'बाएं घुटने ने दो दिन की छुट्टी ले ली'; बैसाखी के सहारे चलते दिखे ऋतिक रोशन, अब हेल्थ पर किया शॉकिंग खुलासा
Hrithik Roshan Health: ऋतिक रोशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे बैसाखी के सहारे चलते दिख रहे हैं। उन्हें इस तरह देख फैंस की चिंता बढ़ गई हैं। अब ऋतिक रोशन ने अपनी हेल्थ पर अपडेट दिया है।
विस्तार
ऋतिक रोशन अपने अभिनय ही नहीं, बल्कि डांस मूव्स और फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। मगर, बीते दिन उन्हें बैसाखी के सहारे चलते देखा गया। वे गोल्डी बहल और सोनाली बेंद्रे के घर आयोजित एक पार्टी में शिरकत करने पहुंचे थे। अपने चहेते सितारे को यूं बैसाखी के सहारे चलते देख फैंस की चिंता बढ़ गई और सवालों की झड़ी लग गई कि आखिर डुग्गू को हुआ क्या है? तमाम सवालों के बाद ऋतिक ने इंस्टाग्राम पर विस्तार से अपनी हेल्थ पर अपडेट शेयर किया है। साथ ही मजाकिया अंदाज में बताया कि वे बैसाखी के सहारे क्यों चले?
कहा- 'घुटने ने दो दिन की छुट्टी ले ली'
ऋतिक रोशन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट शेयर कर एक लंबा नोट लिखा है। उनका कहना है कि उनका शरीर थोड़ा अलग तरीके से काम करता है और शरीर के कई हिस्से अपने आप अलग-अलग दिन बंद हो जाते हैं। एक्टर ने बैसाखी के सहारे चलने की वजह बताते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका घुटना दो दिन के लिए छुट्टी पर चला गया था। इस वजह से ऐसा हुआ। उनके शरीर के अंग इसी तरह काम करते हैं और यह उनका 'न्यू नॉर्मल' है। एक्टर ने कहा कि वे जिस स्थिति से गुजर रहे हैं, उसमें ऐसा हो जाता है।
'मुझे ऐसे अनुभव मिलते हैं, जो बाकी लोगों को नहीं मिलते'
ऋतिक ने लिखा है, 'कल मेरे बाएं पैर ने अचानक मेरे बाकी शरीर से दो दिन की छुट्टी ले ली। इस चक्कर में पूरे दिन परेशान रहा। यह मेरे लिए अब 'नॉर्मल' है। हम अपने शरीर के काम करने का तरीका कभी पूरी तरह से नहीं समझ पाएंगे। लेकिन, मेरा शरीर बाकी सबसे थोड़ा अलग है। शरीर के हर हिस्से का अपना ON/OFF बटन है। मेरा बायां पैर इस फीचर का इस्तेमाल जन्म से करता है। बायां कंधा और दायां टखना भी ऐसा ही करते हैं। बस बंद हो जाता है। यह एक मूड है। इसकी वजह से मुझे ऐसे-ऐसे अनुभव मिले हैं, जो ज्यादातर लोगों को नहीं मिलते'।
'जबान डिनर शब्द बोलना बंद कर देती है'
ऋतिक रोशन ने आगे लिखा है, 'मैं बड़े ही गर्व के साथ यूं घूमता हूं, जैसे मेरे दिमाग में ऐसे न्यूरॉन्स हैं, जो अचानक आई निराशा में माहिर हों। मेरे पास अनोखा साइनेप्स सिस्टम है, जो मानो अंधेरे गड्ढों और घुमावदार रास्ते बनाने में मास्टर हो। इसमें अंधकार और निराशा में डूबने की अनोखी क्षमता है। हालांकि, इनमें सबसे अच्छा मेरा सेंस ऑफ ह्यूमर है। उदाहरण के लिए- 'कुछ दिन मेरी जबान 'डिनर' शब्द बोलने से मना कर देती है। अब सोचिए कि मैं किसी फिल्म के सेट पर हूं, जहां मेरा डायलॉग है 'क्या आप डिनर के लिए घर आना चाहेंगे'? लेकिन मेरी जबान ने 'डिनर' बोलना बंद कर दिया है और इसलिए मैं बड़ी होशियारी से और पक्के तौर पर और बार-बार उसे 'लंच' के लिए इनवाइट करता हूं, क्योंकि लंच तो शुक्र है अभी भी ON है। यह सब देख मेरे डायरेक्टर भी पूरी तरह कंफ्यूज हो जाते हैं। आखिरकार वे इस रैंडम सिचुएशन को समझने की कोशिश करना छोड़ देते हैं।
क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं?
आप कॉमेडी की पूरी तरह तारीफ तब तक नहीं कर सकते जब तक आप इस सारे सीरियस काम में मेरे एनिमेटेड एक्सप्रेशन की भरमार को 'नहीं' देखते। पहले गलत शब्द बोलने पर अचानक हैरानी, फिर वही गलती दोबारा दोहराने पर हाथ ऊपर उठाना। नाक का एक हिम्मत वाला झटका (सलमान स्टाइल) और आखिर में मेरे साथ इस प्राइवेट साजिश पर सच में बेकाबू हंसी फूटना। बहुत काबिल असिस्टेंट मेरे कान में इतनी ईमानदारी और प्यार से सही शब्द फुसफुसाने की कोशिश करते रहते हैं कि मुझे प्यार का एहसास होता है। सोचता हूं कि क्या मुझे उन्हें इस बहुत ही सीक्रेट स्कीम में भरोसेमंद साथी के तौर पर शामिल कर लेना चाहिए। लेकिन इसके बजाय मैं मान लेता हूं, फिर पूरी नरमी के साथ मैं एक बार फिर कैमरे की तरफ मुड़ता हूं और 'लंच' कहता हूं जो आखिरी और फाइनल टेक होगा। क्या आप मेरी स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं?