UGC: अब बीए, बीकॉम, बीएससी 12 भाषाओं में, पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद करने पर काम शुरू
यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने बताया कि एनईपी के तहत इंजीनियरिंग के बाद स्नातक प्रोग्राम के छात्रों को भी भारतीय भाषाओं में पढ़ाई का मौका उपलब्ध करवाना है। इसलिए पहले पाठ्यपुस्तकों को हिंदी समेत 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने पर काम शुरू हुआ है।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 से बीए, बीकॉम, बीएससी प्रोग्राम की पढ़ाई हिंदी, अंग्रेजी समेत 12 भारतीय भाषाओं में करने का मौका मिलेगा। यूजीसी ने स्नातक प्रोग्राम की पाठ्यपुस्तकों को भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए भारतीय प्रकाशकों से बात की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के तहत हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, उर्दू, तमिल, तेलगू जैसी 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद का काम शुरू किया गया है।
यूजीसी चेयरमैन प्रो. कुमार ने बताया, एनईपी के तहत इंजीनियरिंग के बाद स्नातक प्रोग्राम के छात्रों को भी भारतीय भाषाओं में पढ़ाई का मौका उपलब्ध करवाना है। इसलिए पहले पाठ्यपुस्तकों को हिंदी समेत 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने पर काम शुरू हुआ है। यूजीसी नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा, जो प्रकाशकों को पाठ्यपुस्तकों की पहचान, अनुवाद उपकरण और संपादन के लिए विशेषज्ञों के संबंध में सभी सहायता और समर्थन प्रदान करेगा। इसका मकसद पाठ्यपुस्तकों को डिजिटल प्रारूप में सस्ती कीमतों पर उपलब्ध करवाना है। भारतीय लेखकों को गैर-तकनीकी विषयों के लिए भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक लिखने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा। स्नातक के बाद स्नातकोत्तर प्रोग्राम की किताबों को भी भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।
03 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम नहीं होगा बंद पहले की तरह चलता रहेगा
प्रो. कुमार ने कहा कि एनईपी 2020 की सिफारिशों के तहत 2023 सत्र से 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम जोड़ा जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि 3 वर्षीय डिग्री को बंद किया जा रहा है। 3 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम पहले की तरह चलता रहेगा। यदि कोई छात्र 3 वर्षीय डिग्री के बाद एग्जिट होता है तो उसे पहले की तरह डिग्री मिलेगी। 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में आगे विस्तार छात्र की इच्छा पर निर्भर होगा। किसी भी छात्र को 3 और 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसके अलावा मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा भी मिलेगी।
सीयूईटी यूजी के लिए एक हजार परीक्षा केंद्र बनेंगे
प्रो. कुमार ने बताया कि स्नातक दाखिले की सीयूईटी यूजी परीक्षा में इस बार छात्रों को कोई परेशानी नहीं होगी। एनटीए देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी कर रहा है। इसमें से 450 से 500 केंद्र में प्रतिदिन परीक्षा होगी। सीयूईटी यूजी के लिए फरवरी के पहले हफ्ते में ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की विंडो ओपन होगी। परीक्षा 21 से 31 मई को इंग्लिश व हिंदी के अलावा 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित होगी।
फीस और सर्टिफिकेट वापस करना अनिवार्य
यूजीसी चेयरमैन ने कहा कि विश्वविद्यालयों को यूजीसी के निर्धारित नियमों के तहत छात्र द्वारा सीट छोड़ने पर फीस वापस करनी अनिवार्य है। किसी छात्र की फीस विवि वापस नहीं कर रहा हो तो वह यूजीसी पोर्टल पर शिकायत भेज सकते हैं। मैं छात्रों को सुनिश्चित करना चाहता हूं कि विश्वविद्यालय से उनकी फीस वापस करवायी जाएगी। विश्वविद्यालय किसी भी छात्र के आेरिजनल सर्टिफिकेट नहीं रख सकते हैं।
स्नातकोत्तर में दाखिले को सीयूईटी पीजी 15 जून से पहले
प्रो. कुमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर प्रोग्राम में दाखिले सीयूईटी पीजी 2023 की मेरिट से होंगे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए ) सीयूईटी पीजी का आयोजन जून के पहले और दूसरे हफ्ते में करेगा। सीयूईटी पीजी का रिजल्ट जुलाई के पहले हफ्ते में जारी होगा। सीयूईटी पीजी में भारतीय भाषाओं को शामिल करने की तैयारी है।
जुलाई 2023 के बाद प्रोफेसर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य करने पर दोबारा विचार
यूजीसी चेयरमैन ने कहा कि फिलहाल जुलाई 2023 तक अस्सिटेंट प्रोफेसर के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं है। लेकिन अस्सिटेंट से एसोसिएट और एसोसिएट से प्रोफेसर की पदोन्नित में पीएचडी अनिवार्य है। दरअसल बहुत से कोर्स में पीएचडी नहीं है। इसलिए यह छूट दी गयी थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोफेसर भर्ती के एंट्री लेवल में भी पीएचडी अनिवार्य होनी चाहिए, इसलिए जुलाई 2023 के बाद के लिए इस पर दोबारा विचार किया जाएगा।
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