'पद्म पुरस्कार' मिलने पर ममूटी ने जाहिर की खुशी, लोक गायिका पोकिला लेखथेपी को हुई हैरानी; सेलेब्स ने दी बधाई
Padma Shri Award: 74 साल के मशहूर अभिनेता ममूटी और 72 साल की लोक गायिका पोकिला लेखथेपी को पद्म भूषण पुरस्कार के लिए चुना गया है। दोनों ने इस बारे में खुशी जाहिर की है। वहीं सेलेब्स ने भी उन्हें बधाई दी है।
विस्तार
ममूटी को मिलेगा 'पद्म पुरस्कार'
ममूटी को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण मिलेगा। अभिनेता ममूटी ने कहा कि उन्हें यह खबर सुनकर बहुत खुशी हुई है। उन्होंने कहा, 'देश द्वारा सम्मानित होने से बड़ी कोई बात नहीं है।' ममूटी को उनके फैंस और करीबी लोग प्यार से 'मम्मूका' कहते हैं।
जैसे ही यह खबर फैली, सोशल मीडिया पर उनके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं आने लगीं। अभिनेत्री मंजू वारियर ने फेसबुक पर लिखा- 'बधाई हो मम्मूका। आपने दिखाया कि मुश्किलों का सामना मुस्कान के साथ कैसे किया जाता है। आप हमारे गर्व हैं और बिल्कुल अलग हैं।' अभिनेता कमल हासन ने भी X (ट्विटर) पर बधाई दी, 'मेरे दोस्त ममूटी अब पद्म भूषण ममूटी बन गए हैं। मेरे दोस्त को ढेर सारी बधाइयां।'
என்னுடைய பிரியத்துக்குரிய நண்பர் @mammukka அவர்களுக்கு பத்ம பூஷன் விருது அறிவிக்கப்பட்டுள்ளது. நாங்கள் இருவரும் சேர்ந்து நடித்ததில்லை. ஆனால், நான் அவரையும் அவர் என்னையும் தூர இருந்து ரசித்தும் ஒருவருக்கொருவர் நேரடியாக விமர்சித்துக்கொண்டும் ஒரு ‘கோப்பெருஞ்சோழன் பிசிராந்தையார்’…
— Kamal Haasan (@ikamalhaasan) January 25, 2026
ममूटी के बारे में
ममूटी ने 1971 में फिल्म 'अनुभवंगल पालिचकल' से अपने करियर की शुरुआत की। ममूटी ने 50 साल से ज्यादा के करियर में 400 से अधिक फिल्में की हैं। ये फिल्में मलयालम के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में भी हैं। उन्हें तीन राष्ट्रीय पुरस्कार, सात राज्य पुरस्कार, 14 फिल्मफेयर अवॉर्ड, पद्म श्री और दो मानद डॉक्टरेट डिग्री भी मिल चुकी हैं।
पोकिला लेखथेपी को हुई हैरानी
असम की कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों की लोक गायिका पोकिला लेखथेपी को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसी खुशी से वह हैरान हैं। उन्हें 'सुरों की रानी' कहा जाता है। पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं, लेकिन हैरान भी हूं कि इतने दूर-दराज इलाके की एक साधारण गायिका को केंद्र सरकार ने यह बड़ा सम्मान दिया है।' पोकिला ने आगे कहा कि वे अभिभूत हैं। एक गरीब पहाड़ी गायिका को ऐसा पुरस्कार मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात है। उनके पास खुशी और आभार जताने के शब्द नहीं हैं।
पोकिला लेखथेपी के बारे में
पोकिला लेखथेपी ने गाना अपने माता-पिता से सीखा। उन्होंने कभी भी कोई औपचारिक संगीत की ट्रेनिंग नहीं ली। उन्होंने अब तक 300 से ज्यादा गाने गाए हैं। 1964 में उन्होंने पहली बार कार्बी युवा महोत्सव में गाकर पहला पुरस्कार जीता था। उन्होंने कार्बी भाषा में अपनी पहली कैसेट 'कांगहोन' निकाली और कार्बी आधुनिक गीतों की नई शैली शुरू की। असम सरकार ने 2023 में उन्हें शिल्पी अवार्ड और पेंशन दी, और 2024 में असम गौरव अवार्ड से सम्मानित किया। अब वे असम के पांच पद्म श्री विजेताओं में से एक हैं।
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