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Ambala News: खो-खो में मेहनत के दम पर चमक रहे साहिल
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साहिल।
- फोटो : samvad
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पानीपत। इसराना के साहिल खो-खो में आज जिला-राज्य स्तर पर नाम चमका रहे हैं। साहिल ने खो-खो खेल में अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष से वह मुकाम हासिल किया है जो हर युवा खिलाड़ी का सपना होता है। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर न केवल अपने गांव का मान बढ़ाया है बल्कि जिले का नाम चमका रहे हैं।
साहिल अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास से अब तक जिला और राज्य स्तर पर छह स्वर्ण पदक अपने नाम करवा चुके हैं। साहिल ने हरियाणा की टीम से खेलते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए। साहिल ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नॉर्थ जोन की खो-खो प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और वहां रजत पदक हासिल किया। फरवरी में फतेहाबाद में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में भी साहिल ने अपने शानदार से रजत पदक हासिल किया। साहिल के पिता छोटेलाल सिलाई का काम करते हैं और मां का आठ साल पहले निधन हो गया था। मां के साए के बिना भी साहिल ने कभी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहे। पिता ने साधारण आय के बावजूद हमेशा साहिल को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
साहिल ने बताया कि आने वाले समय में वे भारतीय टीम से खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन करें। इसके लिए वे लगातार मेहनत कर रहे हैं। साहिल कई वर्षों से बलाना गांव में कोच गुलशन कुमार के मार्गदर्शन में खो-खो प्रशिक्षण ले रहे हैं। कोच ने बताया कि साहिल आर्थिक रूप से कमजोर जरूर हैं लेकिन उनके सपने मजबूत हैं जिसके लिए वह निरंतर अभ्यास भी कर रहे हैं। हर रोज सुबह-शाम अपनी आगे की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।
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साहिल अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास से अब तक जिला और राज्य स्तर पर छह स्वर्ण पदक अपने नाम करवा चुके हैं। साहिल ने हरियाणा की टीम से खेलते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए। साहिल ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नॉर्थ जोन की खो-खो प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और वहां रजत पदक हासिल किया। फरवरी में फतेहाबाद में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में भी साहिल ने अपने शानदार से रजत पदक हासिल किया। साहिल के पिता छोटेलाल सिलाई का काम करते हैं और मां का आठ साल पहले निधन हो गया था। मां के साए के बिना भी साहिल ने कभी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहे। पिता ने साधारण आय के बावजूद हमेशा साहिल को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
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साहिल ने बताया कि आने वाले समय में वे भारतीय टीम से खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन करें। इसके लिए वे लगातार मेहनत कर रहे हैं। साहिल कई वर्षों से बलाना गांव में कोच गुलशन कुमार के मार्गदर्शन में खो-खो प्रशिक्षण ले रहे हैं। कोच ने बताया कि साहिल आर्थिक रूप से कमजोर जरूर हैं लेकिन उनके सपने मजबूत हैं जिसके लिए वह निरंतर अभ्यास भी कर रहे हैं। हर रोज सुबह-शाम अपनी आगे की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।
