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झरने में नहाती मंदाकिनी ने बढ़ाई थीं बाप-बेटे में दूरियां!

Sat, 18 May 2013 01:24 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 18 May 2013 01:24 PM IST
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story of dispute between raj kapoor and rajiv kapoor

राज कपूर ने अपने सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर को 'राम तेरी गंगा मैली' फिल्म से लांच किया। यह फिल्म चर्चित और हिट हुयी लेकिन राजीव कपूर की वजह से नहीं बल्कि झरने के नीचे नहाती हुयी मंदाकिनी की वजह से। शायद मंदाकिनी ही वह वजह थीं जिसके चलते राज और राजीव में कभी न खत्म होने वाली एक दूरी बन गयी।

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यह फिल्म जैसे-जैसे सफल और चर्चित होती गयी इस फिल्म के हीरो राजीव कपूर उतने ही कुठिंत और पिता से नाराज होते गए। इस फिल्म के बाद राजीव कपूर और राज कपूर में अनबन की नौबत तक बन गयी।
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फिल्म की चारो तरफ चर्चा हो रही थी लेकिन इस चर्चा से राजीव कपूर गायब थे। लोग या तो फिल्म की मेकिंग पर बात करते या फिर मंदाकिनी पर। राज कपूर भी इस बात से इतरा रहे थे कि उन्होंने कैसे अपने कैमरे के जादू से कुछ भी न दिखाते हुए सब कुछ दिखा दिया।
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'राम तेरी गंगा मैली' सिर्फ राजकपूर और मंदाकिनी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गयी। राजीव कपूर को इस फिल्म के हिट होने का कोई लाभ नहीं हुआ। मंदाकिनी रातो-रात स्टार बन गयीं लेकिन राजीव कपूर वहीं के वहीं रह गए।

राजीव कपूर ने खुद को अंडर स्टीमेट किए जाने का दोष मन ही मन राज कपूर पर मढ़ा। हालांकि उन्होंने कभी खुलकर इस बात की नाराजगी उनके जीते-जी प्रकट नहीं की। मरने के बाद भी वह खामोश तरीके से अपने क्रोध का इजहार करते रहे।

राजीव चाहते थे कि राजकपूर 'राम तेरी गंगा मैली' के बाद उनके लिए एक और फिल्म बनाएं। वह उन्हें उस फिल्म एक नायक की तरह प्रोजक्ट करें। ताकि स्टार होने का जो लाभ मंदाकिनी पिछली फिल्म में ले गयी थीं वह उन्हें मिले।

पर राज कपूर ने ऐसा नहीं किया। इस फिल्म के हिट होने के बाद भी राजकपूर का राजीव के प्रति व्यवहार पहले जैसा ही रहा। वह उनके लिए यूनिट के एक सहायक भर थे।

राजीव को राज कपूर ने एक असिस्टेंट के तौर पर रखा। वह उनसे यूनिट का वह सारा काम कराते जो एक स्पॉट ब्वॉय और असिस्टेंट करता।

'राम तेरी गंगा मैली' के बाद राजीव कपूर 'लवर ब्वॉय', 'अंगारे', 'जलजला', 'शुक्रिया', 'हम तो चले परदेश' जैसी फिल्मों में दिखे तो पर उनकी फिल्में चली नहीं। यह फिल्में आरके बैनर की नहीं थीं। राजीव अपने पिता राज से इसी बात को लेकर चिढ़े थे कि वह उनको लेकर कोई फिल्म क्यों नहीं बना रहे।


कहा जाता है कि राजीव कपूर ने जीते जी राज से अपनी कुंठा व्यक्त नहीं की लेकिन मरने के बाद वह राज कपूर के अंतिम संस्कार से दूरी बनाए रहे। कपूर परिवार से अलग वह तीन दिनों तक शराब के नशे में परिवार से अलग-थलग रहे।

मधु जैन की किताब 'द कपूर्स' से साभार

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