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Ambala News: बीमा कंपनी को पांच लाख लौटाने का दिया आदेश
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पानीपत। बीमारी से व्यक्ति की मौत के बाद आश्रित को पांच लाख रुपये का बीमा क्लेम न देने पर आयोग ने बीमा कंपनी को फटकार लगाई है। बीमा कंपनी ने माैत का कारण शराब होने की बात कहते हुए क्लेम को खारिज कर दिया था।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपने दावे के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। जिस पर आयोग ने कहा कि कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि बीमारी अधिक शराब पीने से हुई। कंपनी को पांच लाख रुपये का क्लेम नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा।
शिकायतकर्ता दुर्गा ने बताया कि उनके पति दिनेश कुमार ने वर्ष 2020 में स्टार हेल्थ बीमा कंपनी से पांच लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। जिसका प्रीमियम भी जमा करा दिया था।
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उनकी फरवरी 2021 में अचानक तबीयत खराब हो गई। जिस कारण उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार के दौरान सात फरवरी 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। उनके इलाज में करीब आठ लाख रुपये का खर्च हुआ था।
दिनेश की पत्नी ने बीमारी में हुए खर्च में से पांच लाख रुपये का क्लेम का दावा किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए कहा कि बीमाधारक शराब का सेवन करता था और उसकी बीमारी पहले से थी। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार ऐसे मामलों में क्लेम देय नहीं है। जिस पर आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनी।
सुनवाई के दौरान आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा ने माना कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि मौत शराब से जुड़ी बीमारी के कारण हुई है। बीमारी पहने से होने का भी कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया। जिस कारण क्लेम का दावा खारिज करना शर्तों का उल्लंघन है।
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सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपने दावे के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। जिस पर आयोग ने कहा कि कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि बीमारी अधिक शराब पीने से हुई। कंपनी को पांच लाख रुपये का क्लेम नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा।
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शिकायतकर्ता दुर्गा ने बताया कि उनके पति दिनेश कुमार ने वर्ष 2020 में स्टार हेल्थ बीमा कंपनी से पांच लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। जिसका प्रीमियम भी जमा करा दिया था।
उनकी फरवरी 2021 में अचानक तबीयत खराब हो गई। जिस कारण उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार के दौरान सात फरवरी 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। उनके इलाज में करीब आठ लाख रुपये का खर्च हुआ था।
दिनेश की पत्नी ने बीमारी में हुए खर्च में से पांच लाख रुपये का क्लेम का दावा किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए कहा कि बीमाधारक शराब का सेवन करता था और उसकी बीमारी पहले से थी। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार ऐसे मामलों में क्लेम देय नहीं है। जिस पर आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनी।
सुनवाई के दौरान आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा ने माना कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि मौत शराब से जुड़ी बीमारी के कारण हुई है। बीमारी पहने से होने का भी कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया। जिस कारण क्लेम का दावा खारिज करना शर्तों का उल्लंघन है।