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Ambala News: ईश्वर का दूसरा रूप मां
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मां कृष्णा देवी के साथ उमा शंकर, रंगकर्मी एवं फिल्म अभिनेता । स्वयं
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पृथ्वी पर मां ईश्वर का दूसरा रूप है, किसी ने सच ही कहा कि ईश्वर स्वयं सब जगह उपस्थित नहीं हो सकता था इसलिए उसने मां बनाई, मां केवल बच्चे को जन्म ही नहीं देती बल्कि संस्कार देकर जीवनभर उसका मार्गदर्शन करती है, इसी प्रकार मेरी मां कांता रानी कालडा ने बचपन से हमें संस्कार देकर बड़ा किया। शिक्षा के क्षेत्र में पहले दिन से लेकर उन्होंने हाथ में कलम और पैंसिल पकड़ाकर हमें पढ़ना लिखना सिखाया।
केबल पुस्तकीय ज्ञान नहीं बल्कि अपने शरीर को स्वस्थ रखना और घर की स्वच्छता के बारे में भी हमें शिक्षा दी, दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने मधुर बाणी में बात करने का मार्ग भी उन्होंने ही सुझाया। स्वयं मेहनत करके हमें उच्च पदों तक पहुंचाया। मेरी पीएचडी की पढा़ई करने तक उनका बहुत बड़ा सहयोग है। उनके मार्गदर्शन में ही मैं जीवनभर काॅलेज में व्याख्याता के पद पर नौकरी कर पाई। मेरी एक-एक सांस जीवन भर अपनी मां की आभारी रहेगी। मैं उनके चरणों में नमन करती हुई उनके प्रति आभार व्यक्त करती हूं।
- डॉ. शशी धमीजा, पूर्व प्राध्यापिका आर्य गर्ल्स कालेज, अंबाला छावनी
मेरी जिंदगी में मां की भूमिका एक हरे भरे पेड़ की छांव जैसी है, जो हमेशा मेरे ऊपर रही, परिवार के बहुत से लोगों ने मेरा विरोध किया, क्योंकि हमारे परिवार में नाटक और मंच को अच्छा नहीं मानते थे, लेकिन उस समय में मां कृष्णा देवी को भरोसा था कि मैं एक दिन जरूर कुछ करूंगा, पिता की डांट से बचाना हो या जरूरत के समय में साथ खड़े होकर कहना कि तू कर लेगा, ये शब्द अंदर से प्रेरित करते थे कि अपने लिए नहीं तो कम से कम मां के लिए तो जरूर करना है, ताकि जिस दिन मुझे तरक्की मिलेगी तो उसके एक हिस्से में मां की जीत भी होगी।
उमा शंकर, रंगकर्मी एवं फिल्म अभिनेता
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केबल पुस्तकीय ज्ञान नहीं बल्कि अपने शरीर को स्वस्थ रखना और घर की स्वच्छता के बारे में भी हमें शिक्षा दी, दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने मधुर बाणी में बात करने का मार्ग भी उन्होंने ही सुझाया। स्वयं मेहनत करके हमें उच्च पदों तक पहुंचाया। मेरी पीएचडी की पढा़ई करने तक उनका बहुत बड़ा सहयोग है। उनके मार्गदर्शन में ही मैं जीवनभर काॅलेज में व्याख्याता के पद पर नौकरी कर पाई। मेरी एक-एक सांस जीवन भर अपनी मां की आभारी रहेगी। मैं उनके चरणों में नमन करती हुई उनके प्रति आभार व्यक्त करती हूं।
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- डॉ. शशी धमीजा, पूर्व प्राध्यापिका आर्य गर्ल्स कालेज, अंबाला छावनी
मेरी जिंदगी में मां की भूमिका एक हरे भरे पेड़ की छांव जैसी है, जो हमेशा मेरे ऊपर रही, परिवार के बहुत से लोगों ने मेरा विरोध किया, क्योंकि हमारे परिवार में नाटक और मंच को अच्छा नहीं मानते थे, लेकिन उस समय में मां कृष्णा देवी को भरोसा था कि मैं एक दिन जरूर कुछ करूंगा, पिता की डांट से बचाना हो या जरूरत के समय में साथ खड़े होकर कहना कि तू कर लेगा, ये शब्द अंदर से प्रेरित करते थे कि अपने लिए नहीं तो कम से कम मां के लिए तो जरूर करना है, ताकि जिस दिन मुझे तरक्की मिलेगी तो उसके एक हिस्से में मां की जीत भी होगी।
उमा शंकर, रंगकर्मी एवं फिल्म अभिनेता

मां कृष्णा देवी के साथ उमा शंकर, रंगकर्मी एवं फिल्म अभिनेता । स्वयं
