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Ambala News: टांगरी नदी के बीच एनएचएआई ने बनाया पाइपलाइन चैंबर
Fri, 31 Jul 2026 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:56 AM IST
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अंबाला। छावनी में मानसून की दस्तक के बीच संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क है। विभाग ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर अंबाला-जगाधरी रोड पुल के पास टांगरी नदी के पाट (बेड) में बनाए गए पाइपलाइन आउटलेट चैंबर को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि इसे जल्द नहीं हटाया गया, तो मानसून के दौरान पानी का प्राकृतिक बहाव रुक सकता है और अंबाला में बाढ़ का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
नदी के बहाव में बाधा बन रहा चैंबर
सिंचाई विभाग के दक्षिण उपमंडल, अंबाला के उपमंडल अधिकारी की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एनएचएआई द्वारा अंबाला-जगाधरी रोड पुल के ठीक नीचे की ओर टांगरी नदी के बीचों-बीच एक पाइपलाइन आउटलेट चैंबर का निर्माण कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह अवैध निर्माण मानसून के दिनों में बाढ़ के पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेगा। इससे नदी की जल-वहन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
पहले भी दी गई थी चेतावनी, नहीं हुई कार्रवाई
विभाग के अनुसार, इससे पहले भी साइट निरीक्षण के दौरान संबंधित जूनियर इंजीनियर और एसडीओ द्वारा एनएचएआई के संबंधित अधिकारियों से इस चैंबर को तुरंत हटाने का आग्रह किया था। कुछ दिन पहले भी इस मामले को दोबारा उठाया गया था, लेकिन एनएचएआई की तरफ से ना तो कोई जवाब दिया गया और ना ही इसे हटाने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। प्रशासनिक सुस्ती को देखते हुए अब इसे अति आवश्यक श्रेणी में रखते हुए पत्र जारी किया गया है।
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तुंरत प्रभाव से हटाने और पुनर्निर्माण का सुझाव
सिंचाई विभाग ने एनएचएआई से मांग की है कि मानसून की गंभीरता को देखते हुए इस आउटलेट चैंबर को तुरंत प्रभाव से ध्वस्त किया जाए। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि इस चैंबर को किसी अन्य सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर दोबारा बनाया जाए, ताकि बाढ़ की स्थिति में टांगरी नदी के बहाव में किसी प्रकार की रुकावट न आए। विभाग ने चेताया है कि मामले की नाजुकता को समझते हुए जल्द से जल्द जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा
इस लापरवाही को देखकर स्थानीय बाढ़ पीड़ित कमल कांत व नरेंद्र सैनी सहित अन्य लोगों का कहना है कि जब सरकारी महकमे खुद ही जलमार्गों पर अवैध कब्जे और निर्माण करने पर उतारू हो जाएंगे, तो आम आदमी और निजी मालिकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। जनता का सवाल है कि क्या मानसून सिर पर होने के बाद भी प्रशासनिक अमला हादसों का इंतजार कर रहा है।
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एनएचएआई ने गलत तरीके से टांगरी नदी में पाइपलाइन का चैंबर बना दिया है जोकि पानी के लिए रुकावट बनेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है। एनएचएआई को इसे तुरंत हटाने के लिए पत्र लिखा गया है।
सुखविंदर सिंह, उपमंडल अधिकारी, सिंचाई विभाग,अंबाला।
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नदी के बहाव में बाधा बन रहा चैंबर
सिंचाई विभाग के दक्षिण उपमंडल, अंबाला के उपमंडल अधिकारी की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एनएचएआई द्वारा अंबाला-जगाधरी रोड पुल के ठीक नीचे की ओर टांगरी नदी के बीचों-बीच एक पाइपलाइन आउटलेट चैंबर का निर्माण कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह अवैध निर्माण मानसून के दिनों में बाढ़ के पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेगा। इससे नदी की जल-वहन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
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पहले भी दी गई थी चेतावनी, नहीं हुई कार्रवाई
विभाग के अनुसार, इससे पहले भी साइट निरीक्षण के दौरान संबंधित जूनियर इंजीनियर और एसडीओ द्वारा एनएचएआई के संबंधित अधिकारियों से इस चैंबर को तुरंत हटाने का आग्रह किया था। कुछ दिन पहले भी इस मामले को दोबारा उठाया गया था, लेकिन एनएचएआई की तरफ से ना तो कोई जवाब दिया गया और ना ही इसे हटाने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। प्रशासनिक सुस्ती को देखते हुए अब इसे अति आवश्यक श्रेणी में रखते हुए पत्र जारी किया गया है।
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तुंरत प्रभाव से हटाने और पुनर्निर्माण का सुझाव
सिंचाई विभाग ने एनएचएआई से मांग की है कि मानसून की गंभीरता को देखते हुए इस आउटलेट चैंबर को तुरंत प्रभाव से ध्वस्त किया जाए। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि इस चैंबर को किसी अन्य सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर दोबारा बनाया जाए, ताकि बाढ़ की स्थिति में टांगरी नदी के बहाव में किसी प्रकार की रुकावट न आए। विभाग ने चेताया है कि मामले की नाजुकता को समझते हुए जल्द से जल्द जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा
इस लापरवाही को देखकर स्थानीय बाढ़ पीड़ित कमल कांत व नरेंद्र सैनी सहित अन्य लोगों का कहना है कि जब सरकारी महकमे खुद ही जलमार्गों पर अवैध कब्जे और निर्माण करने पर उतारू हो जाएंगे, तो आम आदमी और निजी मालिकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। जनता का सवाल है कि क्या मानसून सिर पर होने के बाद भी प्रशासनिक अमला हादसों का इंतजार कर रहा है।
एनएचएआई ने गलत तरीके से टांगरी नदी में पाइपलाइन का चैंबर बना दिया है जोकि पानी के लिए रुकावट बनेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है। एनएचएआई को इसे तुरंत हटाने के लिए पत्र लिखा गया है।
सुखविंदर सिंह, उपमंडल अधिकारी, सिंचाई विभाग,अंबाला।