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'आमिर को गोली मारने पर पड़ी गालियां, प्राण साब बोले- यही तुम्हारी कमाई', एक्टर बृज गोपाल ने सुनाए रोचक किस्से

Sat, 22 Nov 2025 07:01 AM IST
हिमांशु सोनी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: हिमांशु सोनी Updated Sat, 22 Nov 2025 07:01 AM IST
सार

Brij Gopal Exclusive Interview: करीब 350 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके 80 के दशक के अभिनेता बृज गोपाल ने अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए अपने संघर्ष और फिल्मी दुनिया के कई किस्से साझा किए हैं।

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बृज गोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिल्म इंडस्ट्री दुनिया का वह संसार है जहां कलाकारों की भीड़ तो बहुत होती है, लेकिन याद अक्सर सिर्फ स्टार्स रखे जाते हैं। पर असलियत यह है कि सिनेमा ऐसे समर्पित कलाकारों के कंधों पर खड़ा होता है, जो पर्दे पर चेहरा दिखते ही पहचान लिए जाते हैं, लेकिन नाम बहुतों को याद नहीं रहता। ऐसे ही एक अद्भुत, कमाल के और 50 साल से ज्यादा समय तक इंडस्ट्री को समर्पित कलाकार हैं बृज गोपाल, जिन्होंने अमर उजाला से बातचीत में अपने संघर्ष, अपने सफर और अपने सबसे दिलचस्प अनुभवों को बेहद सच्चाई से साझा किया।
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'कयामत से कयामत तक' ने मोड़ दिया जिंदगी का रास्ता
बृज गोपाल ने बात करते हुए कहा कि जब वह कयामत से कयामत तक में नजर आए, तब वह इंडस्ट्री में 15 साल पहले ही आ चुके थे। वह याद करते हुए कहते हैं, 'लिंकिंग रोड पर दो लड़कियां बात कर रही थीं- बोलीं यही है वो, जिसने आमिर खान को गोली मारी थी। दिल किया थप्पड़ मार दूं, पर पढ़ाई और संस्कार आड़े आ गए।'  इस नफरत में भी उन्हें लोगों का प्यार और उनके किरदार की स्वीकार्यता महसूस हुई। उन्होंने बताया कि प्राण साहब से मिली सीख भी उन्होंने याद की- 'प्राण साहब बोले- ये जिंदगी का पहला कॉम्प्लीमेंट मिला है तुझे।'
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'8-10 साल के बच्चे तक ने मुझसे बात बंद कर दी थी'
इतना ही नहीं बृज गोपाल ने बताया, 'इश्क फिल्म में मैंने काजोल जी का अपहरण करने वाला किरदार किया था। मेरे परिवार के 8–10 साल के बच्चे मुझसे बात करना बंद कर दिए! बोले—कितने गंदे आदमी हो आप! मैंने कहा-यह तो मेरी सबसे बड़ी तारीफ़ है।' यह वही कलाकार है जो मानता है कि विलेन को ही असली वेरिएशन मिलता है।'
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'हीरो को गाना मिलता है, विलेन को एक्सप्रेशन।'
बृज ने आगे बात करते हुए बताया, 'मैं अपने 6 महीने के बेटे को छोड़कर आया था, बस स्टॉप पर खड़ा बच्चा देखके रो पड़ता था'। मुजफ्फरनगर के व्यापारी परिवार से आने वाले बृज जी के लिए मुंबई की चमचमाती दुनिया किसी सपने जैसी थी। उन्होंने कहा, 'बस स्टॉप पर खड़ा होता था। कोई महिला अपने बच्चे को गोद में लिए दिख जाए तो रो पड़ता था। अपना बेटा याद आ जाता था… फिर आंसू पोंछकर बस पकड़कर क्लास जाता। एक्टर बनना था, तो बनकर दिखाना था।'

कब मिली बड़ी पहचान?
ओ.पी. रेल्हन की फिल्म 'पापी' में उनका एक छोटा-सा डायलॉग था- 'हम प्रेस वाले हैं…' बस, यही डायलॉग उन्हें अपने शहर में हीरो बना गया। लोग कहने लगे—देखो! फलाने ने दत्त साहब की फिल्म में डायलॉग बोला है! बृज गोपाल ने बात करते हुए कहा, 'बच्चे बिस्किट लेकर इंतजार करते थे कि बृज अंकल कब आएंगे।'


नासिर हुसैन ने कहा- 'ये नहीं चलेगा'
बृज गोपाल ने बात करते हुए आगे ये भी बताया कि उन्हें कयामत से कयामत तक के लिए चुनने का किस्सा भी फिल्मी है। उन्होंने कहा, उस वक्त नासिर हुसैन ने देखकर कहा कि फेस बहुत सॉफ्ट है, किलर नहीं चलेगा। लेकिन मंसूर खान अड़े रहे। उन्होंने कहा- 'ही इज माय किलर!' यही जिद बृज गोपाल को फिल्म में ले आई और फिल्म ब्लॉकबस्टर बन गई।

'कृपया नफरत मिलती रहे… यही मेरी कमाई है'
बृज गोपाल ने इंटरव्यू में बात करते हुए विनम्रता से कहा- 'मैं दर्शकों से बस इतना मांगता हूं। मुझसे नफरत करते रहिए… यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।'

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