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Mai Vaapas Aaunga Review: पहली मोहब्बत से आखिरी इजाजत की ख्वाहिश तक, क्या वादा निभा पाई 'मैं वापस आऊंगा ?'
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सार
Mai Vaapas Aaunga Film Review In Hindi: फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' एक पुरानी किताब में रखे उस फूल जैसी है। जो हर बार किताब खोलने पर पुरानी मोहब्बत का एहसास दिलाती है। पढ़िए कैसी है यह 78 साल पुरानी प्रेम कहानी पर बनी इम्तियाज अली की फिल्म।
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
मैं वापस आऊंगा
कलाकार
नसीरुद्दीन शाह
,
दिलजीत दोसांझ
,
शरवरी
,
वेदांग रैना
,
दानिश पंडोर
,
मनीष चौधरी
,
रजत कपूर
और
अंजना सुखानी
लेखक
इम्तियाज अली
और
नयनिका महतानी
निर्देशक
इम्तियाज अली
निर्माता
अप्लॉज एंटरटेनमेंट
,
विंडो सीट फिल्मस
और
बिरला स्टूडियोज
रिलीज डेट
12 जून 2026
रेटिंग
3.5/5
विस्तार
इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' आपको याद दिलाती है उस पुराने प्यार की जिसकी तड़प उम्र भर रहती है। जमीनें बंट जाती हैं मगर दिल कभी नहीं बंटा करते। फिल्म में एहसास है, इश्क है, बिछड़ने का गम है और अभिनय के रंग हैं। मगर कहीं कहीं कहानी ने कैमरे के आगे दम भी तोड़ा। जानिए इस रिव्यू में कैसी है फिल्म 'मैं वापस आऊंगा...'
मैं वापस आऊंगा
- फोटो : सोशल मीडिया
पहली मोहब्बत की अधूरी कहानी
इम्तियाज अली की कहानी हो तो दर्शकों की उम्मीदें फिल्म से कई गुना बढ़ जाती हैं। फिल्म की कहानी उतनी ही है जो अपने ट्रेलर अनुसार ही है। एक लव स्टोरी जो 78 साल से एक 94 साल के बुजुर्ग कीनू (नसीरुद्दीन शाह) के दिमाग में चल रही है। मगर बंटवारे की त्रासदी के चलते उनकी मोहब्बत अधूरी रह गई। वह अपनी अंतिम यात्रा पर जाने से पहले चाहतें हैं कि एक बार उनकी लेडी लव उन्हें अलविदा कहने की इजाजत दे दें। वो जिससे प्यार करते हैं वह पाकिस्तान में है, जहां जाना उनके लिए लगभग नमुमकिन सा है। अब उनका पोता निर्वैर ग्रेवाल (दिलजीत दोसांझ) उनकी उस अधूरी इच्छा को अपना उद्देश्य बना लेता है। इसी वजह से वो पाकिस्तान पहुंच जाता है। अब क्या उसे जिया उर्फ अफसाना (शरवरी) वहां मिलेगी? क्या होगा इस लव स्टोरी का अंत? इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
इम्तियाज अली की कहानी हो तो दर्शकों की उम्मीदें फिल्म से कई गुना बढ़ जाती हैं। फिल्म की कहानी उतनी ही है जो अपने ट्रेलर अनुसार ही है। एक लव स्टोरी जो 78 साल से एक 94 साल के बुजुर्ग कीनू (नसीरुद्दीन शाह) के दिमाग में चल रही है। मगर बंटवारे की त्रासदी के चलते उनकी मोहब्बत अधूरी रह गई। वह अपनी अंतिम यात्रा पर जाने से पहले चाहतें हैं कि एक बार उनकी लेडी लव उन्हें अलविदा कहने की इजाजत दे दें। वो जिससे प्यार करते हैं वह पाकिस्तान में है, जहां जाना उनके लिए लगभग नमुमकिन सा है। अब उनका पोता निर्वैर ग्रेवाल (दिलजीत दोसांझ) उनकी उस अधूरी इच्छा को अपना उद्देश्य बना लेता है। इसी वजह से वो पाकिस्तान पहुंच जाता है। अब क्या उसे जिया उर्फ अफसाना (शरवरी) वहां मिलेगी? क्या होगा इस लव स्टोरी का अंत? इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
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फिल्म 'मैं वापस आऊंगा में' शरवरी और वेदांग रैना
- फोटो : इंस्टाग्राम@vedangraina
अभिनय ने बिखेरे कैसे रंग?
युवा कीनू ग्रेवाल के किरदार में वेदांग रैना ने उम्मीद से ज्यादा अच्छा परफॉर्म किया है। वहीं शरवरी अफसाना के किरदार में बहुत खूबसूरत दिखाई दीं। नसीरुद्दीन शाह जो बुजुर्ग कीनू बने हैं उन्हें फिल्म में डायलॉग कम मिले मगर उनका अभिनय हमेशा की तरह कमाल था। मगर अभिनय कमाल था। दिलजीत दोसांझ को देखकर आपको एक सुकून महसूस होता है। उनका अभिनय भी कमाल का था।मुख्य किरदारों के अलावा जो किरदार थे उन्होंने भी अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म में 'धुरंधर' फेम दानिश पंडोर भी थे जिनका स्क्रीन टाइम कम था। इसके बाद भी वह अपने किरदार से इंसाफ करते नजर आए। बाकी अभिनेता जैसे मनीष चौधरी, रजत कपूर का अभिनय भी बेहतरीन था।
युवा कीनू ग्रेवाल के किरदार में वेदांग रैना ने उम्मीद से ज्यादा अच्छा परफॉर्म किया है। वहीं शरवरी अफसाना के किरदार में बहुत खूबसूरत दिखाई दीं। नसीरुद्दीन शाह जो बुजुर्ग कीनू बने हैं उन्हें फिल्म में डायलॉग कम मिले मगर उनका अभिनय हमेशा की तरह कमाल था। मगर अभिनय कमाल था। दिलजीत दोसांझ को देखकर आपको एक सुकून महसूस होता है। उनका अभिनय भी कमाल का था।मुख्य किरदारों के अलावा जो किरदार थे उन्होंने भी अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म में 'धुरंधर' फेम दानिश पंडोर भी थे जिनका स्क्रीन टाइम कम था। इसके बाद भी वह अपने किरदार से इंसाफ करते नजर आए। बाकी अभिनेता जैसे मनीष चौधरी, रजत कपूर का अभिनय भी बेहतरीन था।
मैं वापस आऊंगा
- फोटो : यूट्यूब ग्रैब
कहां फीका पड़ा निर्देशन?
जब आपको पता हो कि फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली हैं। तो आप उसमें कुथ अलग ही देखने की उम्मीद करते हैं। यकीनन हर बार बतौर निर्देशक इम्तियाज के लिए उन उम्मीदों का बोझ उठा पाना आसान नहीं होता। फिल्म के फर्स्ट हाफ में कहानी आपको समझ नहीं कहीं आती। किरदारों को पनपने में समय लगता है। और आपको लगता है कि फिल्म बिखर रही है। पहले हाफ के कई सीन आपको किसी उपन्यास की फीलिंग देते हैं। लेकिन जैसे ही फिल्म का दूसरा भाग शुरू होता है। तब आपको महसूस होता है कि इम्तियाज अली वापस आ गए हैं। दूसरे हाफ में बंटवारे का दर्द, परिवारों का बिखरना, मोहब्बत का बिछड़ना आपको सब कुथ देखने मिलता है। जो आपको रुलाएगा भी और बहुत कुछ महसूस भी कराएगा।
क्या रहीं कमियां?
नसीरुद्दीन शाह को जिस बीमारी का मरीज बताया गया है, उसके हिसाब से जो भी वो बोलते हैं आम दर्शकों के लिए समझना मुश्किल है। इसे अगर थोड़ा आसान कर देते तो शायद फर्स्ट हाफ भी बचाया जा सकता था। जिस तरह कहानी को क्रिकेट मैच के जरिए बताया गया है उसकी जरुरत थी नहीं। इसे आराम से भी बताया जा सकता था।
जब आपको पता हो कि फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली हैं। तो आप उसमें कुथ अलग ही देखने की उम्मीद करते हैं। यकीनन हर बार बतौर निर्देशक इम्तियाज के लिए उन उम्मीदों का बोझ उठा पाना आसान नहीं होता। फिल्म के फर्स्ट हाफ में कहानी आपको समझ नहीं कहीं आती। किरदारों को पनपने में समय लगता है। और आपको लगता है कि फिल्म बिखर रही है। पहले हाफ के कई सीन आपको किसी उपन्यास की फीलिंग देते हैं। लेकिन जैसे ही फिल्म का दूसरा भाग शुरू होता है। तब आपको महसूस होता है कि इम्तियाज अली वापस आ गए हैं। दूसरे हाफ में बंटवारे का दर्द, परिवारों का बिखरना, मोहब्बत का बिछड़ना आपको सब कुथ देखने मिलता है। जो आपको रुलाएगा भी और बहुत कुछ महसूस भी कराएगा।
क्या रहीं कमियां?
नसीरुद्दीन शाह को जिस बीमारी का मरीज बताया गया है, उसके हिसाब से जो भी वो बोलते हैं आम दर्शकों के लिए समझना मुश्किल है। इसे अगर थोड़ा आसान कर देते तो शायद फर्स्ट हाफ भी बचाया जा सकता था। जिस तरह कहानी को क्रिकेट मैच के जरिए बताया गया है उसकी जरुरत थी नहीं। इसे आराम से भी बताया जा सकता था।
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का टीजर रिलीज
- फोटो : यूट्यूब ग्रैब
क्या दर्शकों तक भी पहुंचेगी इस दिल की बात?
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' पुराने दौर और नए दौर को मिला कर बनाई गई है। अगर पुरानी कहानियां सुनने के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। कहानी और अभिनय दोनों ही बेहतरीन हैं। अगर आपको धीमी कहानियां नहीं पसंद जिनकी परतें सब्र मांगती हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। फर्स्ट हाफ कहानी को स्थापित करने में निकल जाता है। जो आपको थोड़ा बोर कर सकता है। मगर फिर भी फिल्म वन टाइम वॉच से ज्यादा है। किसी तरह की कोई अश्लीलता नहीं है। परिवार के साथ आराम से देख सकते हैं मगर बच्चों को डरा सकती है। सेकंड हाफ लगता है कि अब आप इम्तियाज अली की दुनिया में लौट आए हैं। तब आप उस दर्द को महसूस करने लगते हैं।
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' पुराने दौर और नए दौर को मिला कर बनाई गई है। अगर पुरानी कहानियां सुनने के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। कहानी और अभिनय दोनों ही बेहतरीन हैं। अगर आपको धीमी कहानियां नहीं पसंद जिनकी परतें सब्र मांगती हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। फर्स्ट हाफ कहानी को स्थापित करने में निकल जाता है। जो आपको थोड़ा बोर कर सकता है। मगर फिर भी फिल्म वन टाइम वॉच से ज्यादा है। किसी तरह की कोई अश्लीलता नहीं है। परिवार के साथ आराम से देख सकते हैं मगर बच्चों को डरा सकती है। सेकंड हाफ लगता है कि अब आप इम्तियाज अली की दुनिया में लौट आए हैं। तब आप उस दर्द को महसूस करने लगते हैं।