Bioscope: अभिषेक ने लगाया वाशू भगनानी के दामन पर फ्लॉप का पहला दाग, श्रद्धा कपूर की मौसी ने की हीरोइन की डबिंग
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साल 2000 अभिषेक बच्चन के लिए उनके करियर का सबसे उमंगों भरा साल रहा। इस साल उन्होंने फिल्म ‘रेफ्यूजी’ से अपना डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ करीना कपूर ने भी अपने करियर की बोहनी की थी। फिल्म निर्देशक जे पी दत्ता ने योजना तो बनाई थी अभिषेक के साथ ‘आखिरी मुगल’ बनाने की लेकिन बनी फिल्म ‘रेफ्यूजी’। ‘आखिरी मुगल’ में दिलीप कुमार को बहादुर शाह जफर का किरदार करना था और अभिषेक को बनना था उनका बेटा। लेकिन, लोगों को लगा ये कि दिलीप कुमार के होते हुए शायद ही अभिषेक की तरफ लोगों का उतना ध्यान जाए जितना कि किसी हीरो की डेब्यू फिल्म में दर्शकों का जाना चाहिए। लिहाजा ये फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई। साल 2007 में जे पी दत्ता ने अपनी फिल्म ‘उमराव जान’ के फ्लॉप होने के तुरंत बाद ‘आखिरी मुगल’ फिर से शुरू करने की बात की थी, लेकिन फिर बात शायद बनी नहीं।
जे पी दत्ता की फिल्म ‘रेफ्यूजी’ की दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस में ही अभिषेक बच्चन की उत्तर भारत के पत्रकारों से पहली मुलाकात हुई। दूसरी मुलाकात उनकी तय हुई उस समय प्रोड्यूसर नंबर वन के नाम से मशहूर रहे निर्माता वाशू भगनानी की फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ के लिए। लेकिन, अभिषेक बच्चन तब तक काफी बिजी हो चुके थे। उनके पास मनाली से दिल्ली आने तक का समय नहीं था अपनी ही फिल्म की प्रेस कांफ्रेंस के लिए। बारिश का मौसम था, जुलाई की बात है। मनाली में उन दिनों राज कंवर की फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ की शूटिंग चल रही थी। जया बच्चन भी अपने बेटे के साथ मौजूद थीं। तो जब वाशू को ये लगा कि अभिषेक उनकी फिल्म का प्रचार करने दिल्ली नहीं आएंगे तो उन्होंने अपनी टीम को ये पता करने के लिए लगाया कि अगर वह दिल्ली और आसपास के पत्रकारों को मनाली लेकर आएं तो कितने लोग आ सकते हैं।
फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ के हीरो अभिषेक के इंटरव्यू के लिए करीब 70 लोग बारिश के मौसम में जान हथेली पर लेकर दिल्ली से सड़क के रास्ते मनाली जाने को तैयार हो गए। रास्ते में खराब सड़कें, किसी भी मोड़ पर बस के किसी खाई में समा जाने का अंदेशा लेकिन रुकते रुकाते किसी तरह लोग मनाली पहुंच ही गए। वाशू भगनानी को उन दिनों वही सब करने में मजा आता था जो पहले किसी ने न किया हो। उन्होंने माधवन और दीया मिर्जा की फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ का म्यूजिक रिलीज धरती से हजारों फिट ऊपर आसमान में किया था, भारत से न्यूजीलैंड के रास्ते में। और, अभी उनकी पिछली फिल्म ‘बड़े मियां छोटे मियां’ की शूटिंग कवरेज के लिए भी मुंबई, दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों से भी एक चार्टर्ड विमान से दर्जनों पत्रकार जॉर्डन पहुंचे थे।
डेविड धवन की फिल्में एडिट करते रहे ए मुथु को वाशू ने फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ से डायरेक्टर बना दिया था। वैसे डेविड खुद भी फिल्में एडिट करते करते ही डायरेक्टर बने हैं, लेकिन मुथु अपने उस्ताद से ज्यादा कुछ सीख नहीं पाए। वाशू को लगा था कि वह नया डायरेक्टर लाकर डेविड के सामने चुनौती खड़ी कर सकेंगे। लेकिन, वाशू का ये भाव उनके लिए ही नुकसानदायक रहा। और, मनाली में पत्रकारों की फौज देखकर माथा कुछ न कुछ अभिषेक बच्चन का भी चढ़ गया। प्रेस कांफ्रेंस के बाद तय हुए इंटरव्यू में भी वह देरी से आए थे। प्रेस का मेला तो वाशू भगनानी ने जुटा लिया था लेकिन अभिषेक को शायद लगा कि ये सब उनके नाम का करिश्मा है। और, इसी खुशफहमी में वह दिल्ली में अपनी अगली फिल्म ‘बस इतना सा ख्वाब है’ की शूटिंग के दौरान प्रेस से हाथापाई भी कर बैठे थे।
वाशू भगनानी साल 1995 में फिल्म ‘कुली नंबर वन’ से शुरू करके पांच लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में बना चुके थे। इन फिल्मों में शामिल रहीं फिल्में हैं, ‘हीरो नंबर वन’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘बीवी नंबर वन’। ‘तेरा जादू चल गया’ बतौर प्रोड्यूसर उनके करियर की पहली फ्लॉप फिल्म रही। हालांकि, फिल्म का म्यूजिक जरूर खूब बिका लेकिन उसकी वजह थी इसके संगीतकार इस्माइल दरबार। इस्माइल को साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में संगीत देने के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मफेयर ने भी उन्हें इसी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस्माइल ने उन दिनों के एक के बाद एक तमाम फिल्में साइन कर ली थीं। लेकिन, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के तुरंत बाद रिलीज होने वाली ये उनके करियर की दूसरी फिल्म रही। फिल्म का टाइटल सॉन्ग उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था।
फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ की तमाम कमजोर कड़ियों में से सबसे कमजोर कड़ी रही इसकी कहानी। वाशू भगनानी ने अजय देवगन और काजोल की हिट फिल्म ‘प्यार तो होना ही था’ के राइटर इकराम अख्तर को इस फिल्म के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ साइन किया था। लेकिन, फिल्म रिलीज हुई तो पता चला कि ये कहानी तो हॉलीवुड फिल्म ‘पिक्चर परफेक्ट’ का मुंबइया वर्जन है। ‘प्यार तो होना ही था’ भी इकराम ने हॉलीवुड फिल्म ‘फ्रेंच किस’ जैसी ही लिखी थी। कहानी कुछ यूं है कि अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में पूजा (कीर्ति रेड्डी) आगरा में मिले कलाकार कबीर (अभिषेक बच्चन) से प्यार करने का नाटक करती है। चाहती असल में वह अपने बॉस के बेटे राज ओबेरॉय (संजय सूरी) को है।
फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ को इसकी काहनी के अलावा अभिषेक बच्चन के नौसिखिए टाइप के अभिनय से काफी नुकसान हुआ। साउथ इंडियन हीरोइन कीर्ति रेड्डी को वाशू ने हिंदी सिनेमा में बिना किसी तैयारी के लॉन्च कर दिया। फिल्म में उनकी डबिंग श्रद्धा कपूर की मौसी और पद्मिनी कोल्हापुरे की बहन तेजस्विनी कोल्हापुरे ने की है। कहानी, पटकथा, अभिनय इस फिल्म का सब दोयम दर्जे का रहा। हां, फिल्म में संतोष थुंडियल की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का हाइलाइट प्वाइंट रही। लेकिन अभिषेक बच्चन इस फिल्म में अपना वैसा करिश्मा दिखा नहीं पाए जैसा उनसे उम्मीद की जा रही थी।
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