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Ambala News: समागम में सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान
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संत फकीरदास महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते संत महापुरुष। संवाद
- फोटो : samvad
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- संत निरंजन दास ने किया संत फकीर दास की प्रतिमा का अनावरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बराड़ा। तंदवाली गांव स्थित डेरा बेगमपुरा में रविदासिया धर्म को समर्पित संत समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डेरा सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन पद्मश्री संत निरंजन दास महाराज मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उनके तंदवाली पहुंचने पर संगत ने स्वागत किया। इस दौरान सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।
संत निरंजन दास ने ब्रह्मलीन संत फकीर दास उदासीन महाराज की मूर्ति का अनावरण किया। डेरा के गद्दीनशीन संत सोमदास उदासीन महाराज ने बताया कि संत फकीर दास का जन्म और निर्वाण दिवस दोनों 2 अप्रैल को ही हैं, इसलिए आज उनकी पुण्य स्मृति में प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि संत फकीर दास ने आजीवन गुरु रविदास महाराज की वाणी का प्रचार-प्रसार कर भटके हुए लोगों को सत्य का मार्ग दिखाया।
एकता ही समाज की असली शक्ति : मनदीप दास
समागम के मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत मनदीप दास ने गुरुवाणी के माध्यम से एकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा, सतसंगत मिल रहिये माधो जैसे मधुप मखीरा अर्थात, जिस प्रकार मधुमक्खियां झुंड में रहकर अपने छत्ते की रक्षा करती हैं और कोई उन्हें छेड़ने का साहस नहीं करता, उसी प्रकार यदि समाज एकता के सूत्र में बंधा रहेगा, तो कोई भी उसका अहित नहीं कर पाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत धर्मदास बिंजलपुर ने कहा कि गुरु रविदास महाराज ने एक ऐसे बेगमपुरा की परिकल्पना की थी, जहां कोई दुख, गम या भेदभाव न हो। समागम में संत पूर्णदास, संत रामसिंह और संत सतपाल दास सहित कई संतों ने संगत को निहाल किया। इस दौरान ट्रस्ट के प्रधान ईश्वर पाल, महासचिव जीत राम और अन्य सेवादारों की देखरेख में हजारों श्रद्धालुओं के लिए अटूट भंडारे का आयोजन भी किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बराड़ा। तंदवाली गांव स्थित डेरा बेगमपुरा में रविदासिया धर्म को समर्पित संत समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डेरा सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन पद्मश्री संत निरंजन दास महाराज मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उनके तंदवाली पहुंचने पर संगत ने स्वागत किया। इस दौरान सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।
संत निरंजन दास ने ब्रह्मलीन संत फकीर दास उदासीन महाराज की मूर्ति का अनावरण किया। डेरा के गद्दीनशीन संत सोमदास उदासीन महाराज ने बताया कि संत फकीर दास का जन्म और निर्वाण दिवस दोनों 2 अप्रैल को ही हैं, इसलिए आज उनकी पुण्य स्मृति में प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि संत फकीर दास ने आजीवन गुरु रविदास महाराज की वाणी का प्रचार-प्रसार कर भटके हुए लोगों को सत्य का मार्ग दिखाया।
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एकता ही समाज की असली शक्ति : मनदीप दास
समागम के मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत मनदीप दास ने गुरुवाणी के माध्यम से एकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा, सतसंगत मिल रहिये माधो जैसे मधुप मखीरा अर्थात, जिस प्रकार मधुमक्खियां झुंड में रहकर अपने छत्ते की रक्षा करती हैं और कोई उन्हें छेड़ने का साहस नहीं करता, उसी प्रकार यदि समाज एकता के सूत्र में बंधा रहेगा, तो कोई भी उसका अहित नहीं कर पाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत धर्मदास बिंजलपुर ने कहा कि गुरु रविदास महाराज ने एक ऐसे बेगमपुरा की परिकल्पना की थी, जहां कोई दुख, गम या भेदभाव न हो। समागम में संत पूर्णदास, संत रामसिंह और संत सतपाल दास सहित कई संतों ने संगत को निहाल किया। इस दौरान ट्रस्ट के प्रधान ईश्वर पाल, महासचिव जीत राम और अन्य सेवादारों की देखरेख में हजारों श्रद्धालुओं के लिए अटूट भंडारे का आयोजन भी किया गया।

संत फकीरदास महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते संत महापुरुष। संवाद- फोटो : samvad