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Ambala News: विभाग की चार एंबुलेंस बीमार, 16 के सहारे चल रहा रेफरल सिस्टम
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- कंपनी के 17 लाख के बिल का भुगतान न हो पाने के कारण एंबुलेंस नहीं हो रहीं दुरुस्त
- कैंट की तीन तो सिटी की एक एंबुलेंस खराब, मरीजों को मिलने में होती है देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। जिले के नागरिक अस्पतालों से रेफरल सिस्टम इन दिनों खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की चार महत्वपूर्ण एंबुलेंस खराब होने के कारण लंबे समय से धूल फांक रही हैं। 17 लाख रुपये का भुगतान अटकने के कारण संबंधित एजेंसी एंबुलेंस को दुरुस्त करने नहीं दे रही है। एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। महज 16 गाड़ियों के सहारे जिले का रेफरल लोड टिका हुआ है, जिससे आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस आने में देरी मरीजों की जान पर बन आती है।
कैंट व सिटी में सबसे ज्यादा दिक्कत
जिले में सबसे ज्यादा मरीज अंबाला कैंट व अंबाला सिटी के नागरिक अस्पतालों से रेफर किए जाते हैं। चाहे वह ट्रामा सेंटर व इमरजेंसी से हों या फिर अलग-अलग वार्ड में दाखिल मरीज। अंबाला कैंट की चार में से तीन और सिटी की चार में एक एंबुलेंस खराब पड़ी हैं। जब भी यहां कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे रेफर करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं। इसमें लगने वाले समय के कारण कई बार मरीज की हालत और बिगड़ जाती है। अंबाला में जिले में 27 एंबुलेंस थी। इनमें से 4 कंडम हैं जो कोई नहीं चला रहा है। 3 जर्जर पड़ी हैं। 20 में से 4 खराब पड़ी हैं। ऐसे में जिले में महज 16 बची हैं। उनमें से भी एंबुलेंस बार-बार खराब रहती हैं। जबकि कई वीआईपी ड्यूटी पर रहती हैं।
पत्राचार में अटका बिल का भुगतान
एंबुलेंस के सड़क पर न उतर पाने के पीछे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी का करीब 17 लाख रुपये के बिल का भुगतान बकाया है। बजट के अभाव में कंपनी इन खराब गाड़ियों को दुरुस्त नहीं कर रही है। जब भी बिलों के भुगतान की बात आती है तो विभाग की तरफ से मुख्यालय से लगातार पत्राचार होने की बात बोलकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसे में विभाग व एजेंसी के बीच उलझे मामले में आम जनता को पिसना पड़ रहा है। उधर, विभाग की तरफ से नई एंबुलेंस भी नहीं मिल रही है।
केस-1
देरी होने पर निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा
कैंट के नागरिक अस्पताल में वीरवार रात को कच्चा बाजार से एक युवक सड़क हादसे का शिकार होकर आया था। उनके साथ आई महिला सुनैना ने अजय के रेफर होने के बाद टोल फ्री नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया तो 15 मिनट का समय लग गया। अस्पताल के लैंडलाइन नंबर से फोन करने पर भी समय लग रहा था। आखिर में वह निजी एंबुलेंस के जरिये एमएम सद्दोपुर गए, जहां अजय उपचाराधीन है।
खराब एंबुलेंस को दुरुस्त करवाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यालय स्तर पर भी एजेंसी के बिल के भुगतान के लिए लिखा गया है। जिले में अन्य एंबुलेंस से स्थिति कंट्रोल में है। जल्द ही इन्हें भी दुरुस्त करवाया जाएगा। नई एंबुलेंस की भी डिमांड भेजी गई है।
- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। जिले के नागरिक अस्पतालों से रेफरल सिस्टम इन दिनों खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की चार महत्वपूर्ण एंबुलेंस खराब होने के कारण लंबे समय से धूल फांक रही हैं। 17 लाख रुपये का भुगतान अटकने के कारण संबंधित एजेंसी एंबुलेंस को दुरुस्त करने नहीं दे रही है। एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। महज 16 गाड़ियों के सहारे जिले का रेफरल लोड टिका हुआ है, जिससे आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस आने में देरी मरीजों की जान पर बन आती है।
कैंट व सिटी में सबसे ज्यादा दिक्कत
जिले में सबसे ज्यादा मरीज अंबाला कैंट व अंबाला सिटी के नागरिक अस्पतालों से रेफर किए जाते हैं। चाहे वह ट्रामा सेंटर व इमरजेंसी से हों या फिर अलग-अलग वार्ड में दाखिल मरीज। अंबाला कैंट की चार में से तीन और सिटी की चार में एक एंबुलेंस खराब पड़ी हैं। जब भी यहां कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे रेफर करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं। इसमें लगने वाले समय के कारण कई बार मरीज की हालत और बिगड़ जाती है। अंबाला में जिले में 27 एंबुलेंस थी। इनमें से 4 कंडम हैं जो कोई नहीं चला रहा है। 3 जर्जर पड़ी हैं। 20 में से 4 खराब पड़ी हैं। ऐसे में जिले में महज 16 बची हैं। उनमें से भी एंबुलेंस बार-बार खराब रहती हैं। जबकि कई वीआईपी ड्यूटी पर रहती हैं।
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पत्राचार में अटका बिल का भुगतान
एंबुलेंस के सड़क पर न उतर पाने के पीछे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी का करीब 17 लाख रुपये के बिल का भुगतान बकाया है। बजट के अभाव में कंपनी इन खराब गाड़ियों को दुरुस्त नहीं कर रही है। जब भी बिलों के भुगतान की बात आती है तो विभाग की तरफ से मुख्यालय से लगातार पत्राचार होने की बात बोलकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसे में विभाग व एजेंसी के बीच उलझे मामले में आम जनता को पिसना पड़ रहा है। उधर, विभाग की तरफ से नई एंबुलेंस भी नहीं मिल रही है।
केस-1
देरी होने पर निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा
कैंट के नागरिक अस्पताल में वीरवार रात को कच्चा बाजार से एक युवक सड़क हादसे का शिकार होकर आया था। उनके साथ आई महिला सुनैना ने अजय के रेफर होने के बाद टोल फ्री नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया तो 15 मिनट का समय लग गया। अस्पताल के लैंडलाइन नंबर से फोन करने पर भी समय लग रहा था। आखिर में वह निजी एंबुलेंस के जरिये एमएम सद्दोपुर गए, जहां अजय उपचाराधीन है।
खराब एंबुलेंस को दुरुस्त करवाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यालय स्तर पर भी एजेंसी के बिल के भुगतान के लिए लिखा गया है। जिले में अन्य एंबुलेंस से स्थिति कंट्रोल में है। जल्द ही इन्हें भी दुरुस्त करवाया जाएगा। नई एंबुलेंस की भी डिमांड भेजी गई है।
- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला