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Ambala News: निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, किताबों-ड्रेस की जबरन बिक्री पर लगेगी रोक
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पानीपत। हरियाणा शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए किताबों, वर्दी और अन्य सामग्री की जबरन खरीद पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य के कई निजी स्कूल आरटीई एक्ट 2009 और हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों का उल्लंघन कर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जारी निर्देश में कहा गया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जबकि एनसीईआरटी और सीबीएसई द्वारा अनुमोदित पुस्तकों का ही उपयोग होना चाहिए। इसके अलावा, गैर-जरूरी संदर्भ पुस्तकों की सिफारिश, बार-बार वर्दी बदलना और तय दुकानों से खरीद के लिए दबाव बनाना भी नियमों के खिलाफ है। निदेशालय ने यह भी पाया कि कुछ स्कूल छात्रों को स्कूल परिसर में उपलब्ध पेयजल के बावजूद पानी की बोतल लाने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिससे स्कूल बैग का वजन बढ़ता है और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं और उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें, साथ ही, आम जनता के लिए शिकायत दर्ज कराने हेतु जिला स्तर पर ई-मेल और फोन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ये हैं प्रमुख अनियमितताएं
- निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव
- गैर-जरूरी व पुरानी संदर्भ पुस्तकों की सिफारिश
- बार-बार यूनिफॉर्म बदलना और निर्धारित दुकानों से खरीद की बाध्यता
- स्कूल में पानी होने के बावजूद बोतल लाने का दबाव
स्कूल बैग का निर्धारित वजन
कक्षा 1-2 : 1.5 किलोग्राम
कक्षा 3-5 : 2 से 3 किलोग्राम
कक्षा 6-7 : 4 किलोग्राम
कक्षा 8-9 : 4.5 किलोग्राम
कक्षा 10 : 5 किलोग्राम
निजी स्कूलों द्वारा किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी स्कूलों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ डालता है या जबरन खरीद के लिए दबाव बनाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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जारी निर्देश में कहा गया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जबकि एनसीईआरटी और सीबीएसई द्वारा अनुमोदित पुस्तकों का ही उपयोग होना चाहिए। इसके अलावा, गैर-जरूरी संदर्भ पुस्तकों की सिफारिश, बार-बार वर्दी बदलना और तय दुकानों से खरीद के लिए दबाव बनाना भी नियमों के खिलाफ है। निदेशालय ने यह भी पाया कि कुछ स्कूल छात्रों को स्कूल परिसर में उपलब्ध पेयजल के बावजूद पानी की बोतल लाने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिससे स्कूल बैग का वजन बढ़ता है और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
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सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं और उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें, साथ ही, आम जनता के लिए शिकायत दर्ज कराने हेतु जिला स्तर पर ई-मेल और फोन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ये हैं प्रमुख अनियमितताएं
- निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव
- गैर-जरूरी व पुरानी संदर्भ पुस्तकों की सिफारिश
- बार-बार यूनिफॉर्म बदलना और निर्धारित दुकानों से खरीद की बाध्यता
- स्कूल में पानी होने के बावजूद बोतल लाने का दबाव
स्कूल बैग का निर्धारित वजन
कक्षा 1-2 : 1.5 किलोग्राम
कक्षा 3-5 : 2 से 3 किलोग्राम
कक्षा 6-7 : 4 किलोग्राम
कक्षा 8-9 : 4.5 किलोग्राम
कक्षा 10 : 5 किलोग्राम
निजी स्कूलों द्वारा किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी स्कूलों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ डालता है या जबरन खरीद के लिए दबाव बनाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
