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विद्या बालन के लिए देखिए बॉबी जासूस
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
Updated Fri, 04 Jul 2014 12:23 PM IST
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शादी के बाद विद्या बालन ने बॉबा जासूस फिल्म के जरिए जबर्दस्त वापसी की है। इस फिल्म में उन्होंने वाकई कमाल का काम किया है।
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एक अच्छी फिल्म आपको शुरू से अंत तक बांध कर रखती है। अपने साथ बहा ले जाती है। फिर चाहे उसमें सितारे हों या न हों। बॉबी जासूस यही करती है। हैदराबादी पोट्टी बिलकिस बानो उर्फ बॉबी के रूप में विद्या बालन एक बार फिर शीर्ष पर हैं।
अकेले दम पर वह फिल्म को लेकर चलती हैं। वैसे इसमें संदह नहीं कि फिल्म के सहायक पात्रों ने उनका हाथ बंटाने में हरसंभव योगदान दिया है। विद्या यहां न केवल जासूस हैं, बल्कि एक बेटी भी हैं। ऐसी बेटी, जिसके पिता उससे नाराज हैं क्योंकि उन्हें यह जासूसी का काम पसंद नहीं। इस जासूसी के कारण न केवल बिलकिस की उम्र बढ़ रही है, बल्कि छोटी वाले के लिए तक ढंग के रिश्ते नहीं आ रहे।
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वास्तव में फिल्म की अहम ताकत विद्या के साथ इसकी स्क्रिप्ट है। जो दो-एक जगह खामियों के बावजूद पूरे कौशल से लिखी गई है। इसमें परिस्थितियां, किरदार और उनके संबंध पूरी तरह से स्पष्ट हैं। हैदराबाद इस फिल्म के हर फ्रेम में मौजूद है। अहम किरदार की तरह। वह फिल्म में इस तरह है कि आपको लगता है, हैदराबाद के बाहर यह कहानी हो ही नहीं सकती। फिल्म संतुलित है। इसमें रोमांच, रहस्य, रोमांस जैसी किसी एक खूबी की तरफ पलड़ा नहीं झुकता। कहीं सनसनी नहीं है, बल्कि सहजता हर दृश्य में नजर आती है।
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कहानी सरल रेखा की तरह चलती है और उसके पीछे दर्शक। बॉबी को जासूसी का कीड़ा है। वह बड़ी जासूस बनना चाहती है, लेकिन मोहल्ले में छोटी-मोटी जासूसी करके काम चला रही है। तभी उसके पास एक व्यक्ति (किरण कुमार) आता है और उसे मिशन पर लगाता है। पहले एक लड़की को ढूंढने का काम सौंपता है। जब वह मिल जाती है तो फिर दूसरी लड़की ढूंढने का काम। दूसरी भी मिल जाती है तो एक लड़के की तलाश का जिम्मा बॉबी को देता है।
तब तक बॉबी के मन में संदेह घर कर जाता है और वह पाती है कि जिन दो लड़कियों को उसने ढूंढ कर इस व्यक्ति को सौंपा था, वे गायब हैं! एक वापस घर नहीं पहुंची और दूसरी का तो परिवार ही दरवाजे पर ताला जड़ कर लापता है!! बॉबी को पता लगता है कि यह अमीर व्यक्ति विदेश से आया है। राज खुलते ही भाग गया है। परंतु वह अपनी तर्कबुद्धी से जानती है कि जिस लड़के को वह ढूंढना चाहता है, उसे पाए बिना नहीं जाएगा। इसके बाद बॉबी उसकी सच्चाई का पर्दाफाश करने में जुट जाती है।
फिल्म का अंत रोचक है। क्लाइमेक्स की उम्मीद लगाए बैठे दर्शक का सामना एंटी क्लाइमेक्स से होता है। आप हैरान रह जाते हैं। इस अच्छी फिल्म का श्रेय ऐक्टरों समेत लेखक-निर्देशक और निर्माता को भी जाता है। ‘डर्टी पिक्चर’ और ‘कहानी’ की जो विद्या ‘घनचक्कर’ और ‘शादी के साइड इफेक्ट्स’ में खो गई थी। वह ‘बॉबी जासूस’ में आपको फिर मिलेगी।