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Ambala News: कैल प्लांट के कूड़ा अपशिष्ट का औद्याेगिक इकाइयों में होगा प्रबंधन
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Thu, 12 Feb 2026 03:12 AM IST
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नगर निगम कार्यालय में आरडीएफ के प्रयोग को लेकर अधिकारियों से बैठक करते अतिरिक्त निगम आयुक्त धी
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यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व प्रोसेसिंग का कार्य कर रही नगर निगम की अधिकृत एजेंसी ने ग्लोबल पैनल इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ औपचारिक समझौता (एमओयू) किया है। इस समझौते के तहत प्रोसेसिंग के बाद तैयार किए गए आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) का उपयोग अधिकृत औद्योगिक इकाइयों में किया जाएगा।
इस संबंध में अतिरिक्त निगम आयुक्त धीरज कुमार ने अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए। धीरज कुमार व स्वच्छ भारत मिशन शहरी के सलाहकार लोकेश सेन ने बताया कि शहर में प्रतिदिन उत्पन्न हो रहे ठोस कचरे के सुरक्षित और प्रभावी निस्तारण को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। कचरे का स्रोत पर पृथक्करण करने के बाद उसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) में प्रोसेस किया जाएगा। इसके पश्चात कैल कचरा प्लांट में तैयार आरडीएफ को औद्योगिक उपयोग के लिए भेजा जाएगा, जिससे कचरे का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
इस पहल से शहर की डंप साइट और लैंडफिल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। अब तक प्रोसेसिंग के बाद बचने वाला ज्वलनशील कचरा लंबे समय तक कैल कचरा निस्तारण प्लांट पर जमा रहता था, जिससे पर्यावरण प्रदूषण व प्लांट में जगह नहीं रहने की समस्या उत्पन्न होती थी। नई व्यवस्था के अंतर्गत इस कचरे को वैकल्पिक ईंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाएगा, जिससे न केवल कचरे की मात्रा घटेगी बल्कि ऊर्जा संसाधन के रूप में उसका उपयोग भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि तैयार आरडीएफ का उपयोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृत औद्योगिक इकाइयों में को-प्रोसेसिंग अथवा वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाएगा। इससे औद्योगिक ईंधन की खपत में आंशिक कमी आएगी और कचरे का पर्यावरण अनुकूल निष्पादन संभव हो सकेगा।
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एनजीटी के मानकों का करना होगा पालन
यह पूरी प्रक्रिया ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जाएगी। आरडीएफ का संग्रहण, हैंडलिंग, परिवहन और अंतिम उपयोग निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण प्रोटोकॉल के तहत किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार का पर्यावरणीय या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न न हो।
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के लिए महत्वपूर्ण कदम
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के सलाहकार लोकेश सेन ने बताया कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक की यह सुव्यवस्थित शृंखला शहर को जीरो-वेस्ट मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही यह पहल स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के दृष्टिगत भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रोसेस्ड कचरे के अधिकृत औद्योगिक उपयोग से नगर निगम के प्रदर्शन में सुधार होगा और शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने में यह व्यवस्था प्रभावी भूमिका निभाएगी।
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इस संबंध में अतिरिक्त निगम आयुक्त धीरज कुमार ने अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए। धीरज कुमार व स्वच्छ भारत मिशन शहरी के सलाहकार लोकेश सेन ने बताया कि शहर में प्रतिदिन उत्पन्न हो रहे ठोस कचरे के सुरक्षित और प्रभावी निस्तारण को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। कचरे का स्रोत पर पृथक्करण करने के बाद उसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) में प्रोसेस किया जाएगा। इसके पश्चात कैल कचरा प्लांट में तैयार आरडीएफ को औद्योगिक उपयोग के लिए भेजा जाएगा, जिससे कचरे का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
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इस पहल से शहर की डंप साइट और लैंडफिल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। अब तक प्रोसेसिंग के बाद बचने वाला ज्वलनशील कचरा लंबे समय तक कैल कचरा निस्तारण प्लांट पर जमा रहता था, जिससे पर्यावरण प्रदूषण व प्लांट में जगह नहीं रहने की समस्या उत्पन्न होती थी। नई व्यवस्था के अंतर्गत इस कचरे को वैकल्पिक ईंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाएगा, जिससे न केवल कचरे की मात्रा घटेगी बल्कि ऊर्जा संसाधन के रूप में उसका उपयोग भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि तैयार आरडीएफ का उपयोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृत औद्योगिक इकाइयों में को-प्रोसेसिंग अथवा वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाएगा। इससे औद्योगिक ईंधन की खपत में आंशिक कमी आएगी और कचरे का पर्यावरण अनुकूल निष्पादन संभव हो सकेगा।
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एनजीटी के मानकों का करना होगा पालन
यह पूरी प्रक्रिया ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जाएगी। आरडीएफ का संग्रहण, हैंडलिंग, परिवहन और अंतिम उपयोग निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण प्रोटोकॉल के तहत किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार का पर्यावरणीय या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न न हो।
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के लिए महत्वपूर्ण कदम
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के सलाहकार लोकेश सेन ने बताया कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक की यह सुव्यवस्थित शृंखला शहर को जीरो-वेस्ट मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही यह पहल स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के दृष्टिगत भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रोसेस्ड कचरे के अधिकृत औद्योगिक उपयोग से नगर निगम के प्रदर्शन में सुधार होगा और शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने में यह व्यवस्था प्रभावी भूमिका निभाएगी।