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Ambala News: ठगी में जब्त 3.50 लाख रुपये की राशि रिलीज करने से इन्कार
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। अदालत ने विदेश भेजने के नाम पर की गई धोखाधड़ी में जब्त 3.50 लाख रुपये की राशि को रिलीज करने से इन्कार कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में तब तक सुरक्षित रखा जाए, जब तक कि मुकदमे का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
शिकायतकर्ता लखबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके पोते सतविंदर सिंह को ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर आरोपी हरभजन, नेहा, दीपक और चिराग ने उनसे लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस जांच के दौरान 12 नवंबर 2025 को याचिकाकर्ता हरप्रीत सिंह के पास से 3.50 लाख रुपये बरामद किए गए थे। याचिकाकर्ता हरप्रीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि वह इस मामले में आरोपी नहीं है और पुलिस ने यह राशि उससे अवैध रूप से बरामद की है।
वहीं, आरोपी के वकील ने दावा किया कि यह पैसा उसका है। उसने हरप्रीत को केवल समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक ट्रस्टी के तौर पर यह राशि दी थी। सरकारी पक्ष ने भी इस राशि को केस प्रॉपर्टी बताते हुए इसे रिलीज करने का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस स्तर पर रकम के असली मालिकाना हक का फैसला नहीं किया जा सकता।
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अंबाला सिटी। अदालत ने विदेश भेजने के नाम पर की गई धोखाधड़ी में जब्त 3.50 लाख रुपये की राशि को रिलीज करने से इन्कार कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में तब तक सुरक्षित रखा जाए, जब तक कि मुकदमे का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
शिकायतकर्ता लखबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके पोते सतविंदर सिंह को ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर आरोपी हरभजन, नेहा, दीपक और चिराग ने उनसे लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस जांच के दौरान 12 नवंबर 2025 को याचिकाकर्ता हरप्रीत सिंह के पास से 3.50 लाख रुपये बरामद किए गए थे। याचिकाकर्ता हरप्रीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि वह इस मामले में आरोपी नहीं है और पुलिस ने यह राशि उससे अवैध रूप से बरामद की है।
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वहीं, आरोपी के वकील ने दावा किया कि यह पैसा उसका है। उसने हरप्रीत को केवल समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक ट्रस्टी के तौर पर यह राशि दी थी। सरकारी पक्ष ने भी इस राशि को केस प्रॉपर्टी बताते हुए इसे रिलीज करने का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस स्तर पर रकम के असली मालिकाना हक का फैसला नहीं किया जा सकता।

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