अभिनेत्री सुष्मिता सेन अपनी आगामी वेब सीरीज ताली में एक ट्रांसजेंडर की भूमिका अदा करने वाली हैं। हाल ही में एक्ट्रेस ने फिल्म का पहला लुक रिवील किया था, जिसमें वह दमदार लुक में नजर आ रही थीं। अपनी वेब सीरीज ताली के इस फर्स्ट लुक को रिवील करते हुए एक्ट्रेस ने लिखा था, अब बजाऊंगी नहीं बजवाऊंगी ताली। दरअसल सुष्मिता सेन की ये नई वेब सीरीज ताली, ट्रांसजेंडर श्रीगौरी सावंत पर बेस्ड है, जो एक सोशल एक्टिव्स्ट के रूप में सेक्स वर्कर्स के हित में काम करती हैं। हालांकि उनके लिए यह सफर बेहद दर्द और मुश्किलों भरा रहा है, क्योंकि आज के पढ़े लिखे समाज में भी एक ट्रांसजेंडर को ज्यादातर लोग उपेक्षा भरी नजरों से देखते हैं।
Taali series: जानिए कौन हैं श्रीगौरी सावंत जिनपर बनी है सुष्मिता की सीरीज 'ताली', दर्द भरी कहानी कर देगी भावुक
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श्रीगौरी सावंत ने एक मीडिया हाउस से बातचीत के दौरान अपने जीवन के संघर्ष के बारे में खुलकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि मूल रूप से पुणे की रहने वाली गौरी तीन भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। इस पर वह कहती हैं कि वह अपने माता-पिता की तीसरी संतान थीं, इसलिए ऊपर वाले ने उन्हें थर्ड बनाकर भेजा, वह बताती हैं कि मेरा एक भाई और बहन भी है। गौरी कहती हैं, बचपन से ही उन्हें ट्रांसजेंडर होने का खामियाजा भुगतना पड़ा। जब श्रीगौरी सावंत मजह नौ वर्ष की थीं, तो उनकी मां नए इस दुनिया को अलविदा कह दिया और ट्रांसजेंडर होने की वजह से उन्हें बचपन से ही बुलिंग का शिकार होना पड़ा। इस वजह से वह घर में भी सहमी हुई रहती थीं, कोई उनसे बात नहीं करना चाहता था, वह बताती हैं कि मुझे मार नहीं पड़ी लेकिन उनका इग्नोर करना अंदर तक कचोट जाता था, और यह बहुत दर्दनाक होता है।
जब पिता ने जीते जी कर दिया अंतिम संस्कार
श्रीगौरी सावंत ने बातचीत के दौरान कहा कि वह जख्म न कुरेदे जाएं तो बेहतर है क्योंकि अब भी मैं सिहर जाती हूं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने जीते जी गौरी सावंत का अंतिम संस्कार कर दिया था। घर में उनका रहने और न रहने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था। ऐसे में उन्होंने घर से भागने का फैसला किया और जब एक दिन उनके पिता खान लाने गए तो वह घर से निकल गईं।
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गौरी सावंत कहती हैं कि वह महज 60 रुपये लेकर घर से निकली थीं और आज भी जब मुंबई से पुणे का सफर करती हैं तो वो रास्ते देखकर उनके जख्म ताजा हो जाते हैं। मुंबई आने के बाद श्रीगौरी सावंत ने वड़ापाव खरीदा और इसके बाद गणपति मंदिर से मिले प्रसाद को चार-पांच बार खाया। वह कहती हैं कि न जानें कितनी रातें प्लेटफार्म पर गुजारीं। वह कहती हैं कि इसलिए अगर आज कोई भी किन्नर उनके पास भागकर आता है तो वह बिना कोई सवाल पूछे सबसे पहले उससे कहती हैं कि खान खा ले।
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ऐसे हुई एनजीओ में काम की शुरुआत
श्रीगौरी सावंत बताती हैं कि जब वह मुंबई आईं तो कंचन अम्मा (जो गौरी सावंत की गुरु हैं) ने उन्हें अपने यहां जगह दी। वह बताती हैं कि जब कोई ट्रांसजेंडर होता है तो या तो सेक्स वर्कर बनता है या फिर सिग्नल पर भीख मांगता है। गौरी सावंत कहती हैं कि मैं सुंदर नहीं थी तो सेक्स वर्कर नहीं बनी, मुझसे भीख नहीं मांगी गई और मैं एनजीओ में कम करने लगी। इस तरह से वह सेक्स वर्कर्स के लिए काम करने लगीं और इस समय महाराष्ट्र की एड्स कंट्रोल सोसायटी के लिए काम करती हैं।
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