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महेश भट्ट की अधूरी कहानी, समीक्षा पढ़कर ही देखिएगा पूरी फिल्म

Fri, 12 Jun 2015 10:55 PM IST
Updated Fri, 12 Jun 2015 10:55 PM IST
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Film review 'Hamari adhuri kahani'

जब-जब नायिका को राक्षसी प्रृवत्ति का पति मिलता है तब-तब उसकी जिंदगी में दैव गुणों से युक्त प्रेमी अवतार लेता है। फार्मूले का यह सिक्का हमारे सिनेमा ने खूब घिसा है। महेश भट्ट की लिखी हमारी अधूरी कहानी भी इसी घिसे सिक्के का एक और संस्करण है।

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मगर समस्या यह है कि कहानी का अंदाज अस्सी और नब्बे के दशक का है। लिखे हुए ड्राफ्ट से फिल्म ऐसी चिपकी है कि निर्देशक के लिए काम करने की आजादी का मौका नहीं छोड़ती। नतीजा यह कि आशिकी-2 और एक विलेन के डायरेक्टर मोहित सूरी की छाप फिल्म से गायब है।
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कहानी शादीशुदा महिला वसुधा (विद्या बालन) का दर्द दिखाती है, जिसे मुंबई में उसका पति हरि (राजकुमार राव) पांच साल पहले छोड़ कर लापता हो गया। वसुधा का नन्हा बेटा है।
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वह एक बड़े होटल में फूलों की सजावट का काम करती है। यहीं एक दिन सैकड़ों विशाल होटलों का मालिक आरव (इमरान हाशमी) काम के प्रति वसुधा के समपर्ण से प्रभावित होकर उसे दुबई स्थित अपने नए होटल में नौकरी का प्रस्ताव देता है।

उधर, पुलिस वसुधा से पति का पता पूछ रही है। पुलिस के मुताबिक हरि बस्तर के घने जंगलों में जाकर ‘टैररिस्ट’ बन गया है। उसने पांच अमेरिकी टूरिस्टों की हत्या की है। वसुधा अंततः दुबई जाने का फैसला करती है।

फूल, दुख, मरुस्थल, ईश्वर, संस्कार की ‘भारतीय’ कहानी

Film review 'Hamari adhuri kahani'

जहां आरव का उसके प्रति प्यार बढ़ता है। आरव को वसुधा में अपनी मां का अक्स दिखता है क्योंकि उसे भी पति ने त्याग दिया था। इधर वसुधा आरव का प्यार कबूल करती है, उधर हरि वापस आ जाता है। वसुधा और आरव के प्यार का पता लगते ही वह ठान लेता है कि उन्हें एक नहीं होने देगा क्योंकि वसुधा सात जन्मों के लिए उसकी है!

फूल, दुख, मरुस्थल, ईश्वर, संस्कार, बंधन, राधा-कृष्ण, मंगलसूत्र, अंतिम संस्कार की राख का कलश जैसे भावुक बिंदुओं की गांठें लगाते हुए महेश भट्ट ने यह ‘भारतीय’ कहानी लिखी है।

विडंबना है कि एक तरफ भट्ट कैंप महिलाओं की आजादी के नाम पर उन्हें न्यूनतम वस्त्रों में पेश करने वाले इरॉटिक ड्रामे बनाता है और जब वे फ्लॉप होते हैं तो नायिका को साड़ी-बिंदी में पेश कर महिला सशक्तिकरण का संघर्ष दिखाता है।

स्थिति तब हास्यास्पद हो जाती है जब प्रेमी के सहारे अपनी लड़ाई लड़ती नायिका उसके प्रति ऐसी समर्पित होती है कि उसके पैरों को छूने के लिए झुक जाती है! भट्ट बंधु आजादी और सड़े-गले संस्कार एक ही फ्रेम में डाल कर बॉक्स ऑफिस को लूट लेना चाहते हैं!!

राजकुमार राव कैरिअर के सबसे खराब रोल में

Film review 'Hamari adhuri kahani'

फ्लॉप फिल्मों के संकट से जूझ रहे इमरान हाशमी यहां भी समस्याग्रस्त हैं। विद्या की प्रतिभा कहानी को नहीं बचा पाती। राजकुमार राव कैरिअर के सबसे खराब रोल में हैं।

संगीत कुछ ठीक है, परंतु उसे घर बैठे सुन सकते हैं। दर्शक अक्सर चुटकी लेते हैं कि फिल्म में जब एंटरटेनमेंटवा हय ही नहीं, तो टैक्सवा काहे का? इस फिल्म पर यह बात चरितार्थ है।

बिना एंटरटेनमेंट वाली इस फिल्म से महेश भट्ट के आग्रह/प्रभाव के कारण कुछ राज्यों में मनोरंजन कर नहीं लिया जा रहा है। अतः बिना एंटरटेनमेंट और बिना टैक्स की फिल्म देखना चाहें तो यह कहानी आपके लिए है।

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