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Ambala News: साहा स्टेडियम बदहाल, नशेड़ियों का बना अड्डा
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स्टेडियम के हालात दिखाते खिलाड़ी। संवाद
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खिलाड़ियों ने चंदा जुटाकर लगवाई लाइटें, खुद के ट्रैक्टर से काट रहे घास
हिमांशु
साहा। खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने के लिए बनाया गया साहा स्टेडियम बदहाल है। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जबकि यहां से निकलकर युवा सेना तक में जा रहे हैं। अब यह खेल का मैदान कम और असामाजिक तत्वों का अड्डा ज्यादा नजर आता है।
स्टेडियम में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ठप है। सरकार की ओर से लगाया गया ट्यूबवेल वर्षों से खराब पड़ा है। अब यह खस्ताहाल कमरा नशेड़ियों की शरणगाह बन चुका है। खिलाड़ियों ने बताया कि प्यास बुझाने के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च कर नल रिपेयर करवाना पड़ता है। सुरक्षा के लिए न तो यहां कोई चौकीदार है और न ही बाउंड्री की सुध लेने वाला कोई अधिकारी। - संवाद
मैदान में अभ्यास करना मुश्किल
खिलाड़ी जेडी सिंह और राजू साहा ने कहा कि विभाग को बार-बार अवगत कराने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन खिलाड़ियों ने खुद चंदा इकट्ठा कर स्टेडियम में लाइटें लगवाईं। ग्राउंड की घास इतनी बढ़ जाती है कि अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है जिसे खिलाड़ी खुद अपने ट्रैक्टर लाकर साफ करते हैं।
कोच बिना प्रतिभाएं हो रहीं मायूस
सैकड़ों बच्चों के रोजाना अभ्यास करने के बावजूद यहां किसी सरकारी कोच की नियुक्ति नहीं है। खिलाड़ियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द यहां कोच भेजा जाए, पानी का प्रबंध हो और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि क्षेत्र की प्रतिभाएं दम न तोड़ें।
पीडब्ल्यूडी की ओर से इस स्टेडियम को ठीक करने के लिए 22 लाख रुपये की निविदा जारी की गई है। इसमें सभी प्रकार के कार्य तीन महीने में पूरे कराए जाएंगे। काम अगले सप्ताह में शुरू होगा।
-राम स्वरूप शर्मा, प्रभारी, जिला खेल अधिकारी
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हिमांशु
साहा। खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने के लिए बनाया गया साहा स्टेडियम बदहाल है। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जबकि यहां से निकलकर युवा सेना तक में जा रहे हैं। अब यह खेल का मैदान कम और असामाजिक तत्वों का अड्डा ज्यादा नजर आता है।
स्टेडियम में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ठप है। सरकार की ओर से लगाया गया ट्यूबवेल वर्षों से खराब पड़ा है। अब यह खस्ताहाल कमरा नशेड़ियों की शरणगाह बन चुका है। खिलाड़ियों ने बताया कि प्यास बुझाने के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च कर नल रिपेयर करवाना पड़ता है। सुरक्षा के लिए न तो यहां कोई चौकीदार है और न ही बाउंड्री की सुध लेने वाला कोई अधिकारी। - संवाद
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मैदान में अभ्यास करना मुश्किल
खिलाड़ी जेडी सिंह और राजू साहा ने कहा कि विभाग को बार-बार अवगत कराने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन खिलाड़ियों ने खुद चंदा इकट्ठा कर स्टेडियम में लाइटें लगवाईं। ग्राउंड की घास इतनी बढ़ जाती है कि अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है जिसे खिलाड़ी खुद अपने ट्रैक्टर लाकर साफ करते हैं।
कोच बिना प्रतिभाएं हो रहीं मायूस
सैकड़ों बच्चों के रोजाना अभ्यास करने के बावजूद यहां किसी सरकारी कोच की नियुक्ति नहीं है। खिलाड़ियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द यहां कोच भेजा जाए, पानी का प्रबंध हो और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि क्षेत्र की प्रतिभाएं दम न तोड़ें।
पीडब्ल्यूडी की ओर से इस स्टेडियम को ठीक करने के लिए 22 लाख रुपये की निविदा जारी की गई है। इसमें सभी प्रकार के कार्य तीन महीने में पूरे कराए जाएंगे। काम अगले सप्ताह में शुरू होगा।
-राम स्वरूप शर्मा, प्रभारी, जिला खेल अधिकारी

स्टेडियम के हालात दिखाते खिलाड़ी। संवाद

स्टेडियम के हालात दिखाते खिलाड़ी। संवाद

स्टेडियम के हालात दिखाते खिलाड़ी। संवाद