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Ambala News: स्लोगन लेखन में श्वेता, प्रश्नोत्तरी में टीम बी प्रथम
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अंबाला छावनी के आर्य कॉलेज में कार्यक्रम के दौरान मौजूद प्राचार्य व छात्राएं। प्रवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। आर्य कॉलेज के पुस्तकालय में पुस्तकालय विज्ञान के जनक पद्मश्री डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती राष्ट्रीय पुस्तकालय/पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने डॉ. रंगनाथन के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए स्लोगन लेखन और हरियाणा से जुड़ी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें करीब 37 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने कहा कि पठन की आदत विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके व्यक्तित्व एवं दृष्टिकोण को भी समृद्ध करती है। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. प्रिया शर्मा ने डॉ. रंगनाथन के जीवन और पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकालय की असली सफलता पुस्तकों की संख्या से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उस तक पहुंच से तय होती है। स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में श्वेता (प्रथम), खुशी (द्वितीय), रूपाली (तृतीय) और रूपा को सांत्वना पुरस्कार मिला। इसी प्रकार प्रश्नोत्तरी प्रेतियोगिता में टीम बी से अलका, प्रिती, रूपा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पुस्तकालय समिति, डॉ. ममता भटनागर, सोनिया शास्त्री, डॉ. सुमन बाला, संध्या तथा अन्य स्टाफ सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।
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अंबाला। आर्य कॉलेज के पुस्तकालय में पुस्तकालय विज्ञान के जनक पद्मश्री डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती राष्ट्रीय पुस्तकालय/पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने डॉ. रंगनाथन के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए स्लोगन लेखन और हरियाणा से जुड़ी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें करीब 37 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने कहा कि पठन की आदत विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके व्यक्तित्व एवं दृष्टिकोण को भी समृद्ध करती है। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. प्रिया शर्मा ने डॉ. रंगनाथन के जीवन और पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकालय की असली सफलता पुस्तकों की संख्या से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उस तक पहुंच से तय होती है। स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में श्वेता (प्रथम), खुशी (द्वितीय), रूपाली (तृतीय) और रूपा को सांत्वना पुरस्कार मिला। इसी प्रकार प्रश्नोत्तरी प्रेतियोगिता में टीम बी से अलका, प्रिती, रूपा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पुस्तकालय समिति, डॉ. ममता भटनागर, सोनिया शास्त्री, डॉ. सुमन बाला, संध्या तथा अन्य स्टाफ सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।
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