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Ambala News: जवानों से सीएम, बोले- वर्दी अधिकार नहीं जिम्मेदारी का प्रतीक
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 06 Feb 2026 02:00 AM IST
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जेल प्रशिक्षण अकादमी, करनाल में दीक्षांत परेड समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सम्मानित
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करनाल। जेल अकादमी के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर चुके 116 वार्डरों और सहायक अधीक्षकों को सम्मानित किया। इस दौरान जोश भरते हुए सीएम ने कहा कि खाकी वर्दी अधिकार नहीं जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह अवसर अनुशासन, सेवा, समर्पण और कर्तव्य बोध की आपकी उस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसे सभी नव-प्रशिक्षित कर्मियों ने कठोर परिश्रम, संयम और आत्मनिष्ठा के साथ पूर्ण किया है।
यह दिन जीवन का स्मरणीय अध्याय है, जो जवानों के व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ समाज और राज्य के प्रति दायित्व से भी जोड़ता है। मैदान में उपस्थित जवानों के अभिभावकों से कहा कि यह क्षण उन माता-पिताओं के लिए भी गर्व का है, जिनकी आंखों में आज अपने बच्चों को वर्दी में देखकर संतोष और आत्मविश्वास झलक रहा है।
उन्होंने कहा कि कारागार व्यवस्था किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्तंभ है। जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और मानवीय परिवर्तन की प्रयोगशाला होती है। जेल अब बंदी नहीं सुधार गृह बने हैं और कैदियों को भी रोजगारपरक बनाया जा रहा है। ताकि वे जेल से बाहर जाकर सम्मानजनक जीवन व मुख्यधारा से जुड़ सकें। प्रदेश की जेलों में बंदियों के प्रवेश से लेकर रिहाई तक, रहन-सहन, खान-पान, उनकी मुलाकातें, चिकित्सा सुविधाएं, कोर्ट-पेशी व कैंटीन व्यवस्था पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत हैं। इस अवसर पर विधायक जगमोहन आनंद, मेयर रेनू बाला गुप्ता, भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रवीन लाठर, जेल अधीक्षक लखबीर सिंह, जेल प्रशिक्षण अकादमी के प्रधानाचार्य नरेश गोयल मौजूद रहे। अकादमी के पहले बैच के सभी 116 सहायक अधीक्षक व वार्डरों में एक महिला सहायक अधीक्षक व 8 महिला वार्डर भी शामिल हैं। सीएम ने कहा कि यह गर्व की बात है और यह महिलाओं की सहभागिता एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।
अपराध का स्वरूप बदला तो सामाजिक चुनौतियां भी हुई जटिल : जेल मंत्री
जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि जेलों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं बल्कि वे सुधार, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का अहम केंद्र है। एक जेल अधिकारी के रूप में भूमिका केवल प्रहरी की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, अनुशासक और कभी-कभी एक शिक्षक की भी होती है। हम एक ऐसे युग में कार्य कर रहे हैं जहां अपराध के स्वरूप बदल रहे हैं, सामाजिक चुनौतियां जटिल होती जा रही हैं और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में जेल प्रशासन की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
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यह दिन जीवन का स्मरणीय अध्याय है, जो जवानों के व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ समाज और राज्य के प्रति दायित्व से भी जोड़ता है। मैदान में उपस्थित जवानों के अभिभावकों से कहा कि यह क्षण उन माता-पिताओं के लिए भी गर्व का है, जिनकी आंखों में आज अपने बच्चों को वर्दी में देखकर संतोष और आत्मविश्वास झलक रहा है।
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उन्होंने कहा कि कारागार व्यवस्था किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्तंभ है। जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और मानवीय परिवर्तन की प्रयोगशाला होती है। जेल अब बंदी नहीं सुधार गृह बने हैं और कैदियों को भी रोजगारपरक बनाया जा रहा है। ताकि वे जेल से बाहर जाकर सम्मानजनक जीवन व मुख्यधारा से जुड़ सकें। प्रदेश की जेलों में बंदियों के प्रवेश से लेकर रिहाई तक, रहन-सहन, खान-पान, उनकी मुलाकातें, चिकित्सा सुविधाएं, कोर्ट-पेशी व कैंटीन व्यवस्था पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत हैं। इस अवसर पर विधायक जगमोहन आनंद, मेयर रेनू बाला गुप्ता, भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रवीन लाठर, जेल अधीक्षक लखबीर सिंह, जेल प्रशिक्षण अकादमी के प्रधानाचार्य नरेश गोयल मौजूद रहे। अकादमी के पहले बैच के सभी 116 सहायक अधीक्षक व वार्डरों में एक महिला सहायक अधीक्षक व 8 महिला वार्डर भी शामिल हैं। सीएम ने कहा कि यह गर्व की बात है और यह महिलाओं की सहभागिता एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।
अपराध का स्वरूप बदला तो सामाजिक चुनौतियां भी हुई जटिल : जेल मंत्री
जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि जेलों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं बल्कि वे सुधार, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का अहम केंद्र है। एक जेल अधिकारी के रूप में भूमिका केवल प्रहरी की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, अनुशासक और कभी-कभी एक शिक्षक की भी होती है। हम एक ऐसे युग में कार्य कर रहे हैं जहां अपराध के स्वरूप बदल रहे हैं, सामाजिक चुनौतियां जटिल होती जा रही हैं और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में जेल प्रशासन की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
