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Ambala News: बार-बार हाथ में रस्सी की ग्रिप छूटती रही, और नीचे खिसका मासूम
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निरवैर की स्थिति का कैमरे में आकलन करते सेना व एनडीआरएफ के जवान।। संवाद
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- पानी का रिसाव, कम विजिबिलिटी से बढ़ा रही मुश्किलें, बारिश ने डाला खलल
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। धन्यौड़ा गांव के खेत में खुले पड़े बोरवेल में निरवैर को निकालने के लिए चले बचाव अभियान के दौरान टीमों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उस समय सबसे बड़ी बाधा बोरवेल के भीतर हो रही पानी के रिसाव की रही। इस वजह से अंदर की दृश्यता काफी कम हो गई थी। उधर, कैमरे के जरिए बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही थी लेकिन पानी के कारण कैमरा बच्चे तक नहीं पहुंच पा रहा था। केवल बच्चे का एक हाथ दिखाई दे रहा था। आखिर में रणनीति यह बनाई गई थी कि किसी तरह बच्चे के उस हाथ पर रस्सी को सुरक्षित रूप से बांधा जाए और फिर उसे ऊपर की तरफ खींचा जाए।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुबह 12 बजकर 30 मिनट पर उस समय टीम की सांसें थम गईं, जब बोरवेल के भीतर मासूम को सुरक्षित खींचने का एक बेहद करीबी प्रयास नाकाम हो गया। रस्सी से डाली गई कुंडी में निरवैर फंस गया था। लेकिन पानी की वजह से पकड़ बार-बार छूटती रही। तभी निरवैर बोरवेल में पहले से कुछ और फीट नीचे खिसक गया। इस घटना के बाद रेस्क्यू टीमों की चिंताएं और बढ़ गई थीं। दोपहर 2 बजे के करीब बूंदाबांदी भी शुरू हो गई थी। 3 बजकर 30 मिनट पर झमाझम बरसात हो गई थी। रेस्क्यू टीमों ने तुरंत टेंट व कनौपी लगाई व बोरवेल को भी ढक दिया था। बरसात शुरू होने के बाद एक बार फिर बचाव कार्य तेज किया गया।
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यमुना ब्रिज से मंगवाई हैवी बोरवेल मशीनें
बोरवेल के भीतर पल-पल गंभीर होती इन भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत बैकअप प्लान तैयार किया था। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि यदि तकनीकी रूप से रस्सी के जरिए बच्चे को निकालने में सफलता नहीं मिलती है, तो प्रशासन ने बैकअप प्लान भी तैयार कर लिया। एक बड़ी बोरवेल मशीन यमुना ब्रिज के पास से मंगवाई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। धन्यौड़ा गांव के खेत में खुले पड़े बोरवेल में निरवैर को निकालने के लिए चले बचाव अभियान के दौरान टीमों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उस समय सबसे बड़ी बाधा बोरवेल के भीतर हो रही पानी के रिसाव की रही। इस वजह से अंदर की दृश्यता काफी कम हो गई थी। उधर, कैमरे के जरिए बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही थी लेकिन पानी के कारण कैमरा बच्चे तक नहीं पहुंच पा रहा था। केवल बच्चे का एक हाथ दिखाई दे रहा था। आखिर में रणनीति यह बनाई गई थी कि किसी तरह बच्चे के उस हाथ पर रस्सी को सुरक्षित रूप से बांधा जाए और फिर उसे ऊपर की तरफ खींचा जाए।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुबह 12 बजकर 30 मिनट पर उस समय टीम की सांसें थम गईं, जब बोरवेल के भीतर मासूम को सुरक्षित खींचने का एक बेहद करीबी प्रयास नाकाम हो गया। रस्सी से डाली गई कुंडी में निरवैर फंस गया था। लेकिन पानी की वजह से पकड़ बार-बार छूटती रही। तभी निरवैर बोरवेल में पहले से कुछ और फीट नीचे खिसक गया। इस घटना के बाद रेस्क्यू टीमों की चिंताएं और बढ़ गई थीं। दोपहर 2 बजे के करीब बूंदाबांदी भी शुरू हो गई थी। 3 बजकर 30 मिनट पर झमाझम बरसात हो गई थी। रेस्क्यू टीमों ने तुरंत टेंट व कनौपी लगाई व बोरवेल को भी ढक दिया था। बरसात शुरू होने के बाद एक बार फिर बचाव कार्य तेज किया गया।
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यमुना ब्रिज से मंगवाई हैवी बोरवेल मशीनें
बोरवेल के भीतर पल-पल गंभीर होती इन भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत बैकअप प्लान तैयार किया था। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि यदि तकनीकी रूप से रस्सी के जरिए बच्चे को निकालने में सफलता नहीं मिलती है, तो प्रशासन ने बैकअप प्लान भी तैयार कर लिया। एक बड़ी बोरवेल मशीन यमुना ब्रिज के पास से मंगवाई गई।
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