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Musafir Cafe Review: सुकून देती है पहाड़, प्यार और अधूरे सपनों की कहानी, रफ्तार धीमी, लेकिन नहीं छोड़ती साथ

Fri, 24 Jul 2026 12:39 PM IST
Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Fri, 24 Jul 2026 12:39 PM IST
सार

Musafir Cafe Review: विक्रांत मैसी अभिनीत वेब सीरीज 'मुसाफिर कैफे' ओटीटी पर रिलीज हो गई है। यह रोमांटिक सीरीज कैसी है? यहां पढ़िए रिव्यू

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Musafir Cafe Web series Review and rating in Hindi Vikrant Massey Vedika Pinto Mahima Makwana Ruchir Arun
'मुसाफिर कैफे' वेब सीरीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
मुसाफिर कैफे
कलाकार
विक्रांत मैसी , वेदिका पिंटो , महिमा मकवाना , आदिल हुसैन , राजीव सिद्धार्थ , अनुभा फतेहपुरिया , सादिया सिद्दीकी और लवलीन मिश्रा
लेखक
शारण्या राजगोपाल (दिव्य प्रकाश दुबे के उपन्यास मुसाफिर कैफे के किरदारों पर आधारित)
निर्देशक
रुचिर अरुण
निर्माता
विजय सुब्रमण्यम, अनुज गोसालिया, विक्रांत मैसी
ओटीटी प्लेटफॉर्म
नेटफ्लिक्स
रिलीज
24 जुलाई 2026
रेटिंग
3.5/5

विस्तार

ओटीटी पर हर हफ्ते कई रोमांटिक ड्रामा आते हैं, लेकिन कम ही कहानियां ऐसी होती हैं, जो प्यार को सिर्फ मंजिल नहीं, बल्कि सफर की तरह दिखाती हैं। नेटफ्लिक्स की 'मुसाफिर कैफे' ऐसी ही सीरीज है। यह रिश्तों में सही-गलत का फैसला सुनाने की बजाय हर किरदार की मजबूरी और नजरिए को समझने की कोशिश करती है। इसलिए कई बार आप सुधा की बात से सहमत होंगे, तो अगले ही पल चंदर का फैसला भी गलत नहीं लगेगा। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी भी है।

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Musafir Cafe Web series Review and rating in Hindi Vikrant Massey Vedika Pinto Mahima Makwana Ruchir Arun
मुसाफिर कैफे रिव्यू - फोटो : साभार@imdb

कहानी
कहानी चंदर (विक्रांत मैसी), सुधा (वेदिका पिंटो) और प्रीति (महिमा मकवाना) के इर्द-गिर्द घूमती है। सीरीज की कहानी दो टाइमलाइन में चलती है। एक तरफ चंदर और सुधा का अतीत है, जहां दोनों की मुलाकात अरेंज मैरिज के जरिए होती है। चंदर अमेरिका से लौटा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, लेकिन उसका सपना कॉर्पोरेट नौकरी नहीं, बल्कि पहाड़ों में अपना छोटा-सा कैफे खोलने का है। वहीं, सुधा एक महत्वाकांक्षी वकील है, जो भोपाल से निकलकर मुंबई हाईकोर्ट में अपना करियर बनाना चाहती है। दोनों एक-दूसरे के करीब आते हैं, लेकिन उनके सपने और जिंदगी को लेकर सोच बिल्कुल अलग है। दूसरी तरफ, वर्तमान में कहानी मसूरी के 'मुसाफिर कैफे' की है। 

लॉकडाउन के दौरान चंदर की मुलाकात प्रीति से हुई थी। प्रीति एक सोलो ट्रैवलर और ट्रैवल ब्लॉग लिखने वाली लड़की है। वह चंदर के पहाड़ों में कैफे खोलने के सपने को अपना बना लेती है और दोनों मिलकर 'मुसाफिर कैफे' की शुरुआत करते हैं। दोनों टाइमलाइन साथ-साथ चलती हैं और यही सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। हर एपिसोड के साथ ऑडियंस के मन में यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि आखिर चंदर और सुधा के रिश्ते में ऐसा क्या हुआ कि दोनों की राहें अलग हो गईं। अच्छी बात यह है कि मेकर्स कहानी को आखिर तक प्रिडिक्टेबल नहीं बनने देते और अंत में दूसरे सीजन की भी गुंजाइश छोड़ते हैं।

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Musafir Cafe Web series Review and rating in Hindi Vikrant Massey Vedika Pinto Mahima Makwana Ruchir Arun
मुसाफिर कैफे - फोटो : वीडियो ग्रैब

अभिनय
विक्रांत मैसी पूरी सीरीज की सबसे बड़ी ताकत हैं। चंदर के किरदार में उनका अभिनय बेहद सहज और ईमानदार लगता है। एक ऐसा इंसान, जो भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर पहाड़ों में अपना छोटा-सा कैफे खोलने का सपना देखता है। विक्रांत इस किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। कई जगह ऑडियंस खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता है। महिमा मकवाना को वेदिका पिंटो के मुकाबले कम स्क्रीन स्पेस मिला है, लेकिन जितना मिला है, उसमें उन्होंने अच्छा काम किया है। विक्रांत और महिमा की केमिस्ट्री भी सहज लगती है।

वहीं, वेदिका पिंटो इस बार थोड़ा निराश करती हैं। इस बात में कोई दोराय नहीं कि उन्होंने किरदार पर मेहनत जरूर की है, लेकिन कुछ सीन्स में उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा बनावटी लगता है। एक सफल डिवोर्स लॉयर के किरदार में उनकी मासूमियत कई बार किरदार से मेल नहीं खाती। वहीं, विक्रांत और वेदिका के बीच वह केमिस्ट्री भी पूरी तरह नहीं बन पाती, जिसकी कहानी को जरूरत थी। सपोर्टिंग कास्ट में आदिल हुसैन, अनुभा फतेहपुरिया, सादिया सिद्दीकी और लवलीन मिश्रा ने अपने-अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है। भले ही इनके स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं है, लेकिन जहां भी ये नजर आते हैं, कहानी को मजबूती देते हैं।

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मुसाफिर कैफे - फोटो : वीडियो ग्रैब

निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक रुचिर अरुण ने कहानी को सादगी के साथ पेश किया है। मसूरी और भोपाल की खूबसूरत लोकेशंस कहानी को और खूबसूरत बनाती हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक कई जगह खामोशी को और असरदार बना देता है। इसलिए इमोशनल सीन बिना ज्यादा डायलॉग के भी असर छोड़ते हैं। स्क्रीनप्ले की सबसे अच्छी बात इसकी दो समानांतर कहानियां हैं, जो ऑडियंस की दिलचस्पी बनाए रखती हैं। हालांकि, शुरुआती कुछ एपिसोड और बीच के कुछ हिस्से थोड़े धीमे महसूस होते हैं। अगर एडिटिंग थोड़ी और टाइट होती... तो सीरीज का असर और बढ़ सकता था।

Musafir Cafe Web series Review and rating in Hindi Vikrant Massey Vedika Pinto Mahima Makwana Ruchir Arun
मुसाफिर कैफे - फोटो : वीडियो ग्रैब

देखें या नहीं?
अगर आप ऐसी सीरीज की तलाश में हैं, जो हर दस मिनट में ट्विस्ट देने की बजाय अपने किरदारों और उनकी दुनिया को समय दे, तो 'मुसाफिर कैफे' आपके लिए अच्छी पसंद हो सकती है। यह सीरीज रिश्तों को सिर्फ प्यार के नजरिए से नहीं, बल्कि जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों और फैसलों के साथ दिखाती है। कई बार इसके किरदार आपको सही भी लगेंगे और कई बार गलत, लेकिन यही इसकी खूबसूरती है कि यह किसी पर अपनी राय थोपने की कोशिश नहीं करती।
यह सीरीज हर किसी के लिए नहीं है। अगर आपको तेज रफ्तार कहानी और लगातार सस्पेंस पसंद है, तो शायद यह आपकी पसंद न बने। लेकिन अगर आप वीकेंड पर आराम से बैठकर ऐसी कहानी देखना चाहते हैं, जो खत्म होने के बाद भी कुछ देर तक आपके साथ रहे, तो 'मुसाफिर कैफे' को एक मौका जरूर दिया जा सकता है।

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