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Raj Kapoor: चार्ली चैपलिन से ली प्रेरणा, अधूरी मोहब्बत की आग में जले; 'आवारा' से राज कपूर ने रचा इतिहास
Sun, 14 Dec 2025 11:05 AM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Sun, 14 Dec 2025 11:05 AM IST
सार
Raj Kapoor Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान का लंबा इतिहास रहा है। मूक सिनेमा के दौर से लेकर ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन सिनेमा तक जिन चंद कलाकारों ने अपनी पहचान बनाई उनमें हिंदी सिनेमा के शोमैन का नाम सबसे पहला आता है। आज उनकी 101वीं जयंती हैं।
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राज कपूर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय सिनेमा को एक अलग भाषा, एक अलग सोच और आम आदमी का चेहरा देने वाले शोमैन राज कपूर की आज 101वीं जयंती है। मासूम मुस्कान, नीली आंखें और शरीर की हरकतों में छुपा दर्द- राज कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक विचार थे। उन्होंने सिनेमा को मनोरंजन से आगे बढ़ाकर समाज का आईना बनाया, जिसमें गरीबी, बेरोजगारी, वर्गभेद और इंसानी अकेलापन साफ दिखाई देता था। आइए इस मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़े किस्सों के बारे में।
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भारत के चार्ली चैपलिन कैसे बने?
राज कपूर को यूं ही ‘भारत का चार्ली चैपलिन’ नहीं कहा गया। बचपन से ही वो चार्ली चैपलिन की फिल्मों से गहराई से जुड़े हुए थे। जहां बाकी लोग उनकी फिल्मों पर हंसते थे, वहीं राज कपूर की आंखें नम हो जाया करती थीं। चैपलिन का वह किरदार—जिसका न कोई घर होता है, न कोई ठिकाना- राज कपूर को भीतर तक छू जाता था। यही वजह रही कि आगे चलकर ‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसे किरदारों में उन्होंने उसी ट्रैजिक-कॉमिक आत्मा को भारतीय संदर्भों में ढाल दिया।
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राज कपूर
- फोटो : सोशल मीडिया
दुनियाभर में मशहूर थे राज कपूर
राज कपूर की लोकप्रियता भारत तक सीमित नहीं रही। सोवियत यूनियन में उनकी फिल्म ‘आवारा’ ने इतिहास रच दिया। रूस में इस फिल्म ने करोड़ों टिकट बेचे और राज कपूर वहां किसी सुपरस्टार से कम नहीं थे। मॉस्को एयरपोर्ट पर जब प्रशंसकों ने उनकी टैक्सी को कंधों पर उठा लिया, तो यह सिर्फ एक अभिनेता का स्वागत नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की जीत थी। चीन, तुर्की, मध्य-पूर्व और अफ्रीका तक ‘आवारा हूं’ की गूंज सुनाई देती थी। यहां तक कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उनकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता की खुलेआम सराहना की थी।
निजी जिंदगी में काफी सरल थे राज कपूर
निजी जिंदगी में राज कपूर जितने सरल थे, उतने ही जटिल भी। बेटे रणधीर कपूर से जुड़ा एक किस्सा अक्सर याद किया जाता है, जब उन्होंने कहा था कि अगर वे बस में भी सफर करें, तो लोग बस यही कहेंगे कि राज कपूर बस में बैठे हैं। यह कथन उनके स्टारडम से ज्यादा उनके आत्मविश्वास और सादगी को दर्शाता है।
राज कपूर की लोकप्रियता भारत तक सीमित नहीं रही। सोवियत यूनियन में उनकी फिल्म ‘आवारा’ ने इतिहास रच दिया। रूस में इस फिल्म ने करोड़ों टिकट बेचे और राज कपूर वहां किसी सुपरस्टार से कम नहीं थे। मॉस्को एयरपोर्ट पर जब प्रशंसकों ने उनकी टैक्सी को कंधों पर उठा लिया, तो यह सिर्फ एक अभिनेता का स्वागत नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की जीत थी। चीन, तुर्की, मध्य-पूर्व और अफ्रीका तक ‘आवारा हूं’ की गूंज सुनाई देती थी। यहां तक कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उनकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता की खुलेआम सराहना की थी।
निजी जिंदगी में काफी सरल थे राज कपूर
निजी जिंदगी में राज कपूर जितने सरल थे, उतने ही जटिल भी। बेटे रणधीर कपूर से जुड़ा एक किस्सा अक्सर याद किया जाता है, जब उन्होंने कहा था कि अगर वे बस में भी सफर करें, तो लोग बस यही कहेंगे कि राज कपूर बस में बैठे हैं। यह कथन उनके स्टारडम से ज्यादा उनके आत्मविश्वास और सादगी को दर्शाता है।
राज कपूर-नरगिस
- फोटो : सोशल मीडिया
राज कपूर और नरगिस की प्रेम कहानी
राज कपूर और नरगिस की प्रेम कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत लेकिन दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है। पर्दे पर उनकी जोड़ी जादू बिखेरती थी, लेकिन हकीकत में यह रिश्ता अधूरा रह गया। शादीशुदा होने के कारण राज कपूर वह फैसला नहीं ले सके, जिसका इंतजार नरगिस वर्षों तक करती रहीं। आखिरकार नरगिस की जिंदगी में सुनील दत्त आए और एक नई कहानी शुरू हुई। कहा जाता है कि नरगिस की ऊंची हील्स देखकर ही राज कपूर को एहसास हो गया था कि वह अब उनसे दूर जा चुकी हैं।
एक फिल्म के लिए सबकुछ दांव पर लगाया
राज कपूर का असर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा। रणबीर कपूर का नाम भी उनके पूरे नाम रणबीर राज कपूर से लिया गया। वहीं फिल्म ‘संगम’ की पार्टी में हुआ एक थप्पड़ कांड, जिसमें लेखक इंदर राज आनंद का करियर तबाह हो गया, इंडस्ट्री की सख्त और संवेदनशील सच्चाई को उजागर करता है। बतौर फिल्ममेकर राज कपूर पैसों से ज्यादा पैशन में विश्वास रखते थे। ‘मेरा नाम जोकर’ के लिए उन्होंने सब कुछ दांव पर लगा दिया। सेट पर क्रू की देखभाल, खाने-पीने का इंतजाम और रियल लोकेशन्स पर शूट- ये सब उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। 18-18 घंटे काम करना उनके लिए आम बात थी।
राज कपूर और नरगिस की प्रेम कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत लेकिन दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है। पर्दे पर उनकी जोड़ी जादू बिखेरती थी, लेकिन हकीकत में यह रिश्ता अधूरा रह गया। शादीशुदा होने के कारण राज कपूर वह फैसला नहीं ले सके, जिसका इंतजार नरगिस वर्षों तक करती रहीं। आखिरकार नरगिस की जिंदगी में सुनील दत्त आए और एक नई कहानी शुरू हुई। कहा जाता है कि नरगिस की ऊंची हील्स देखकर ही राज कपूर को एहसास हो गया था कि वह अब उनसे दूर जा चुकी हैं।
एक फिल्म के लिए सबकुछ दांव पर लगाया
राज कपूर का असर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा। रणबीर कपूर का नाम भी उनके पूरे नाम रणबीर राज कपूर से लिया गया। वहीं फिल्म ‘संगम’ की पार्टी में हुआ एक थप्पड़ कांड, जिसमें लेखक इंदर राज आनंद का करियर तबाह हो गया, इंडस्ट्री की सख्त और संवेदनशील सच्चाई को उजागर करता है। बतौर फिल्ममेकर राज कपूर पैसों से ज्यादा पैशन में विश्वास रखते थे। ‘मेरा नाम जोकर’ के लिए उन्होंने सब कुछ दांव पर लगा दिया। सेट पर क्रू की देखभाल, खाने-पीने का इंतजाम और रियल लोकेशन्स पर शूट- ये सब उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। 18-18 घंटे काम करना उनके लिए आम बात थी।
राज कपूर-नरगिस
- फोटो : सोशल मीडिया
शोमैन की पहली फिल्म का किस्सा
फिल्मी करियर की शुरुआत भी उनकी तरह ही निराली है। क्या आपको पता है कि हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले राज कपूर का फिल्मी करियर एक चांटे के साथ शुरू हुआ था। पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे राजकपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ मुंबई आए और यहां उन्होंने अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत की। उनके पिता ने उन्हें मंत्र दिया कि राजू नीचे से शुरुआत करोगे तो ऊपर तक जाओगे। पिता की इस बात को गांठ बांधकर राजकूपर ने 17 साल की उम्र में रंजीत मूवीकॉम और बाम्बे टॉकीज फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटब्वॉय का काम शुरू किया। उस वक्त के मशहूर निर्देशकों में शुमार केदार शर्मा की एक फिल्म में क्लैपर ब्वॉय के रूप में काम करते हुए राज कपूर ने एक बार इतनी जोर से क्लैप किया कि फिल्म के हीरो की नकली दाड़ी क्लैप में फंसकर बाहर आ गई। राज कपूर की इस हरकत पर केदार शर्मा को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने गुस्से में आकर राज कपूर को एक जोरदार चांटा रसीद कर दिया।
केदार शर्मा ने ही दिया पहला ब्रेक
आगे चलकर केदार शर्मा ने ही अपनी फिल्म 'नीलकमल' में राजकपूर को बतौर नायक लिया था। राज कपूर को अभिनय अपने पिता पृथ्वीराज से विरासत में मिली थी। राज कपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ रंगमंच पर काम करते थे। उनके अभिनय करियर की शुरुआत पृथ्वीराज थिएटर के मंच से ही हुई थी।
फिल्मी करियर की शुरुआत भी उनकी तरह ही निराली है। क्या आपको पता है कि हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले राज कपूर का फिल्मी करियर एक चांटे के साथ शुरू हुआ था। पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे राजकपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ मुंबई आए और यहां उन्होंने अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत की। उनके पिता ने उन्हें मंत्र दिया कि राजू नीचे से शुरुआत करोगे तो ऊपर तक जाओगे। पिता की इस बात को गांठ बांधकर राजकूपर ने 17 साल की उम्र में रंजीत मूवीकॉम और बाम्बे टॉकीज फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटब्वॉय का काम शुरू किया। उस वक्त के मशहूर निर्देशकों में शुमार केदार शर्मा की एक फिल्म में क्लैपर ब्वॉय के रूप में काम करते हुए राज कपूर ने एक बार इतनी जोर से क्लैप किया कि फिल्म के हीरो की नकली दाड़ी क्लैप में फंसकर बाहर आ गई। राज कपूर की इस हरकत पर केदार शर्मा को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने गुस्से में आकर राज कपूर को एक जोरदार चांटा रसीद कर दिया।
केदार शर्मा ने ही दिया पहला ब्रेक
आगे चलकर केदार शर्मा ने ही अपनी फिल्म 'नीलकमल' में राजकपूर को बतौर नायक लिया था। राज कपूर को अभिनय अपने पिता पृथ्वीराज से विरासत में मिली थी। राज कपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ रंगमंच पर काम करते थे। उनके अभिनय करियर की शुरुआत पृथ्वीराज थिएटर के मंच से ही हुई थी।
राज कपूर
- फोटो : सोशल मीडिया
बाल कलाकार के रूप में कर चुके थे काम
राज कपूर ने 1935 में आई फिल्म 'इंकलाब' से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन इस फिल्म में वह बाल कलाकार के रूप में दिखे थे। वहीं, बतौर हीरो 'नीलकमल' से उनकी किस्मत खुली और देखते ही देखते वह बॉलीवुड के शोमैन बन गए। आज भी राज कपूर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा हैं- जो हर दौर में ‘आवारा’ बनकर आम आदमी की कहानी कहते रहेंगे।
राज कपूर ने 1935 में आई फिल्म 'इंकलाब' से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन इस फिल्म में वह बाल कलाकार के रूप में दिखे थे। वहीं, बतौर हीरो 'नीलकमल' से उनकी किस्मत खुली और देखते ही देखते वह बॉलीवुड के शोमैन बन गए। आज भी राज कपूर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा हैं- जो हर दौर में ‘आवारा’ बनकर आम आदमी की कहानी कहते रहेंगे।