Suniel Shetty Birthday: अन्ना का एक्शन बन गया था परिवार का सिरदर्द? क्रिकेटर बनना चाहते थे एक्टर; पढ़िए किस्से
Suniel Shetty Birthday: अभिनेता सुनील शेट्टी आज 11 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी फिटनेस के लिए वे मशहूर हैं। करियर के आगाज के साथ उन्हें एक्शन हीरो का टैग मिल गया था। जन्मदिन पर जानिए उनसे जुड़े रोचक किस्से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुनील शेट्टी का आज जन्मदिन है। वे 65 वर्ष के हो गए हैं। हालांकि, उनकी कद-काठी और फिटनेस देखकर उनकी उम्र का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। साल 1992 में सिनेमा में बोहनी करने वाले सुनील शेट्टी ने अपने अभिनय करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में की हैं। एक्शन से लेकर लव स्टोरी और कॉमेडी फिल्मों तक उन्होंने अभिनय का लोहा मनवाया है। इंडस्ट्री में लोग उन्हें 'अन्ना' कहते हैं। यह नाम कैसे पड़ा, इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। जानिए उनसे जुड़े किस्से
पहली ही फिल्म से बने सिनेमा के 'बलवान'
सुनील शेट्टी का जन्म 11 अगस्त 1961 को कर्नाटक के मैंगलोर के मुल्की में हुआ था। सुनील शेट्टी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1992 में आई फिल्म 'बलवान' से की थी। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में सुनील शेट्टी के साथ काम करने के लिए कोई एक्ट्रेस तैयार नहीं थी, क्योंकि वह नए एक्टर थे। मगर, बाद में दिवंगत एक्ट्रेस दिव्या भारती ने रजामंदी दिखाई और इस फिल्म में सुनील शेट्टी के साथ उनकी जोड़ी देखने को मिली। इस फिल्म के बाद वह एक्शन हीरो बनकर उभरे।
'मोहरा' ने बदले किस्मत के सितारे
साल 1994 में आई फिल्म 'मोहरा' ने सुनील शेट्टी के करियर को नई ऊंचाई दी और 2001 में आई 'धड़कन' ने सुनील को लोकप्रिय बना दिया। इनके अलावा 'दिलवाले', 'अंत', 'गोपी किशन', 'कृष्णा', 'रक्षक', 'बॉर्डर', 'भाई', 'हेराफेरी' जैसी सौ से ज्यादा फिल्मों में एक्टर काम कर चुके हैं।
सुनील शेट्टी के एक्शन से परिवार के सिर में हुआ दर्द?
यूं तो सुनील शेट्टी एक्शन हीरो के रूप में उभर चुके थे। मगर, अचानक उन्हें अहसास हुआ इससे उनके परिवार में सिरदर्द की गोलियां आने लगी हैं। फिर उन्होंने कॉमेडी और रोमांटिक फिल्मों की तरफ रुख किया। सुनील शेट्टी ने अमर उजाला संवाद में इसका खुलासा करते हुए कहा था,
- 'मेरी एक्शन फिल्में सक्सेसफुल थीं। खासतौर से जब बेटी हुई और बेटी, मां और पत्नी फिल्में देखते थे और मैं घर जाकर पूछता कि कैसी लगी फिल्म तो मुझे बहुत अच्छा लगा।
- साथ ही मैं ये भी देखता कि घर में सिरदर्द की गोलियां बहुत हैं, क्योंकि एक्शन देखकर सबके सिर में दर्द होने लगता था।
- जब सिरदर्द की गोलियां ज्यादा इस्तेमाल होने लगीं तब मुझे अहसास हुआ कि कुछ और करना चाहिए।
- तब मैंने 'गोपी किशन', 'धड़कन' और 'हेराफेरी' जैसी फिल्में करने की कोशिश की।
- मेरी बहुत सारी फिल्में नहीं चलीं। मैं हारा। ट्रांजीशन लोगों को पसंद नहीं आया, लेकिन लगातार ट्राई करने के बाद मैं कहीं न कहीं जाकर सेटल हो गया।
क्रिकेटर बनकर देश के लिए खेलना चाहते थे
रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनील शेट्टी को एक्टिंग का कोई शौक नहीं था। वे तो क्रिकेटर बनना चाहते थे, इसलिए स्पोर्ट्स पर उनका ज्यादा फोकस था। अभिनय के बारे में उन्होंने सोचा नहीं था। एक बातचीत के दौरान सुनील शेट्टी ने कहा था, 'मैं अपने देश के लिए खेलना चाहता था। खिलाड़ी बनने के लिए मैंने मार्शल आर्ट सीखा और फिटनेस पर ध्यान दिया,लेकिन क्या पता था कि मार्शल आर्ट्स एक्टिंग और फिल्मों में काम आएगी।' बता दें कि सुनील शेट्टी किक बॉक्सिंग में ब्लैक बेल्ट हैं।
- सुनील शेट्टी के मुताबिक, 'मेरे पास एक्टिंग का ऑफर ही इसलिए आया, क्योंकि मैं मार्शल आर्टिस्ट था।
- किसी ने मुझे स्टेज पर लाइव देखा। उन्होंने मुझे ऑफर किया।
- एक टफ दौर में मुझे मौका मिला, क्योंकि एक्शन ही है जो मास तक पहुंचता है। मुझे मौका मिला।
बिजनेस में भी चला सिक्का
एक्टिंग के अलावा सुनील शेट्टी फिल्म प्रोडक्शन में भी हाथ आजमा चुके हैं। पॉपकॉर्न एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से इनका प्रोडक्शन हाउस है। उन्होंने 'खेल', 'रक्त' और 'भागमभाग' जैसी फिल्में प्रोड्यूस कीं। फिलहाल वे अपनी आगामी फिल्म की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए वे बिहार में शूटिंग करने की तैयारी में हैं और लोकेशन तलाश रहे हैं।
सुनील शेट्टी अपने करीब साढ़े तीन दशक के करियर में सौ से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। एक्टिंग के साथ-साथ सुनील शेट्टी बिजनेसमैन भी हैं। उनके कई रेस्टोरेंट और क्लब हैं। दिलचस्प बात यह है कि सुनील शेट्टी ने होटल मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की हुई है।
कैसे पड़ा 'अन्ना' नाम?
बता दें कि सुनील शेट्टी को बॉलीवुड में सब अन्ना के नाम से पुकारते हैं। यह नाम कैसे पड़ा, इसका श्रेय संजय दत्त और अमिताभ बच्चन को जाता है। एक इंटरव्यू में खुद सुनील शेट्टी ने कहा था, 'हम एलए में कांटे की शूटिंग कर रहे थे। मेरे स्टाफ में से एक शख्स मुझे अन्ना बोलते थे, वहां संजू ने उन्हें यह बोलते सुन लिया। वहां से बाबा ने पिकअप कर लिया कि अन्ना परफेक्ट है। तू हमेशा लैक्चर देता रहता है मुझे। अन्ना मतलब बड़ा भाई होता है तो मैंने कहा मैं नहीं तू है बड़ा भाई। उसके बाद अमितजी (अमिताभ बच्चन) ने पकड़ लिया अन्ना। वे भी अन्ना कहने लगे तो सारे लोग वहां पर अन्ना कहने लगे। उसके बाद से दुनिया ही अन्ना कहने लगी है'।
पेस्ट्री शॉप पर माना को देख दिल दे बैठे थे सुनील
अभिनेता सुनील शेट्टी की पर्सनल लाइफ की बात करें तो इनकी पत्नी का नाम माना शेट्टी है। सुनील शेट्टी और माना शेट्टी की लव स्टोरी भी बेहद दिलचस्प है। एक्टर ने माना को एक पेस्ट्री की दुकान पर देखा था, जहां वे अक्सर अपने दोस्तों से मिलने जाया करते थे। माना से दोस्ती करने के लिए अन्ना ने उनकी बहन को दोस्त बनाया। सुनील शेट्टी और माना को एक-दूसरे से शादी के लिए अपने-अपने परिवारों को मनाने में करीब नौ साल का वक्त लगा। 25 दिसंबर 1991 को दोनों ने शादी की। सुनील शेट्टी और माना के दो बच्चे- बेटी अथिया शेट्टी और बेटा अहान शेट्टी हैं। दोनों ने सिनेमा में एंट्री ली।
फैमिली मैन हैं सुनील शेट्टी, पिता से सीखे गुर
सुनील शेट्टी के लिए परिवार सबसे जरूरी है। इसकी सीख उन्हें अपने पिता से मिली। सुनील शेट्टी के मुताबिक, 'मेरे पिताजी के लिए परिवार सब कुछ था। उन्होंने परिवार के लिए बहुत कुछ किया। मैं भी आज कुछ भी करता हूं तो मेरे लिए परिवार मायने रखता है। मैं इस (बॉलीवुड) इंडस्ट्री का हिस्सा होकर भी इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं हूं। मैं शाम छह बजे के बाद परिवार के साथ ही रहता हूं। दुनिया में बहुत सारा पैसा है, लेकिन आपको तय करना है कि आपको क्या करना है। मैं आज भी कुछ करता हूं तो मेरा परिवार मुझे बहुत मायने रखता है। मेरे पिताजी से यह सीख मुझे मिली'।
सुनील शेट्टी की फिटनेस का राज क्या है?
सुनील शेट्टी अपनी फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। अमर उजाला संग बातचीत में उन्होंने अपनी फिटनेस का राज साझा करते हुए बताया था
- 'निरंतरता! सोमवार से शनिवार तक, मैं वर्कआउट करता हूं। नींद, अच्छा और सादा खाना। साढ़े छह बजे तक खाना'।
- 'लोग जिम और प्रोटीन शेक के बारे में बात करते हैं। पहले यह फैसला लेना है कि हमें जिम जाना है। इसमें कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी है'।
- 'मैं तब भी प्योर खाना खाता था, मां के हाथ का खाना। सीजन वाले फल खाना। आज मैं अगर फिट हूं तो मैं बहुत साधारण चीजें करता हूं'।
- 'मैं कभी प्रोटीन शेक नहीं लेता। मुझे वह अपने खाने में अपनी खुराक में मिल जाता है। लोग जिम और प्रोटीन शेक के बारे में बात करते हैं, लेकिन निरंतरता और अनुशासन जरूरी है'।
- 'सोमवार से शनिवार कसरत जरूरी है। हर कीमत पर नींद जरूरी है। साढ़े छह-सात बजे से पहले खाना खत्म कर देना जरूरी है'।
- 'सीजनल फल-सब्जियां खाएं। स्वस्थ रहना बीमार रहने से ज्यादा सस्ता है'।