What Is UGC: क्या है यूजीसी, कब हुआ था इसका गठन? जानें उच्च शिक्षण संस्थानों में इसकी भूमिका और जिम्मेदारी
यूजीसी देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसके गठन की कवायद आजादी के पहले ही शुरू हो गई थी। 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने यूजीसी का औपचारिक उद्घाटन किया था। आइए जानते हैं अपने नए नियमों की वजह से सुर्खियों में आए इस संस्थान के बारे में...
विस्तार
देश में उच्च शिक्षा से जुड़े यूजीसी के नए नियमों (UGC Act 2026) का मुद्दा गरमाया हुआ है। यूजीसी के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। बुद्धवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और कहा है तब तक 2012 वाले नियम ही लागू रहेंगे।
ऐसे हालात में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर यूजीसी क्या है? इसका गठन कब और क्यों हुआ? इसकी भूमिका क्या है? और नया नियम क्यों विवाद की वजह बना हुआ है? क्योंकि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य सीधे तौर पर यूजीसी के फैसलों से जुड़ा होता है।
क्या है यूजीसी? (What is UGC)
यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC ka full form hindi mein), जिसे हिंदी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कहा जाता है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला एक वैधानिक निकाय है। यूजीसी का मुख्य काम देश में विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को व्यवस्थित करना, उसका समन्वय करना और गुणवत्ता बनाए रखना है।
यह आयोग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई, परीक्षा और रिसर्च के मानक तय करता है। साथ ही योग्य उच्च शिक्षण संस्थानों को अनुदान (ग्रांट) देने की जिम्मेदारी भी इसी के पास होती है। इसके अलावा यूजीसी, केंद्र और राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के विकास से जुड़े मुद्दों पर सलाह भी देता है।
यूजीसी का गठन कब हुआ था? (UGC in Hindi)
भारत में उच्च शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है। नालंदा, तक्षिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में एशिया के कई देशों से छात्र पढ़ने आते थे। ब्रिटिश काल में भी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए। एल्फिंस्टन, मैकाले और वुड जैसे अधिकारियों ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नींव रखी। आजादी से पहले ही भारत में एक केंद्रीय उच्च शिक्षा नियामक संस्था की जरूरत महसूस की जाने लगी थी।
- 1944 में तैयार की गई सार्जेंट रिपोर्ट में पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान समिति बनाने की सिफारिश की गई।
- 1945 में यूजीसी का प्रारंभिक गठन अलीगढ़, बनारस और दिल्ली विश्वविद्यालयों के लिए किया गया।
- 1947 में इसे सभी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी मिली।
- 1948 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग बना।
- 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने यूजीसी का औपचारिक उद्घाटन किया।
- बाद में नवंबर, 1956 में यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत इसे कानूनी दर्जा मिला और यह एक स्थायी वैधानिक संस्था बन गई।
- यूजीसी के कार्यालय दिल्ली में तीन स्थानों पर स्थित हैं।
यूजीसी की प्रमुख जिम्मेदारियां क्या हैं?
यूजीसी देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। इसके प्रमुख काम हैं-
- उच्च शिक्षा को बढ़ावा देनाय।
- डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट की मान्यता सुनिश्चित करना।
- विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा और शोध के मानक तय करना।
- शिक्षा से जुड़े नियम और दिशा-निर्देश बनाना।
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को वित्तीय सहायता देना।
- केंद्र व राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना।
- उच्च शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया में भूमिका निभाना।
- शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नई पहल करना।
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करोड़ों छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी (UGC kya hai hindi mein bataen)
यूजीसी केवल संस्थानों को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि छात्रों के हितों की सुरक्षा भी इसकी अहम जिम्मेदारी है। यह सुनिश्चित करता है कि छात्र जिस संस्थान से पढ़ाई कर रहे हैं, उसकी डिग्री भविष्य में मान्य रहे। इसके अलावा, यूजीसी की ये भी जिम्मेदारियां होती हैं:
- एंटी-रैगिंग नियम लागू करता है।
- समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाता है।
- स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम और करियर गाइडेंस को बढ़ावा देता है।
- प्लेसमेंट, एलुमनी नेटवर्क और रोजगार से जुड़ी नीतियां तय करता है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन और इंटर्नशिप फ्रेमवर्क लागू करता है।
हाल के वर्षों में यूजीसी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप कई सुधार लागू किए हैं, जैसे-
- एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC)
- एकाधिक प्रवेश-निकास प्रणाली
- ऑनलाइन और ओपन लर्निंग को बढ़ावा
- उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशन से जुड़े नियम।
इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाना है। इस प्रकार, यूजीसी भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ है, जो न केवल संस्थानों को वित्तीय सहायता देता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक न्याय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करने का कार्य करता है। इसके प्रभावी कार्यान्वयन से भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनती है।
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यूजीसी नियम या कानून कैसे बनाता है?
यूजीसी के पास संसद की तरह कानून बनाने की शक्ति नहीं होती, लेकिन यह रेगुलेशंस और गाइडलाइंस जारी कर सकता है। ये नियम जब गजट ऑफ इंडिया में प्रकाशित होते हैं, तो कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाते हैं। आमतौर पर प्रक्रिया इस तरह होती है-
- विशेषज्ञों द्वारा ड्राफ्ट तैयार किया जाता है।
- पब्लिक और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे जाते हैं।
- संशोधन के बाद अंतिम ड्राफ्ट को मंजूरी दी जाती है।
- गजट में प्रकाशन के साथ नियम लागू हो जाते हैं।
नियम न मानने पर यूजीसी संस्थानों की फंडिंग रोक सकता है, उनकी मान्यता भी रद्द कर सकता है या आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
क्या है यूजीसी का नया नियम 2026? (UGC ke naye niyam kya hai)
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 लागू किया है, जिसे आमतौर पर इक्विटी एक्ट 2026 कहा जा रहा है। यह 2012 के पुराने नियमों की जगह लेगा। यूजीसी के मुताबिक, इसका मकसद उच्च शिक्षा में
- जाति
- धर्म
- लिंग
- जन्म स्थान
- दिव्यांगता
जैसे आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। नया नियम यूजीसी विनियम, 2012 का स्थान लेता है। हर उच्च शिक्षण संस्थान में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाने का प्रावधान किया गया है, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करेगा और कमजोर वर्गों को सहयोग देगा।
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इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों को समान अवसर देना है। यूजीसी के नए नियम (UGC Bill 2026 In Hindi) और बदलावों को निम्नलिखित सन्दर्भ में समझा जा सकता है-
1. समान अवसर केंद्र, यानी Equal Opportunity Centre (EOC) की अनिवार्यता
प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र की स्थापना अनिवार्य की गई है। यह केंद्र वंचित, हाशिए पर स्थित और कमजोर वर्गों के छात्रों को शैक्षणिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करेगा।
2. इक्विटी कमेटी का गठन
प्रत्येक संस्थान में एक इक्विटी कमेटी (Equity Committee) बनाई जाएगी, जो भेदभाव से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेगी।
3. प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र
नए नियमों के तहत 24×7 हेल्पलाइन, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, तय समय-सीमा में अनिवार्य कार्रवाई का प्रावधान है।
4. Equity Ambassadors और Squads
संस्थानों में Equity Ambassadors / Squads की व्यवस्था की गई है, जिनका कार्य समानता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना, निगरानी रखना और रिपोर्टिंग करना होगा।
5. भेदभाव की व्यापक परिभाषा
नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा को अधिक व्यापक बनाया गया है, ताकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के भेदभाव को पहचाना जा सके।
6. दंडात्मक प्रावधान और जवाबदेही
यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो यूजीसी को यह अधिकार है कि वह संस्थान का अनुदान रोक सकता है अथवा उसकी मान्यता निलंबित या रद्द कर सकता है।
यूजीसी विनियम, 2026 पीडीएफ देखें...
यूजीसी विनियम, 2012 और 2026 में क्या बदला?
| बिंदु | पुराने UGC विनियम (2012) | नए UGC विनियम (2026) |
|---|---|---|
| विनियम | एंटी-डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशंस, 2012 | प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 |
| मुख्य उद्देश्य | विश्वविद्यालयों में भेदभाव को रोकना | उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, समावेशन और निष्पक्षता को बढ़ावा देना |
| दायरा (Scope) | मुख्य रूप से जाति आधारित भेदभाव पर केंद्रित | जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता, क्षेत्र, नस्ल आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को शामिल किया गया |
| प्रकृति | अधिकतर सलाहात्मक दिशा-निर्देश | अनिवार्य और लागू करने योग्य प्रावधान |
| समितियों का प्रावधान | आंतरिक समिति बनाने का सुझाव | प्रत्येक संस्थान में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य |
| इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) की स्थापना | सिफारिश के रूप में | अनिवार्य |
| शिकायत निवारण व्यवस्था | स्पष्ट और मजबूत तंत्र का अभाव | स्पष्ट शिकायत निवारण प्रणाली और हेल्पलाइन का प्रावधान |
| यूजीसी की भूमिका और अधिकार | सीमित निगरानी | निगरानी, जांच और आवश्यक कार्रवाई करने की अधिक स्पष्ट भूमिका |
| नियम न मानने पर कार्रवाई | दंड स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं | चेतावनी, फंडिंग पर असर या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना |
यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्या हो रहा?
इस नए नियम को लेकर कई राज्यों में विरोध तेज हो गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। बरेली के ADM अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने इस मुद्दे को और सुर्खियों में ला दिया।
- विरोध करने वालों की मुख्य आपत्तियां
- शिकायत के लिए ठोस सबूत की अनिवार्यता नहीं।
- एक बार आरोप लगने पर आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है।
- नियम का दायरा सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षक और स्टाफ भी शामिल।
- जनरल कैटेगरी के लोगों के साथ भेदभाव को लेकर स्पष्टता नहीं।
- कुछ संगठनों का कहना है कि नियम का दुरुपयोग किया जा सकता है।
पूरे विवाद पर शिक्षा मंत्रालय का रुख
यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में समानता और गरिमा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के मुताबिक, जल्द ही इस नियम को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा ताकि किसी तरह का गलत इस्तेमाल न हो।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, याचिका दायर
यूजीसी विनियम से जुड़ा मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए एक नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति दे दी। याचिका में कहा गया है कि इस नियम में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा बहुत सीमित है और कुछ वर्गों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखा गया है।
अगली सुनवाई 19 मार्च को
बुद्धवार को सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक नए नियमों पर रोक लगा दी और कहा कि तब तक 2012 वाले नियम ही लागू रहेंगे। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।