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Ambala News: एक साल से कागजों में उलझा सरकारी नशा मुक्ति केंद्र के स्टाफ का प्रस्ताव
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। जिले में नशे के दलदल में फंसे युवाओं को नई जिंदगी देने का जिम्मा संभालने वाला अंबाला सिटी का नागरिक अस्पताल स्थित एक सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खुद बीमार है।
एक साल का समय बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो सकी है। आलम यह है कि सरकारी लापरवाही के चलते रात के समय मरीजों को भर्ती करने से ही इन्कार कर दिया जाता है। हालांकि दिन के समय ओपीडी व डे केयर की सुविधा चल रही है।
महज एक डॉक्टर के सहारे ओपीडी व मरीज : सरकारी नशा मुक्ति केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पूरे केंद्र का जिम्मा महज एक डॉक्टर के कंधों पर है। उन्हें न केवल ओपीडी संभालनी पड़ती है, बल्कि सुबह के समय दाखिल मरीजों की देखरेख भी वही करते हैं।
स्टाफ की कमी के कारण इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और डॉक्टर भी भारी दबाव में काम करने को मजबूर हैं। नशा मुक्ति केंद्र में डॉक्टर के अलावा नर्सिंग ऑफिसर सहित अन्य कर्मचारियों के लिए प्रस्ताव तैयार है, लेकिन वह फाइलों के जाल में इस कदर उलझा है कि एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सका। इसका सीधा खामियाजा उन मरीजों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जो नशे की लत छोड़ने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।
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एक साल का समय बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो सकी है। आलम यह है कि सरकारी लापरवाही के चलते रात के समय मरीजों को भर्ती करने से ही इन्कार कर दिया जाता है। हालांकि दिन के समय ओपीडी व डे केयर की सुविधा चल रही है।
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महज एक डॉक्टर के सहारे ओपीडी व मरीज : सरकारी नशा मुक्ति केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पूरे केंद्र का जिम्मा महज एक डॉक्टर के कंधों पर है। उन्हें न केवल ओपीडी संभालनी पड़ती है, बल्कि सुबह के समय दाखिल मरीजों की देखरेख भी वही करते हैं।
स्टाफ की कमी के कारण इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और डॉक्टर भी भारी दबाव में काम करने को मजबूर हैं। नशा मुक्ति केंद्र में डॉक्टर के अलावा नर्सिंग ऑफिसर सहित अन्य कर्मचारियों के लिए प्रस्ताव तैयार है, लेकिन वह फाइलों के जाल में इस कदर उलझा है कि एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सका। इसका सीधा खामियाजा उन मरीजों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जो नशे की लत छोड़ने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।