‘एक ही कैमरे से शूट हुआ गाना’, सौरभ शुक्ला ने साझा किए ‘गोली मार भेजे में’ गाने से जुड़े मजेदार किस्से
Saurabh Shukla: सौरभ शुक्ला ने ‘सत्या’ फिल्म के ‘गोली मार भेजे में’ गाने से जुड़े मजेदार किस्से सुनाए। सौरभ ने बताया कैसे शूट हुआ पूरा गाना और सामने आईं क्या-क्या दिक्कतें…
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अभिनेता सौरभ शुक्ला इन दिनों अपने निर्देशन में बनी फिल्म ‘जब खुली किताब’ को लेकर चर्चाओं में हैं। इस बीच अभिनेता ने अपने उस गाने से जुड़ा मजेदार किस्सा साझा किया, जिसमें वो ‘कल्लू मामा’ बने नजर आए थे। सही समझे आप, हम बात कर रहे हैं रामगोपाल वर्मा की सुपरहिट फिल्म ‘सत्या’ के गाने ‘गोली मार भेजे में’ की। इस गाने में सौरभ शुक्ला एक बेफिक्र और मदहोश अंदाज़ में जोश से भरी भीड़ के बीच नजर आते हैं। अब अभिनेता ने इस गाने से जुड़े कुछ दिलचस्प और मजेदार किस्से साझा किए हैं।
सिर्फ साढ़े पांच घंटे में शूट हुआ गाना
आईएनएस से बातचीत में सौरभ शुक्ला ने गाने की शूटिंग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कल्लू मामा गाने के लिए आपको उस समय के हालात समझने होंगे जब यह फिल्म बनी थी। उन दिनों एक परंपरा थी, एक तय चलन था कि फिल्मी गानों की शूटिंग कम से कम 3 से 4 दिन तक चलती थी।
बड़े और भव्य गानों की शूटिंग में 10 से 15 दिन लग जाते थे। तो, अगर किसी गाने को बनाने में 3 से 4 दिन लगने चाहिए थे, तो आपको क्या लगता है कि इसे बनाने में कितने दिन लगे? इसे ठीक साढ़े पांच घंटे में शूट किया गया।
गाने में इस्तेमाल हुई थी असली बीयर
यही नहीं सौरभ शुक्ला ने ये भी बताया कि गाने को सिर्फ एक कैमरे के सेटअप से ही शूट किया गया था। यह मल्टीपल-कैमरा सेटअप नहीं था। यह एक सिंगल-कैमरा सेटअप था। वहां एक अलग ही ऊर्जा थी। यह पहले से तय नहीं था, बिल्कुल बेकाबू था।
सबसे अच्छी बात यह थी कि टीम ने शूटिंग के लिए असली बीयर मुहैया कराई। जिसे हमने, जाहिर है पिया नहीं, क्योंकि हम काम कर रहे थे, हम बेवकूफ नहीं हैं। इसलिए हमने नहीं पिया। लेकिन साढ़े पांच घंटे के बाद पैकअप हो गया। फिर मेरे घर पर हम सबने जमकर पार्टी की।
जब पुलिस ने रोकी सौरभ शुक्ला की कार
गाने से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा सुनाते हुए अभिनेता ने बताया शूटिंग पूरी करने के बाद हम लोगों ने अपने कपड़े भी नहीं बदले। उसी ड्रेस में सब सीधे पार्टी में जा रहे थे। हम सब मेरी कार में बैठ लिए थे।
सारे जितने एक्टर थे। मनोज बाजपेयी, आदित्य श्रीवास्तव, बहुत सारे लोग थे। बैठ के हम लोग अपनी गाड़ी में जा रहे थे। अचानक हमारी कार पुलिस ने रोक दी। उन्होंने दरवाजा खोला और बोला, 'बाप रे! अंदर क्या पूरा का पूरा भट्टी लगा रखी है तुम लोगों ने?’
हमने कहा, 'नहीं सर, हमने कुछ नहीं पिया है।' उन्होंने कहा, 'क्या नहीं पिया है?' पूरी तुम्हारी कार में ऐसी बदबू आ रही है जैसे समुद्र के अंदर पूरी शराब की भट्टी हो।’ इसके बाद जैसे-तैसे करके हम लोग वहां से निकले।
1998 में आई 'सत्या' का निर्देशन राम गोपाल वर्मा ने किया है। इसमें जे. डी. चक्रवर्ती, उर्मिला मातोंडकर और मनोज बाजपेयी के साथ सौरभ शुक्ला, आदित्य श्रीवास्तव और परेश रावल भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म सत्या की कहानी है, जो मुंबई में नौकरी की तलाश में आता है। भीकू म्हात्रे से दोस्ती करता है और मुंबई के अंडरवर्ल्ड में फंस जाता है। इसे बॉलीवुड की कल्ट फिल्मों में गिना जाता है।
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