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‘मंटो ने मुश्किल दौर से बाहर निकाला’, रसिका दुग्गल बोलीं- ऑडिशन से नहीं होती दिक्कत; रिजेक्शन पर कही ये बात

Fri, 17 Jul 2026 10:05 AM IST
Aradhya Tripathi एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Aradhya Tripathi Updated Fri, 17 Jul 2026 10:05 AM IST
सार

Rasika Dugal: रसिका दुग्गल ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। जानिए कैसे नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘मंटो’ ने उन्हें मुश्किल दौर से निकाला…

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Rasika Dugal Thinks Manto With Nawaz Pulled Her Out Of A Career Says Not To Internalise Every Rejection
मंटो फिल्म के एक सीन में रसिका दुग्गल और नवाजुद्दीन सिद्दीकी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रसिका दुगल ने गहरे और हटकर किरदारों को चुनकर अपना करियर बनाया है। लेकिन वह मानती हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनका करियर किस दिशा में जा रहा है। जहां 'मिर्जापुर' ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई, वहीं रसिका का कहना है कि 'मंटो' ने उन्हें उनके करियर के सबसे मुश्किल दौर से बाहर निकाला। रसिका ने उन किरदारों के बारे में बात की जिन्होंने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने बताया कि वह ऑडिशन देने से क्यों नहीं कतरातीं।

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‘मंटो’ ऐसे समय में मिली, जब सबसे ज्यादा जरूरत थी
इंडिया टुडे के साथ बातचीत में अपने करियर के लिए सबसे अहम प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए रसिका ने कहा कि 'मिर्जापुर' बेशक सबसे ज्यादा लोगों तक पहुंची। लेकिन 'मंटो' ऐसे समय में मिली जब मुझे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

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एक ऐसा प्रोजेक्ट जिसमें लोगों ने मुझे एक अलग नजरिए से देखा और जो बहुत बड़े दर्शकों तक पहुंचा, वह निश्चित रूप से 'मिर्जापुर' था। लेकिन मुझे लगता है कि जिस चीज ने मुझे उस मुश्किल दौर से बाहर निकाला, वह 'मंटो' थी।
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'किस्सा' और 'मंटो' के बीच सच में एक लंबा गैप था और मुझे ज्यादा काम नहीं मिल रहा था। उस समय मुझे कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा, जो बहुत मुश्किल था। वह सच में ऐसा दौर था जब मुझे लगता था, 'अब यहां से आगे क्या? अब मैं कहां जाऊं? किस दरवाजे पर दस्तक दूं और किससे पूछूं?'

Rasika Dugal Thinks Manto With Nawaz Pulled Her Out Of A Career Says Not To Internalise Every Rejection
रसिका दुग्गल - फोटो : इंस्टाग्राम @rasikadugal

मुझे ऑडिशन देने में कोई दिक्कत नहीं
इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा समय बिताने के बावजूद रासिका कहती हैं कि उन्होंने कभी भी ऑडिशन देने को अपने स्तर से नीचे नहीं समझा। मैंने हमेशा कहा है कि मैं ऑडिशन दूंगी।

पिछले कुछ साल में लोगों ने मुझसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा है, लेकिन अगर वे कहते हैं, तो मुझे कोई परेशानी नहीं है। मैं खुशी-खुशी ऐसा करूंगी क्योंकि इससे मुझे और उन्हें उस रोल में मुझे देखने का मौका मिलता है। मुझे यह जानने का भी मौका मिलता है कि वे क्या चाहते हैं। तो यह दोनों के लिए फायदेमंद है। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।

खुशकिस्मत हूं की टाइपकास्ट नहीं हुई
रसिका का कहना है कि वह खुशकिस्मत रहीं कि एक ही तरह के किरदारों में बंधकर नहीं रह गईं। 'मिर्जापुर' में एक्टर्स को उनके किरदारों के नाम से जाना जाता है। लेकिन मैं लकी थी क्योंकि 'मंटो', 'मिर्जापुर' और 'दिल्ली क्राइम' लगभग एक ही समय पर रिलीज हुए थे।

'दिल्ली क्राइम' और 'मिर्जापुर' में बिल्कुल अलग-अलग किरदार थे। इसलिए मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे उस विविधता को आजमाने और दिखाने का मौका मिला। दोनों ने अपने-अपने तरीके से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।

'दिल्ली क्राइम' एक बहुत ही शानदार शो है। रसिका ने माना कि टाइपकास्टिंग से बचना हमेशा उनकी प्राथमिकता नहीं थी। अपने करियर के शुरुआती कुछ साल में एक ही तरह के रोल में बंधे रहने की चिंता करने के बजाय काम मिलना ज्यादा जरूरी था।

करियर की शुरुआत में मैं सोचती थी, 'चलो स्टीरियोटाइप ही सही, लेकिन कम से कम काम तो मिलेगा।' मैं सच में यह नहीं सोच रही थी कि 'अगर मैं एक ही तरह के रोल में बंध गई तो क्या होगा?' मैं बस यही सोच रही थी कि 'मुझे बस काम करना है।'

Rasika Dugal Thinks Manto With Nawaz Pulled Her Out Of A Career Says Not To Internalise Every Rejection
रसिका दुग्गल - फोटो : इंस्टाग्राम @rasikadugal
रिजेक्शन या सफलता दिल से नहीं लगाना चाहिए
रिजेक्शन को लेकर एक्ट्रेस ने कहा कि इतने साल में मैंने सीखा है कि हर रिजेक्शन या हर सफलता को दिल से नहीं लगाना चाहिए। अनुभव से पता चलता है कि यह पूरी तरह से आप पर निर्भर नहीं है।

जब चीजें ठीक से नहीं होतीं तो आपको इसे इतना व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए। जब चीजें ठीक हो जाती हैं, तो आप उसका पूरा श्रेय भी नहीं ले सकते। यह सब किस्मत की बात है। फिर भी, जब कुछ अच्छा होता है तो आप बहुत उत्साहित महसूस करते हैं और जब कुछ नहीं होता तो बहुत बुरा लगता है। मैं यह मानना चाहती हूं कि आज मैं इन स्थितियों को संभालने में बेहतर हूं।
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