बारे में भी सोचा जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम के अनुरूप सवाल और अन्य जरूरी जांच पूरी तरह सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। यदि इन स्तरों पर चूक हुई है, तो उसका असर उन छात्रों पर नहीं पड़ना चाहिए जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की और परीक्षा में शामिल हुए।
क्या परीक्षा शहर चुनने का मिलेगा विकल्प?
अभ्यर्थियों की इस परेशानी को देखते हुए एनटीए की ओर से आगे राहत दी जा सकती है। हालांकि, फिलहाल एजेंसी ने परीक्षा शहर को लेकर ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। फिर भी छात्रों के बीच उम्मीद है कि उन्हें परीक्षा केंद्र के लिए शहर चुनने का विकल्प दिया जा सकता है।
ऐसा विकल्प पहले सीयूईटी और नीट जैसी परीक्षाओं में दिया जा चुका है। यदि यूजीसी नेट के अभ्यर्थियों को भी अपने शहर या नजदीकी शहर का विकल्प मिलता है, तो उन्हें लंबी दूरी की यात्रा करने और रहने-खाने पर अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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