‘कहानी ऐसी हो जो सोचने पर मजबूर करे’, जॉन अब्राहम ने राकेश मारिया के किरदार को निभाना बताया चुनौतीपूर्ण
John Abraham: जॉन अब्राहम ने राकेश मारिया की बायोपिक के बारे में पहली बार बात की। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा…
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पिछले काफी वक्त से जॉन अब्राहम रोहित शेट्टी के निर्देशन में बनने वाली मुंबई के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया की बायोपिक को लेकर चर्चाओं में हैं। हाल ही में जॉन अब्राहम ने राकेश मारिया का किरदार निभाने और असल जिंदगी के लोगों को पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी के बारे में बात की। साथ ही उनका मानना है कि सिनेमा का काम सिर्फ मनोरंजन करना नहीं है। इसे फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन में बने रहना चाहिए।
फिल्म ऐसी हो जो खत्म होने के बाद भी आपके अंदर रह जाए
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान जॉन ने कहा कि दमदार कहानी कहने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जो मनोरंजन करे, सोचने पर मजबूर करे और फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के मन में बसी रहे। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हर कहानी आपको कुछ न कुछ देकर जानी चाहिए।
मनोरंजन जरूरी है, सिनेमा को हमेशा आपको जोड़े रखना चाहिए। लेकिन अगर कोई फिल्म थिएटर से निकलने या उसे देखने के बाद भी आपके साथ बनी रहती है, तो यह और भी अच्छी बात है। मैं प्रोजेक्ट्स इसलिए नहीं चुन रहा हूं कि वे कोई खास बात कहना चाहते हैं।
मैं उन्हें इसलिए चुनता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि वे ईमानदार हैं, अच्छी तरह से कही गई हैं और भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली हैं। अगर उनसे बातचीत शुरू होती है, तो यह एक बोनस है।
इतने साल में एक प्रोड्यूसर के तौर पर मुझे एहसास हुआ है कि मैं ऐसी कहानी को सामने लाने में मदद कर सकता हूं जिसे देखा जाना चाहिए। आखिर में, कहानी ही सबसे अहम होती है। अगर वह मुझे प्रभावित करती है, तो मैं उसे सपोर्ट करूंगा।
राकेश मारिया का किरदार निभाने के लिए उत्सुक हूं
मुंबई के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया की बायोपिक को लेकर भी जॉन अब्राहम ने बात की। उन्होंने कहा कि राकेश मारिया का करियर हमारे देश के इतिहास की कुछ अहम घटनाओं से जुड़ा रहा है, इसलिए उन्हें पर्दे पर उतारने में एक बड़ी जिम्मेदारी का एहसास होता है।
जब आप किसी असली इंसान का किरदार निभाते हैं, तो मकसद उनकी नकल करना नहीं होता, बल्कि उनकी पब्लिक इमेज के पीछे छिपे असली इंसान को समझना होता है। इसका मतलब है रिसर्च में काफी समय बिताना, उनकी सोच को समझना, उन पर आए दबावों और उनके द्वारा लिए गए फैसलों को जानना। राकेश मारिया का किरदार निभाना एक चुनौती है और मैं इसे पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए उत्साहित हूं।
कहानी कहने के सार्थक तरीकों में एक्टर की बढ़ती दिलचस्पी सिर्फ फिक्शन तक ही सीमित नहीं है। जॉन सोल कोहली की आने वाली फीचर-लेंथ डॉक्यूमेंट्री 'टेस्ट सब्जेक्ट V' के लिए प्रेजेंटिंग पार्टनर के तौर पर भी जुड़े हैं।
यह डॉक्यूमेंट्री कुणाल अवंती की कहानी है, जो इस फिल्म के क्रिएटर और प्रोड्यूसर भी हैं। जॉन कहते हैं कि इसकी ईमानदारी ने मुझे आकर्षित किया। असल में यह फिल्म लोगों को यह नहीं बताती कि उन्हें क्या मानना चाहिए, यह एक व्यक्ति की खोज का सफर है।
मुझे यह बहुत ही सच्चा लगा। आज के दर्शक पहले से कहीं ज्यादा उत्सुक हैं। जब कोई फिल्म एक दिलचस्प कहानी सुनाती है और ईमानदारी से अलग-अलग नजरिए पेश करती है, तो यह स्वाभाविक रूप से लोगों को अपनी जिंदगी के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती है। कोई सहमत है या असहमत, यह मायने नहीं रखता।