कानून की पढ़ाई कर अभिनय में आईं अभिनेत्री पल्लवी शारदा की जन्मभूमि ऑस्ट्रेलिया है। अपने भारतवंशी होने का न सिर्फ उन्हें अभिमान है बल्कि वह दुनिया भर में अपनी इस पहचान पर इतराती भी फिरती हैं। क्वींसलैंड में शूटिंग में व्यस्त पल्लवी शारदा से ये खास बातचीत की अमर उजाला के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
‘अमर उजाला’ से बोलीं भारतवंशी अभिनेत्री पल्लवी शारदा- ‘मैं हमेशा याद रखती हूं मेरी विरासत क्या है’
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हॉलीवुड फिल्मों में आप लगातार काम कर रही हैं, हिंदी में बात करने में आपको दिक्कत तो नहीं होती?
हिंदी में बातें किए हुए मुझे अरसा हो गया और हिंदी में इंटरव्यू दिए तो काफी साल हो गए। हिंदी मेरी थोड़ी गड़बड़ हो सकती है लेकिन इसमें मुझे जो अपनापन मिलता है, उसका असर ही अलग है। हिंदी में बात करने को मैं तरस गई हूं। इस भाषा में बातचीत करते हुए जो अपनापन महसूस होता है, उसकी कमी मुझे अक्सर खलती है।
हॉलीवुड फिल्म ‘टॉम एंड जेरी’ में काम करने का प्रस्ताव मिला तो पहली प्रतिक्रिया क्या रही?
बहुत ही रोमांचक लम्हा था वह। मैं ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुई, यहीं बड़ी हुई। अभी यहीं क्वींसलैंड में एक हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग कर रही हूं। लेकिन मैं हूं बहुत भारतीय। बचपन में जब मम्मी पापा दादा दादी से मिलाने मुझे दिल्ली लेकर जाते तो वहां लोगों को मैं टॉम एंड जेरी के कार्टून देखते पाती थी। मेरे पापा नलिन कांत शारदा बहुत बड़े फैन रहे हैं टॉम एंज जेरी के। वह आईआईटी दिल्ली में पढ़े हैं। वह बताते हैं कि उनके संस्थान में एक प्रोजेक्टर स्क्रीन होता था और उस पर अक्सर वहां के छात्र टॉम एंड जेरी का कार्टून देखते थे।
और, आपके बचपन का पसंदीदा कार्टून क्या रहा?
हम ऑस्ट्रेलिया में बड़े हुए हैं तो यहां तो अजीब से कार्टून होते थे। कंगारू पर एक कार्टून होता था स्किपी नाम से। जो बच्चे अमेरिका में या भारत में पले बढ़े होते हैं, कार्टून को लेकर उनके संदर्भ अलग हो जाते हैं। हम यहां स्किपी देखकर बड़े हुए। मजाक में हम उसे स्किपेंदर बुलाते थे।
फिल्म ‘टॉम एंड जेरी’ में कलाकारों की शूटिंग अलग हुई है और एनीमेशन का हिस्सा इसमें बाद में मिलाया गया है, कितना काफी मुश्किल रहा होगा ऐसे शूटिंग करना?
महामारी फैलने से ठीक पहले जो फिल्में मैंने पूरी कीं, उनमें फिल्म ‘टॉम एंड जेरी’ भी शामिल रही। हम वार्नर ब्रदर्स के लंदन स्टूडियो में शूटिंग कर रहे थे और शूटिंग के समय हमको अपने आसपास कुछ दिखता ही नहीं था, हम तो बस ऐसे ही इनकी कल्पना करके अभिनय कर रहे थे। जैसे फिल्म में एक दृश्य है जिसमें टॉम मेरी गाड़ी का पीछा कर रहा है। वह ऊपर से आ रहा है और मुझे उसकी कल्पना करके अपना अभिनय करना है। ऐसे ऐसे भाव चेहरे पर लाने पड़े कि यूं लगा मेरा भरतनाट्यम अवतार हो गया उस दृश्य में। एक आम फिल्म से काफी अलग अनुभव रहा इस फिल्म में।