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जमानत को सजा के रूप में नहीं रोक सकते : कोर्ट
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी जसविंदर सिंह उर्फ काका को नियमित जमानत दे दी है।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत को सजा के रूप में रोककर नहीं रखा जा सकता। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कार्यस्थल पर उससे दोस्ती की और बेहतर जीवन का झांसा देकर उसके साथ कई बार संबंध बनाए। आरोपी पर आरोप था कि उसने निजी पलों की वीडियो और फोटो रिकॉर्ड कीं, जिन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर वह उसे ब्लैकमेल कर रहा था। यह भी आरोप था कि आरोपी ने अपनी शादीशुदा होने की बात छिपाई थी।
इस मामले में अंबाला सिटी के महिला थाना में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों पक्ष लंबे समय से आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में थे, जिसका लिखित समझौता भी मौजूद है। पीड़िता बालिग है और उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ समय बिताया व उपहार स्वीकार किए।
पीड़िता ने पहले भी एक शिकायत वापस ली थी और आरोपी के साथ रहने के लिए हलफनामे दिए थे। आरोपी 10 जनवरी से हिरासत में है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन रिकॉर्ड पर मौजूद लिव-इन डीड और हलफनामे यह सवाल उठाते हैं कि क्या सहमति वास्तव में धोखे से ली गई थी या नहीं। जज ने कहा कि इन पहलुओं का फैसला ट्रायल के दौरान होगा।
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अंबाला सिटी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी जसविंदर सिंह उर्फ काका को नियमित जमानत दे दी है।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत को सजा के रूप में रोककर नहीं रखा जा सकता। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कार्यस्थल पर उससे दोस्ती की और बेहतर जीवन का झांसा देकर उसके साथ कई बार संबंध बनाए। आरोपी पर आरोप था कि उसने निजी पलों की वीडियो और फोटो रिकॉर्ड कीं, जिन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर वह उसे ब्लैकमेल कर रहा था। यह भी आरोप था कि आरोपी ने अपनी शादीशुदा होने की बात छिपाई थी।
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इस मामले में अंबाला सिटी के महिला थाना में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों पक्ष लंबे समय से आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में थे, जिसका लिखित समझौता भी मौजूद है। पीड़िता बालिग है और उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ समय बिताया व उपहार स्वीकार किए।
पीड़िता ने पहले भी एक शिकायत वापस ली थी और आरोपी के साथ रहने के लिए हलफनामे दिए थे। आरोपी 10 जनवरी से हिरासत में है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन रिकॉर्ड पर मौजूद लिव-इन डीड और हलफनामे यह सवाल उठाते हैं कि क्या सहमति वास्तव में धोखे से ली गई थी या नहीं। जज ने कहा कि इन पहलुओं का फैसला ट्रायल के दौरान होगा।
