Gajraj Rao: ‘सिनेमा हॉल आधे रेस्टोरेंट बन गए हैं’, गजराज राव ने फिल्मों के महंगे टिकट पर जताई चिंता; दिए सुझाव
Gajraj Rao On Ticket Price: अभिनेता गजराज राव ने फिल्मों के महंगे टिकट पर चिंता व्यक्त करते हुए ओटीटी की भूमिका पर भी बात की है। उन्होंने दर्शकों को सिनेमाघरों में वापस लाने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।
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पिछले कुछ वक्त से बॉलीवुड इंडस्ट्री मुश्किल वक्त से गुजर रही है। बड़ा बजट और बड़े नाम होने के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। ऐसे में अब बॉलीवुड के लिए ये लगातार चिंता की बात बनी हुई है। अब अभिनेता गजराज राव ने ऐसी परिस्थिति को लेकर अपने सुझाव दिए हैं, जिससे इस हालत में सुधार किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि आखिर क्यों ये चीजें बदली हैं। इस दौरान गजराज राव ने ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता और टिकट प्राइज को लेकर भी बात की। उन्होंने ये भी बताया कि दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने के लिए क्या करना पड़ेगा।
ओटीटी ने दिए दर्शकों को विकल्प
हाल ही में एएनआई के साथ बातचीत में गजराज राव ने बॉलीवुड की हालत को लेकर बात की। ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र करते हुए अभिनेता ने कहा, “डिजिटल क्रांति और ओटीटी प्लेटफॉर्म की बदौलत दुनिया भर की कहानियां और फिल्में जिन्हें हम पहले केवल फिल्म समारोहों या डीवीडी लाइब्रेरी में देखते थे, अब घर पर देख सकते हैं। यह एक बड़ी वजह है कि लोगों के पास अब बहुत सारे विकल्प हैं
पहले विकल्प सीमित थे। अब अचानक ओटीटी के बाद ऐसा हो गया है कि आधा किलोमीटर का बुफे लगा हुआ है, तो दर्शकों के लिए बहुत अच्छी बात है कि उनको दुनिया भर की कहानियां देखने मिल रही हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से उनकी उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। वे हमसे भी अलग-अलग तरह की कहानियां देखना चाहते हैं।”
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सिनेमा हॉल को रेस्टोरेंट न बनाएं
गजराज राव ने फिल्मों के महंगे टिकट को लेकर भी बात करते हुए कहा, “सिनेमा मालिकों को कुछ सुविधाओं को कम करके टिकट की कीमतें कम करनी चाहिए ताकि मध्यम वर्ग के परिवार एक बार फिर सिनेमाघरों में लौट सकें। अगर हम चाहते हैं कि दर्शक सिनेमा हॉल में वापस आएं, तो टिकट की कीमतों में एक बड़े बदलाव की जरूरत है। सिनेमा हॉल आधे रेस्टोरेंट बन गए हैं। सिनेमा को सिनेमा जैसा महसूस होना चाहिए। कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए। सिनेमा देखने का मतलब है एक अच्छी फिल्म, एक अच्छी कहानी और स्वादिष्ट पॉपकॉर्न।”
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अच्छा और बुरा सिनेमा हमेशा से रहा है
वहीं बॉलीवुड में अच्छी फिल्मों के न बनने पर गजराज राव ने कहा, “मेरा मानना है कि हम फिल्म निर्माताओं पर ध्यान न देने या अच्छी फिल्में न बनाने का आरोप लगाने में बहुत जल्दी करते हैं। लेकिन क्या आपको लगता है कि कोई भी खराब फिल्म बनाना चाहता है और जानबूझकर अपने काम को नुकसान पहुंचाना चाहता है? कोई भी ऐसा नहीं करता। हर कोई कोशिश करता रहता है। 50, 70 और 80 के दशक में भी खराब फिल्में बनीं हैं। अच्छा और बुरा सिनेमा हमेशा से रहा है। अच्छी और बुरी कहानियां हमेशा से रही हैं। अच्छी कहानियाँ बन रही हैं।”