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Ambala News: अधिकारियों ने फर्जी यूसी बनाकर दबा दी थीं मकान नवीनीकरण योजना की फाइलें
Sat, 01 Aug 2026 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 01 Aug 2026 03:25 AM IST
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अंबाला सिटी। डॉ. भीमराव आंबेडकर मकान नवीनीकरण योजना में 17 करोड़ रुपये की बंदरबांट के मामले की जांच में एक और तथ्य सामने आया है। अधिकारियों ने योजना में भ्रष्टाचार पर किसी की नजर न पड़े इसके लिए फर्जी उपभोग प्रमाण पत्र यानि यूसी बनाकर फाइलों को दबा दिया था। ऐसा इसलिए किया गया जिससे कि यह पता चल जाए कि सभी लाभार्थियों तक लाभ पहुंच गया है।
इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए अधिकारियों और दलालों के बीच कोई साधारण नहीं, बल्कि चौंकाने वाला संवाद नेटवर्क काम कर रहा था। विजिलेंस की ओर से जब्त की गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) रिपोर्ट में सामाने आया है कि दलाल समीर बख्शी और दूसरे मुख्य एजेंट सतीश कुमार उर्फ रवि के बीच 3916 बार फोन कॉल हुए। इसके अलावा तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी (डीडब्ल्यूओ) कमल कुमार और मुख्य दलाल समीर बख्शी उर्फ मन्नू के बीच मई 2021 से दिसंबर 2022 के बीच कुल 177 बार सीधी बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। वहीं, तहसील कल्याण अधिकारी रुमाल कौर और समीर बख्शी के बीच 39 बार फोन पर बातचीत पाई गई। इस डिजिटल सबूत ने अधिकारियों के उस दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं जिसमें उन्होंने विजिलेंस के सामने दलालों को पहचानने से साफ इनकार किया था। मामले के जांच अधिकारी प्रवीन कुमार ने बताया कि इस केस के संबंध में उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सोमवार को वह इसकी जानकारी लेंगे और जांच शुरू करेंगे। ब्यूरो
खुलासा 1:
गायब कर दिए गए प्रेषण रजिस्टर
जांच में पाया गया कि बराड़ा तहसील कल्याण कार्यालय से वर्ष 2020, 2021 और 2022 के प्रेषण रजिस्टर (डिस्पैच रजिस्टर) ही गायब कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने घोटाले के निशान मिटाने के लिए सरकारी उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) को कभी आधिकारिक डायरी में दर्ज ही नहीं होने दिया। फर्जी यूसी बनाकर मनमर्जी से सरकारी बजट रिलीज करवा लिया गया।
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खुलासा 2:
फर्जी यूसी जारी कर विभाग को रखा अंधेरे में
विजिलेंस जांच में सबसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही यह सामने आई है कि नियम के मुताबिक मकान की मरम्मत होने के बाद लाभार्थी को उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराना होता है। परंतु इस घोटाले में तहसील कल्याण अधिकारी दीपिका और रुमाल कौर ने खुद ही अपने फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र बनाकर जिला कार्यालय को भेज दिए। जब मुख्यालय से इस बाबत जवाब मांगा गया, तो जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय की उप अधीक्षक सुषमा रानी ने खुलासा किया कि ऐसे किसी भी यूसी का कोई रिकॉर्ड या डायरी नंबर कार्यालय में मौजूद ही नहीं है।
घोटाले करने का यह तरीका अपनाया
एटीएम कार्ड गिरवी रखना: दलाल लाभार्थियों का नया बैंक खाता खुलवाते थे और उनका एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे।
50 प्रतिशत कमीशन की सीधी कटौती: 50 हजार या 80 हजार रुपये की राशि खाते में आते ही दलाल खुद कैश निकालकर 50त्न राशि हड़प लेते थे।
बिना भौतिक निरीक्षण स्वीकृति: 59 जांचे गए आवेदनों में से 55 आवेदन पूरी तरह अधूरे और फर्जी पाए गए, जो बिना मौके पर जाए पास किए गए।
एक ही मकान पर दोहरा-तिहरा लाभ: ठाकुरपुरा गांव में एक ही मकान में रहने वाले मां, बेटे और अन्य परिजनों के नाम पर बार-बार 25-25 और 50-50 हजार रुपये ऐंठे गए।
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अब बैंक प्रबंधकों पर भी गहराया संदेह, एसीबी करेगी पूछताछ
इस घोटाले की जांच अब सिर्फ कल्याण विभाग के अधिकारियों और एजेंटों तक सीमित नहीं रहेगी। एसीबी के सूत्रों के अनुसार, जिस तरह से सैकड़ों अपात्रों के खाते रातों-रात खोले गए और पैसे आते ही दलालों द्वारा एटीएम से निकाले गए, उसमें संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। एसीबी के जांच अधिकारी अब उन बैंक खातों की सीसीटीवी फुटेज और केवाईसी दस्तावेजों को खंगालेंगे जिनसे दलालों ने एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर लाखों रुपये कैश निकाले।
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क्या है प्रकरण
डॉ. भीमराव आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत गरीबों को मकान मरम्मत के लिए 80 हजार रुपये की सरकारी सहायता दी जाती है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच अंबाला जिले में करीब 17 करोड़ रुपये के बजट में भारी घोटाले की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू की। विजिलेंस जांच में सामने आया कि विभागीय अधिकारियों और दलालों के गठजोड़ ने फर्जी दस्तावेज, फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र और बिना मौके के निरीक्षण के 3,922 फाइलें पास कर दीं। दलाल गरीबों के एटीएम कार्ड अपने पास रखकर 50 प्रतिशत कमीशन खुद निकाल लेते थे। मामले में तत्कालीन डीडब्ल्यूओ और टीडब्ल्यूओ समेत 16 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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शीघ्र हो सकती हैं गिरफ्तारियां
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब एसीबी की टीम नामजद 16 आरोपियों, जिनमें तत्कालीन डीडब्ल्यूओ कमल कुमार (अब मोहाली निवासी), शीशपाल, पूर्व टीडब्ल्यूओ दीपिका, रुमाल कौर व 9 एजेंट शामिल हैं, की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने की तैयारी में है। केस के जांच निरीक्षक प्रवीन कुमार जल्द ही चार्जशीट कोर्ट में पेश करेंगे।
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केस स्टडी:
न मकान टूटे मिले, ना मरम्मत हुई, दलालों ने एटीएम से खुद निकाले आधे पैसे
एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जब डॉ. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत स्वीकृत 59 रैंडम फाइलों की धरातल पर जांच की, तो 55 मामलों में सीधे तौर पर जालसाजी और गबन का पर्दाफाश हुआ।
करमजीत कौर (गांव ठाकुरपुरा): करमजीत कौर (पति लाभ सिंह) के नाम पर 80,000 रुपये की ग्रांट मंजूर कराई गई। जब विजिलेंस टीम मौके पर पहुंची, तो मकान पहले से ही पक्का और आरसीसी लिंटल वाला मिला, जिसे किसी मरम्मत की जरूरत ही नहीं थी। दलालों ने किसी अन्य कच्चे मकान की पुरानी फोटो लगाकर फाइल पास करवाई और बैंक खाते में पैसे आते ही 50त्न यानी 40,000 रुपये की राशि काट ली।
हरपाल सिंह (गांव बराड़ा): हरपाल सिंह (पिता गूर्जा सिंह) के मकान की कोई मरम्मत नहीं कराई गई थी। जांच में पता चला कि दलाल संजीव कुमार और समीर बख्शी ने लाभार्थी का एटीएम कार्ड अपने पास जमा रखा था। जैसे ही 80,000 रुपये की सरकारी राशि खाते में आई, दलाल ने एटीएम से 40,000 रुपये खुद निकाल लिए और लाभार्थी को केवल आधी राशि दी गई।
सुरिंदर कौर व परिवार (गांव ठाकुरपुरा): इस मामले में एक ही मकान और एक ही परिवार के भीतर मां और बेटे दोनों के नाम पर अलग-अलग फाइलें तैयार कराकर 80,000 रुपये का दोहरा लाभ ऐंठा गया। विजिलेंस के भौतिक निरीक्षण में मौके पर केवल एक ही मकान और परिवार निवास करता मिला। तहसील कल्याण अधिकारी रुमाल कौर और क्लर्क ने बिना मौके पर जाए ही इस दोहरी फाइल को ओके रिपोर्ट दे दी।
मंजीत सिंह (गांव मुलाना): मंजीत सिंह (पिता ईश्वर चंद) की फाइल में न तो गांव के सरपंच की सिफारिश थी और न ही किसी सक्षम अधिकारी की सत्यता रिपोर्ट। इसके बावजूद तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार के कार्यालय से सीधे फाइल पास हो गई। मौके पर किसी भी तरह का नया निर्माण या रिपेयरिंग का काम नहीं पाया गया।
गुरमीत सिंह (गांव अधोई): इस मामले में लाभार्थी को खबर तक नहीं हुई और उसके नाम पर फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करके विभाग में फाइल बंद कर दी गई। दलाल संजीव कुमार और कार्यालय कर्मचारियों की सांठगांठ से 50,000 रुपये की स्वीकृत राशि में फर्जी दस्तखत कर पैसे निकाल लिए गए।
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इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए अधिकारियों और दलालों के बीच कोई साधारण नहीं, बल्कि चौंकाने वाला संवाद नेटवर्क काम कर रहा था। विजिलेंस की ओर से जब्त की गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) रिपोर्ट में सामाने आया है कि दलाल समीर बख्शी और दूसरे मुख्य एजेंट सतीश कुमार उर्फ रवि के बीच 3916 बार फोन कॉल हुए। इसके अलावा तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी (डीडब्ल्यूओ) कमल कुमार और मुख्य दलाल समीर बख्शी उर्फ मन्नू के बीच मई 2021 से दिसंबर 2022 के बीच कुल 177 बार सीधी बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। वहीं, तहसील कल्याण अधिकारी रुमाल कौर और समीर बख्शी के बीच 39 बार फोन पर बातचीत पाई गई। इस डिजिटल सबूत ने अधिकारियों के उस दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं जिसमें उन्होंने विजिलेंस के सामने दलालों को पहचानने से साफ इनकार किया था। मामले के जांच अधिकारी प्रवीन कुमार ने बताया कि इस केस के संबंध में उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सोमवार को वह इसकी जानकारी लेंगे और जांच शुरू करेंगे। ब्यूरो
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गायब कर दिए गए प्रेषण रजिस्टर
जांच में पाया गया कि बराड़ा तहसील कल्याण कार्यालय से वर्ष 2020, 2021 और 2022 के प्रेषण रजिस्टर (डिस्पैच रजिस्टर) ही गायब कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने घोटाले के निशान मिटाने के लिए सरकारी उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) को कभी आधिकारिक डायरी में दर्ज ही नहीं होने दिया। फर्जी यूसी बनाकर मनमर्जी से सरकारी बजट रिलीज करवा लिया गया।
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फर्जी यूसी जारी कर विभाग को रखा अंधेरे में
विजिलेंस जांच में सबसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही यह सामने आई है कि नियम के मुताबिक मकान की मरम्मत होने के बाद लाभार्थी को उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराना होता है। परंतु इस घोटाले में तहसील कल्याण अधिकारी दीपिका और रुमाल कौर ने खुद ही अपने फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र बनाकर जिला कार्यालय को भेज दिए। जब मुख्यालय से इस बाबत जवाब मांगा गया, तो जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय की उप अधीक्षक सुषमा रानी ने खुलासा किया कि ऐसे किसी भी यूसी का कोई रिकॉर्ड या डायरी नंबर कार्यालय में मौजूद ही नहीं है।
घोटाले करने का यह तरीका अपनाया
एटीएम कार्ड गिरवी रखना: दलाल लाभार्थियों का नया बैंक खाता खुलवाते थे और उनका एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे।
50 प्रतिशत कमीशन की सीधी कटौती: 50 हजार या 80 हजार रुपये की राशि खाते में आते ही दलाल खुद कैश निकालकर 50त्न राशि हड़प लेते थे।
बिना भौतिक निरीक्षण स्वीकृति: 59 जांचे गए आवेदनों में से 55 आवेदन पूरी तरह अधूरे और फर्जी पाए गए, जो बिना मौके पर जाए पास किए गए।
एक ही मकान पर दोहरा-तिहरा लाभ: ठाकुरपुरा गांव में एक ही मकान में रहने वाले मां, बेटे और अन्य परिजनों के नाम पर बार-बार 25-25 और 50-50 हजार रुपये ऐंठे गए।
अब बैंक प्रबंधकों पर भी गहराया संदेह, एसीबी करेगी पूछताछ
इस घोटाले की जांच अब सिर्फ कल्याण विभाग के अधिकारियों और एजेंटों तक सीमित नहीं रहेगी। एसीबी के सूत्रों के अनुसार, जिस तरह से सैकड़ों अपात्रों के खाते रातों-रात खोले गए और पैसे आते ही दलालों द्वारा एटीएम से निकाले गए, उसमें संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। एसीबी के जांच अधिकारी अब उन बैंक खातों की सीसीटीवी फुटेज और केवाईसी दस्तावेजों को खंगालेंगे जिनसे दलालों ने एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर लाखों रुपये कैश निकाले।
क्या है प्रकरण
डॉ. भीमराव आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत गरीबों को मकान मरम्मत के लिए 80 हजार रुपये की सरकारी सहायता दी जाती है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच अंबाला जिले में करीब 17 करोड़ रुपये के बजट में भारी घोटाले की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू की। विजिलेंस जांच में सामने आया कि विभागीय अधिकारियों और दलालों के गठजोड़ ने फर्जी दस्तावेज, फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र और बिना मौके के निरीक्षण के 3,922 फाइलें पास कर दीं। दलाल गरीबों के एटीएम कार्ड अपने पास रखकर 50 प्रतिशत कमीशन खुद निकाल लेते थे। मामले में तत्कालीन डीडब्ल्यूओ और टीडब्ल्यूओ समेत 16 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शीघ्र हो सकती हैं गिरफ्तारियां
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब एसीबी की टीम नामजद 16 आरोपियों, जिनमें तत्कालीन डीडब्ल्यूओ कमल कुमार (अब मोहाली निवासी), शीशपाल, पूर्व टीडब्ल्यूओ दीपिका, रुमाल कौर व 9 एजेंट शामिल हैं, की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने की तैयारी में है। केस के जांच निरीक्षक प्रवीन कुमार जल्द ही चार्जशीट कोर्ट में पेश करेंगे।
केस स्टडी:
न मकान टूटे मिले, ना मरम्मत हुई, दलालों ने एटीएम से खुद निकाले आधे पैसे
एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जब डॉ. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत स्वीकृत 59 रैंडम फाइलों की धरातल पर जांच की, तो 55 मामलों में सीधे तौर पर जालसाजी और गबन का पर्दाफाश हुआ।
करमजीत कौर (गांव ठाकुरपुरा): करमजीत कौर (पति लाभ सिंह) के नाम पर 80,000 रुपये की ग्रांट मंजूर कराई गई। जब विजिलेंस टीम मौके पर पहुंची, तो मकान पहले से ही पक्का और आरसीसी लिंटल वाला मिला, जिसे किसी मरम्मत की जरूरत ही नहीं थी। दलालों ने किसी अन्य कच्चे मकान की पुरानी फोटो लगाकर फाइल पास करवाई और बैंक खाते में पैसे आते ही 50त्न यानी 40,000 रुपये की राशि काट ली।
हरपाल सिंह (गांव बराड़ा): हरपाल सिंह (पिता गूर्जा सिंह) के मकान की कोई मरम्मत नहीं कराई गई थी। जांच में पता चला कि दलाल संजीव कुमार और समीर बख्शी ने लाभार्थी का एटीएम कार्ड अपने पास जमा रखा था। जैसे ही 80,000 रुपये की सरकारी राशि खाते में आई, दलाल ने एटीएम से 40,000 रुपये खुद निकाल लिए और लाभार्थी को केवल आधी राशि दी गई।
सुरिंदर कौर व परिवार (गांव ठाकुरपुरा): इस मामले में एक ही मकान और एक ही परिवार के भीतर मां और बेटे दोनों के नाम पर अलग-अलग फाइलें तैयार कराकर 80,000 रुपये का दोहरा लाभ ऐंठा गया। विजिलेंस के भौतिक निरीक्षण में मौके पर केवल एक ही मकान और परिवार निवास करता मिला। तहसील कल्याण अधिकारी रुमाल कौर और क्लर्क ने बिना मौके पर जाए ही इस दोहरी फाइल को ओके रिपोर्ट दे दी।
मंजीत सिंह (गांव मुलाना): मंजीत सिंह (पिता ईश्वर चंद) की फाइल में न तो गांव के सरपंच की सिफारिश थी और न ही किसी सक्षम अधिकारी की सत्यता रिपोर्ट। इसके बावजूद तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार के कार्यालय से सीधे फाइल पास हो गई। मौके पर किसी भी तरह का नया निर्माण या रिपेयरिंग का काम नहीं पाया गया।
गुरमीत सिंह (गांव अधोई): इस मामले में लाभार्थी को खबर तक नहीं हुई और उसके नाम पर फर्जी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करके विभाग में फाइल बंद कर दी गई। दलाल संजीव कुमार और कार्यालय कर्मचारियों की सांठगांठ से 50,000 रुपये की स्वीकृत राशि में फर्जी दस्तखत कर पैसे निकाल लिए गए।