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Ambala News: कर्ण-18 बीज पड़ा कम, अब अक्तूबर में मिलेगा
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कृषि विज्ञान एवं गन्ना प्रजन्न केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से 13 साल में तैयार की गई कर्ण-18 किस्म ने उत्तर भारत के गन्ना उत्पादक राज्यों में धूम मचा दी है। इसके बीज की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि सिर्फ तीन दिन में इसका बीज लेने के लिए संस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्यप्रदेश से भी किसान संस्थान में पहुंचे। जिनको बीज उपलब्ध करवा दिया गया लेकिन अब संस्थान के पास बीज कम पड़ गया है।
बीज की किल्लत को देखते हुए संस्थान ने कुछ बीज खुद संरक्षित किया है। ताकि इसे दोबारा बोने के बाद इससे और अधिक मात्रा में बीज तैयार किया जा सके जिसे संस्थान की ओर से अक्तूबर में फिर से बांटा जाएगा। संस्थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि गन्ने की उन्नत किस्म कर्ण-18 की अधिक पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर शर्करा रिकवरी के चलते उत्तर भारत के कई प्रदेशों के किसान इसका बीज लेने पहुंच रहे हैं।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एमआर मीणा ने बताया कि सर्द मौसम में भी इस किस्म के गन्ने से 15 तक फुटाव देखने को मिला है। इस किस्म का गन्ना बिल्कुल सीधा खड़ा रहता है। इसमें ज्यादातर गन्ने की बीमारियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से मौजूद है। इसकी एक बार की बुआई से तीन फसलें ली जा सकती हैं। सबसे खास बात ये है कि गन्ने की इस किस्म से पैदावार 30 प्रतिशत ज्यादा रहती है। इसके अलावा इसकी मिठास में शर्करा की मात्रा 11 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है। यह किस्त सूखे क्षेत्रों और लवणीय (खारे) मिट्टी वाले इलाकों में भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
इसका बीज बेहद वाजिब दामों पर किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से डेढ़ रुपये प्रति आंख की दर से दिया गया। अब कुछ बीज संरक्षित रखा गया है ताकि इससे अधिक बीज बनाया जा सके। अब किसानों को अक्तूबर में इसका बीज मिल सकेगा।
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करनाल। कृषि विज्ञान एवं गन्ना प्रजन्न केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से 13 साल में तैयार की गई कर्ण-18 किस्म ने उत्तर भारत के गन्ना उत्पादक राज्यों में धूम मचा दी है। इसके बीज की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि सिर्फ तीन दिन में इसका बीज लेने के लिए संस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्यप्रदेश से भी किसान संस्थान में पहुंचे। जिनको बीज उपलब्ध करवा दिया गया लेकिन अब संस्थान के पास बीज कम पड़ गया है।
बीज की किल्लत को देखते हुए संस्थान ने कुछ बीज खुद संरक्षित किया है। ताकि इसे दोबारा बोने के बाद इससे और अधिक मात्रा में बीज तैयार किया जा सके जिसे संस्थान की ओर से अक्तूबर में फिर से बांटा जाएगा। संस्थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि गन्ने की उन्नत किस्म कर्ण-18 की अधिक पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर शर्करा रिकवरी के चलते उत्तर भारत के कई प्रदेशों के किसान इसका बीज लेने पहुंच रहे हैं।
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संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एमआर मीणा ने बताया कि सर्द मौसम में भी इस किस्म के गन्ने से 15 तक फुटाव देखने को मिला है। इस किस्म का गन्ना बिल्कुल सीधा खड़ा रहता है। इसमें ज्यादातर गन्ने की बीमारियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से मौजूद है। इसकी एक बार की बुआई से तीन फसलें ली जा सकती हैं। सबसे खास बात ये है कि गन्ने की इस किस्म से पैदावार 30 प्रतिशत ज्यादा रहती है। इसके अलावा इसकी मिठास में शर्करा की मात्रा 11 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है। यह किस्त सूखे क्षेत्रों और लवणीय (खारे) मिट्टी वाले इलाकों में भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
इसका बीज बेहद वाजिब दामों पर किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से डेढ़ रुपये प्रति आंख की दर से दिया गया। अब कुछ बीज संरक्षित रखा गया है ताकि इससे अधिक बीज बनाया जा सके। अब किसानों को अक्तूबर में इसका बीज मिल सकेगा।
