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डिजिटल अरेस्ट से ठगी: अम्बाला में 79 वर्षीय रिटायर्ड कैप्टन से 23 लाख ठगे, पाकिस्तान कनेक्शन का दिखाया डर

संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 10 Apr 2026 10:06 PM IST
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सार

साइबर ठगों ने क्राइम ब्रांच और एटीएस अधिकारी बनकर 79 वर्षीय रिटायर्ड कैप्टन निर्मल सिंह को डिजिटल अरेस्ट में रखकर 23 लाख रुपये ठग लिए। मनी लॉन्ड्रिंग और पाकिस्तानी कनेक्शन का डर दिखाकर कई दिनों तक निगरानी में रखाा।

79 year old retired captain cheated of Rs 23 lakh in Ambala by digital arrest
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार

पाकिस्तानी उग्रवादियों से संबंध व मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर सिटी के सैन माजरा निवासी निर्मल सिंह (79) से 23 लाख रुपये की धोखाधड़ी हो गई। ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच व एटीएस अधिकारी बताकर धोखाधड़ी का पूरा जाल बुना। डर दिखाते हुए कहा कि जिस पाकिस्तानी को पकड़ा है वो 70 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी है और उसने कुछ राशि आपके खाते में डाली है। इस तरह से घर में डिजिटल अरेस्ट कर राशि हड़प ली। साइबर थाना पुलिस ने रिटायर्ड कैप्टन निर्मल सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।

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उम्र व स्वास्थ्य का हवाला देते किया अरेस्ट
पुलिस को दी तहरीर में सैन माजरा निवासी रिटायर्ड कैप्टन 79 वर्षीय निर्मल सिंह ने बताया कि 11 मार्च को उनके पास एक कॉल आई थी। फोन करने वाले ने खुद को पंचकूला क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर रणजीत कुमार बताया था। कहा कि एक पाकिस्तानी उग्रवादी पकड़ा गया है, जिससे उनके संबंध हैं। आरोपियों ने डराया कि उग्रवादी के पास से 70 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया है और पीड़ित के पास भी वह राशि पहुंची है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के जरिए अन्य ठगों ने खुद को लखनऊ एटीएस का अधिकारी बताकर पीड़ित को धमकाया।
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ठगों ने उम्र व स्वास्थ्य का हवाला देते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। कहा कि वह 4-5 किलोमीटर के दायरे से बाहर न जाए, किसी से बात न करें और अपने कमरे का दरवाजा बंद रखें। ठगों ने उन पर निगरानी रखने के लिए व्हाट्सएप वीडियो कॉल का सहारा लिया।

तीन किस्तों में डाली राशि
पीड़ित निर्मल सिंह ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट करने के बाद ठगों ने विश्वास दिलाने के लिए एनआईए की फर्जी मोहर लगे दस्तावेज भी भेजे। 11 से 17 मार्च के बीच तीन किस्तों में 23 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर करवा ली। यह राशि अलग-अलग बैंक खाते में दी। 12 मार्च को 9 लाख की पहली किस्त, 13 मार्च को 5 तो 17 मार्च को तीसरी किस्त 9 लाख रुपये दी। जब शक होने पर पैसे वापस मांगे तो ठगों ने फोन उठाना बंद कर दिया।

एक वकील से मनी लॉन्ड्रिंग बारे पूछा तो ठगी का पता चला
पीड़ित निर्मल सिंह ने बताया कि ठगों ने आखिरी में कहा था कि 70 करोड़ के साथ आपके दिए गए 23 लाख को सील कर दिया है व तीन माह तक जांच चलेगी। बाद में फोन उठाना बंद कर दिया तो नारायणगढ़ में ही एक वकील के पास गया था। मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि उसके साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम से धोखाधड़ी हुई है। फिर जाकर खाते से पैसे निकलवाए थे। साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात पर संगठित अपराध की धारा111(2)(बी), गलत तरीके से रोकना व बंधक बनाना, जबरन वसूली धारा 308(2), धोखाधड़ी के तहत कार्रवाई की।

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