फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अपने ही बयान से विवादों में घिर जाते थे ओम पुरी, फिर फूट-फूटकर रोते थे

Sat, 06 Jan 2018 05:02 PM IST
अतुल सिन्हा
अतुल सिन्हा Updated Sat, 06 Jan 2018 05:02 PM IST
विज्ञापन
Remembering the veteran Indian actor Om Puri
om puri
आज के दौर में बेशक समानांतार सिनेमा पर बहस या चर्चा बेमानी हो, लेकिन इस दौर से निकला जो एक किरदार लंबे समय तक सिल्वर सक्रीन पर राज करता रहा वो बेहद सहज और ज़िंदादिल ओम पुरी ही था। उनके गुज़रने से कुछ महीने पहले इस संवेदनशील कलाकार को देश ने फूट फूट कर रोते देखा था।


सीमा पर मारे जाने वाले जवानों पर की गई अपनी ही एक टिप्पणी से ओम इतने आहत हुए थे कि इसके बाद वो बार बार सफाई देने को मजबूर हो गए। उनके बयानों को लेकर अक्सर विवाद हुए चाहे वो बयान देश की सियासत से जुड़े रहे हों, चाहे कांग्रेस के बारे में, चाहे मोदी के बारे में या फिर आमिर खान के बारे में।
 
Remembering the veteran Indian actor Om Puri
om puri
देश ने ओम पुरी को ‘तमस’ से पहचाना। भीष्म साहनी के इस शानदार उपन्यास में सांप्रदायिक ताकतों और सामाजिक व्यवस्थाओं के साथ सियासी ताने बाने को जिस खूबसूरती से बुना गया, और जिस तरह दूरदर्शन पर यह धारावाहिक चर्चित हुआ, उसमें मुख्य किरदार ओम की अदाकारी का ही कमाल था।

फिर तो बिहार और पश्चिम बंगाल के भूमि संघर्ष और पुलिस उत्पीड़न के साथ साथ सियासत और अपराध के गठजोड़ पर जो फिल्में उस दौर में बनीं, उसके लिए लोगों को सबसे बेहतर किरदार ओम ही लगते थे। अपनी आवाज़ की बदौलत, अपनी संवाद अदायगी की वजह से, आंखों और चेहरे की अपनी सख्ती की वजह से।
 
Remembering the veteran Indian actor Om Puri
om puri

लेकिन ओम पुरी निजी ज़िंदगी में कितने सहज थे, इसका अंदाज़ा उनसे मिलने के बाद पता चलता था। कुछ साल पहले जब समानांतर और व्यावसायिक हिन्दी सिनेमा पर एक सेमिनार में हिस्सा लेने वो इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आए तो उन्होंने वहां बैठे तमाम कथित बुद्धिजीवियों पर चुटकी ली।

कहने लगे ‘सिनेमा तो सिनेमा है, इसे कला सिनेमा, समानांतर सिनेमा या व्यावसायिक सिनेमा तो बुद्धिजीवी लोग बना देते हैं। हम कलाकारों के लिए किरदार और कहानी अहम है। हम अपना काम करते हैं लेकिन आप उसे खांचे में बांट देते हैं।’


 
विज्ञापन
विज्ञापन
Remembering the veteran Indian actor Om Puri
om puri
ओम पुरी के लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय अपने घर जैसा था। अक्सर वो वहां आते थे। इसलिए कि यहां से उनका गहरा नाता रहा और यहीं से उन्हें पहचान भी मिली। यहां के बड़े नाट्य समारोहों में ओम भले ही कुछ देर के लिए सही, आते ज़रूर थे।

इसी दौरान उनके साथ एक बार एनएसडी की घास पर बैठ कर बातें हुईं और लेकिन चंद ही पल में लोगों ने ऐसा घेरा कि वो कहने लगे, अरे भई, बड़े बड़े कलाकार हैं, मैं तो कुछ भी नहीं। बस नाटकों में अपनी गहरी दिलचस्पी शुरू से रही है, इसलिए यहां भागा चला आता हूं।
विज्ञापन
Remembering the veteran Indian actor Om Puri
om puri
एक बार एक चैनल के लिए रंगमंच से जुड़ा एक कार्यक्रम बनाने के दौरान ओम पुरी से कई बार फोन पर बात हुई। खासियत ये कि अगर आप उन्हें फोन करें तो कॉल बैक वो ज़रूर करते। कभी खुद को बड़ा नहीं माना। कार्यक्रम के सिलसिले में जानकर उत्साहित हुए और कहने लगे, कहां आजकल टीवी वाले रंगमंच और थिएटर पर कार्यक्रम बनाते हैं, इसमें मसाला तो होता नहीं...

फिर एक ज़ोरदार ठहाका लगाया फिर कहने लगे... आपका चैनल तो बहुत पैसे वालों का है, कुछ हमें भी मिलेगा क्या, फिर ठहाका लगाया और कहा, यार मैं मज़ाक कर रहा था... दिल्ली आ रहा हूं तब आराम से बात करते हैं, मेरे पास बहुत कुछ है कहने को थिएटर के बारे में। बहरहाल वो मौका नहीं आया।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed