तमाम जतन के बाद स्वदेश वापस लौटा इरफान खान का बेटा बाबिल, पत्नी ने लिखा, 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी'
- कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में आवाजाही बहुत मुश्किल हो गई है
- लंदन की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले बाबिल गुरुवार को मुंबई पहुंचे
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कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में आवाजाही बहुत मुश्किल हो गई है। भारत में भी सभी विदेशी यात्राओं पर पाबंदी के आदेश दे दिए गए हैं। इन मुश्किल हालातों से इरफान खान के बेटे बाबिल को भी दो चार होना पड़ा। लंदन की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले बाबिल गुरुवार को मुंबई पहुंचे। उनकी मां और इरफान की पत्नी सुतापा सिकदर ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की कि काफी मुश्किलों के बाद उनका बेटा स्वदेश वापस आ चुका है। गौरतलब है कि उन्होंने पहले यह जानकारी साझा की थी कि तमाम देशों में पाबंदियां लागू होने के बाद उनके बेटे की तरह दूसरे छात्रों को घर वापस आने के लिए फ्लाइट नहीं मिल पा रही थी।
अपने बेटे का स्वागत करने के लिए सुतापा खुद एयरपोर्ट पर मौजूद रहीं। सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए उन्होंने लिखा, 'सभी की दुआओं और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। बाबिल सुरक्षित भारत आ चुका है। जिन्होंने भी मदद की पेशकश की उनका धन्यवाद। उसकी फ्लाइट करीब एक घंटा विलंब थी। मैं इधर उधर देखकर बैचेन हो रही थी। बहुत लोग मास्क का इस्तेमाल कर रहे थे और आगमन पर गले मिल कर स्वागत कर रहे थे। मैंने अपनी तरफ से पूरी सर्तकता बरती। मैंने दो कार ली हुई थी। मैंने अपने बेटे को अपने कार में नहीं बैठने दिया और उसे गले भी नहीं लगाया। मैंने पूरी तरह से खुद को दस्ताने और दुपट्टा से ढका हुआ था। साथ ही मेरे दोनों ड्राइवर्स भी पूरी सर्तकता बरत रहे थे। एयरपोर्ट में मेरे बेटे का थर्मल चेक किया गया और जाने दिया गया।'
सुतापा ने आगे लिखा, 'मुझे वास्तव में आश्चर्य हुआ कि देश में जो स्थिति है उसमें हमें होम क्वारंटाइन का सुझाव क्यों नहीं दिया। उन्होंने उसे अपने फोन नंबर के साथ एक फॉर्म भरने के लिए कहा। मुझे उम्मीद है कि यह औपचारिकता नहीं है। मैं बेसब्री से कुछ दिनों के बाद उनके कॉल का इंतजार करूंगी। मैं बेवकूफ जैसा महसूस कर रही थी क्योंकि इसके बाद मेरा स्टाफ मुझे मानसिक समझ रहा होगा। जब सरकार इसे खतरनाक नहीं समझ रही है फिर भी मैं अपने बेटे को चौदह दिनों के लिए एक खाली फ्लैट ( होम क्वारंटाइन ) में रख रही हूं। क्योंकि हमें बचपन में सिखाया गया था कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। मानसिक कहलाने की कीमत पर सुरक्षित रहिए और अपना ख्याल रखिए। सभी तरह की मदद के लिए धन्यवाद।'
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