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Ambala News: डी-प्लान में 26 विकास कार्य इस महीने पूरे करना चुनौती
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अधूरे कार्यों में मुख्य रूप से गांवों और वार्डों की गलियां, नालियों का निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्रों के कमरे शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला विकास योजना (डी-प्लान) के तहत चल रहे विकास कार्यों की चाल काफी धीमी है। वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने में महज सात दिन शेष हैं। जिले में अब भी 26 विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। विभाग ने संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लंबित सभी कार्यों को हर हाल में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। डी-प्लान के तहत विकास कार्य कराने को जनप्रतिनिधियों द्वारा कार्यों का अनुमोदन किया जाता है।
26 करोड़ की लागत से होने थे 172 काम
वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान डी-प्लान के अंतर्गत जिले को 172 विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। इन कार्यों पर करीब 26 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जानी थी। अधिकांश कार्य पूरे कर लिए गए हैं लेकिन अंतिम चरण में आकर 26 परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इन अधूरे कार्यों में मुख्य रूप से गांवों और वार्डों की गलियां, नालियों का निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्रों के कमरों का अधूरा ढांचा शामिल है।
पिछले साल का बैकलॉग भी बरकरार
विभाग केवल इस साल के बजट को खपाने के दबाव में नहीं है बल्कि पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के सात कार्य भी अभी भी पूरे नहीं हैं। पिछले वित्त वर्ष में डी-प्लान के तहत 25 करोड़ रुपये के 77 काम स्वीकृत हुए थे। वहीं 17.80 करोड़ रुपये की धनराशि के कार्य ही पूरे हो सके हैं। नियमानुसार इन कार्यों को काफी पहले पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन तकनीकी कारणों या ठेकेदारों की ढिलाई की वजह से ये अभी भी लंबित हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला विकास योजना (डी-प्लान) के तहत चल रहे विकास कार्यों की चाल काफी धीमी है। वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने में महज सात दिन शेष हैं। जिले में अब भी 26 विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। विभाग ने संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लंबित सभी कार्यों को हर हाल में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। डी-प्लान के तहत विकास कार्य कराने को जनप्रतिनिधियों द्वारा कार्यों का अनुमोदन किया जाता है।
26 करोड़ की लागत से होने थे 172 काम
वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान डी-प्लान के अंतर्गत जिले को 172 विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। इन कार्यों पर करीब 26 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जानी थी। अधिकांश कार्य पूरे कर लिए गए हैं लेकिन अंतिम चरण में आकर 26 परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इन अधूरे कार्यों में मुख्य रूप से गांवों और वार्डों की गलियां, नालियों का निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्रों के कमरों का अधूरा ढांचा शामिल है।
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पिछले साल का बैकलॉग भी बरकरार
विभाग केवल इस साल के बजट को खपाने के दबाव में नहीं है बल्कि पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के सात कार्य भी अभी भी पूरे नहीं हैं। पिछले वित्त वर्ष में डी-प्लान के तहत 25 करोड़ रुपये के 77 काम स्वीकृत हुए थे। वहीं 17.80 करोड़ रुपये की धनराशि के कार्य ही पूरे हो सके हैं। नियमानुसार इन कार्यों को काफी पहले पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन तकनीकी कारणों या ठेकेदारों की ढिलाई की वजह से ये अभी भी लंबित हैं।