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लव सींस के बिना भी दिल को छू सकती हैं फिल्में: नरगिस फाकरी
तृप्ति मिश्रा
Updated Sat, 24 Aug 2013 07:38 AM IST
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'रॉकस्टार' से चर्चा में आई नरगिस फाकरी इस फिल्म के बाद कहीं और दिखाई नहीं दीं। 'मद्रास कैफे' के रूप में नरगिस फाकरी की दूसरी फिल्म दर्शकों के सामने हैं
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इस फिल्म में अंदाज के साथ नरगिस की अदाएं भी बदली हुई हैं। अब वह हिंदी सिनेमा में विशुद्व अभिनेत्री के रूप में पूरी तरह से स्थापित होने के लिए तैयार हैं। क्या हैं नरगिस के इरादे, उन्होंने बातचीत में बताया। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश।
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'रॉकस्टार' के बाद आप कहां गायब हो गईं थीं ?
इस मूवी के बाद मेरी व्यस्तता बहुत बढ़ गई थी। फोटो शूट्स, ऐड फिल्मस के बहुत सारे प्रोजेक्ट मुझे पूरे करने थे। अमेरिका में भी काफी प्रोजेक्ट्स पर मुझे काम करना था।
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इसके अलावा इन दिनों मेरे भारत और अमेरिका के कई चक्कर लगते रहे। मैं भारत में घूमी मुंबई की पूरी सैर की यहां की जगहों से खुद को परिचित किया। अब पूरी तैयारी के साथ फिल्मों में नजर आऊंगी।
मद्रास कैफे में काम करके कैसा लगा ?
बहुत ही अच्छा। ये बहुत अलग तरह की फिल्म है जिसमें मुझे एक इंटरनेशनल जर्नलिस्ट का रोल अदा करने का मौका मिला। मुझे किरदार बहुत पसंद आया। जिसमें एक्टिंग का काफी स्कोप मिला।
जॉन और शुजीत से काफी कुछ सीखने को मिला। अपने रोल को पूरी वफादारी से निभाने के लिए मैंने इंटरनेशल जर्नलिस्ट को रिपोर्टिंग करते हुए देखा। ऐसे प्रोग्राम टीवी पर देखे। यह सब सीखने का अनुभव काफी रोमांचित कर देने वाला रहा।
'मद्रास कैफे' एक मेल डोमिनेंट फिल्म है। ऑफिसर के रूप में जॉन 'फोर्स' में रंग जमा चुके हैं। कहीं आपको इससे इन सिक्योरिटी तो फील नहीं हुई?
जरा भी नहीं। बल्कि इस फिल्म का हिस्सा बनकर मैं बहुत प्रसन्न हूं। मेरा जो रोल है उसने मुझे काफी संतुष्टि दी है। मेरे लिए ये ही बड़ा एचीवमेंट है।
लेकिन कुछ लोग तो फिल्म का काफी विरोध कर रहे हैं। आपकी इस पर क्या राय है
फिल्म का सब्जेक्ट बहुत अच्छा है। इससे किसी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। जो लोग विरोध कर रहे हैं उनसे मैं बस ये ही अनुरोध करूंगी कि फिल्म को देखे बिना जज न करें। इसे देखने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचें।
फिल्म में जॉन हैं लेकिन उनके साथ आपका रोमांस फिल्म में नहीं है। क्या लोग इसे स्वीकार करेंगे?
जी बिल्कुल! लव एंगल ही केवल फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं होते। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो लव सीन्स के बिना भी अपने सब्जेक्ट के आधार पर लोगों के दिलों को छू जाती हैं।
'मद्रास कैफे' ऐसी ही एक मूवी है। जिसमें लव सीन्स के बिना भी मेरी और जॉन की एक अलग ही कैमिस्ट्री पर्दे पर नजर आ जाएगी।
जॉन और रणबीर किसके साथ काम करना ज्यादा पसंद आया?
दोनों के ही साथ। इन दोनों अभिनेता अच्छे इनसान हैं। बहुत ही हैल्पिंग और केयरिंग हैं।
आगे की क्या रणनीति है ?
अभी तो सारा फोकस 'मद्रास कैफे' पर है। इसके अलावा कई फिल्मों के प्रोजेक्ट मेरे हाथ में हैं। मैं वरुण धवन के साथ काम कर रही हूं।
शौकीन के रिमेक में मैं अक्षय कुमार के साथ नजर आऊंगी। बाकी अभी एक्टिंग में बहुत कुछ सीखना बाकी है।
कौन सा देश ज्यादा पसंद है भारत या अमेरिका?
आं..न्यूजीलेंड! हंसते हुए ये मेरी ड्रीम सिटी है। वैसे भारत से मुझे काफी लगाव है। यहां अब मैं काफी आ जा रही हूं। मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है। वैसे भी भारत से मेरा संपर्क रहा है।