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Ambala News: पीले वस्त्र धारण कर भक्तों ने माता को लगाया शहद का भोग
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अंबाला छावनी में छठे नवरात्र पर मां कात्यायनी की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
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कालीबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, हाथी खाना में लगी श्रद्धालुओं की कतार
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मां दुर्गा के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की उपासना के लिए भक्तों में उत्साह दिखा। भक्तों ने कालीबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, हाथी खाना व अन्य मंदिरों में पूजा की। इस दौरान भक्त माता के दर्शन के लिए कतार में लगे। भक्तों ने पीले वस्त्र धारण कर मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाया। इसके अलावा मंदिरों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ब्रह्म मुहूर्त में पांच बजे मंदिर के कपाट खुलते ही जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा। दिन का शुभारंभ ठाकुर जी की आरती और पंचांग पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य यजमानों पुरोहितों द्वारा माता कात्यायनी का पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद मंदिर में उपस्थित महिलाओं की मंडली ने सामूहिक पाठ किया।
छावनी के सनातन धर्म मंदिर परिसर में छह वर्षीय कन्या का पूजन किया गया। उसे साक्षात मां का स्वरूप मानकर चुनरी ओढ़ाई गई और उपहार भेंट किए गए। भक्तों को सुबह के समय फलाहारी प्रसाद और विशेष व्रत वाली मिठाई वितरित की गई। शाम भजन मंडली की भजन और कीर्तन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। रात्रि की मुख्य आरती के पश्चात भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं कात्यायनी
पुजारी प्रवेश उनियाल बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया था जिसके कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। मां कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, द्वापर युग में गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इन्हीं की पूजा की थी। माता की उपासना से रोग, शोक और संताप का नाश होता है। पाप से मुक्ति पाने के लिए मां कात्यायनी की भक्ति को सबसे सरल मार्ग बताया गया है। आज के दिन भक्त को पीले वस्त्र धारण कर माता को शहद का भोग लगाना चाहिए, जो माता को अत्यंत प्रिय है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मां दुर्गा के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की उपासना के लिए भक्तों में उत्साह दिखा। भक्तों ने कालीबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, हाथी खाना व अन्य मंदिरों में पूजा की। इस दौरान भक्त माता के दर्शन के लिए कतार में लगे। भक्तों ने पीले वस्त्र धारण कर मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाया। इसके अलावा मंदिरों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ब्रह्म मुहूर्त में पांच बजे मंदिर के कपाट खुलते ही जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा। दिन का शुभारंभ ठाकुर जी की आरती और पंचांग पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य यजमानों पुरोहितों द्वारा माता कात्यायनी का पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद मंदिर में उपस्थित महिलाओं की मंडली ने सामूहिक पाठ किया।
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छावनी के सनातन धर्म मंदिर परिसर में छह वर्षीय कन्या का पूजन किया गया। उसे साक्षात मां का स्वरूप मानकर चुनरी ओढ़ाई गई और उपहार भेंट किए गए। भक्तों को सुबह के समय फलाहारी प्रसाद और विशेष व्रत वाली मिठाई वितरित की गई। शाम भजन मंडली की भजन और कीर्तन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। रात्रि की मुख्य आरती के पश्चात भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं कात्यायनी
पुजारी प्रवेश उनियाल बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया था जिसके कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। मां कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, द्वापर युग में गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इन्हीं की पूजा की थी। माता की उपासना से रोग, शोक और संताप का नाश होता है। पाप से मुक्ति पाने के लिए मां कात्यायनी की भक्ति को सबसे सरल मार्ग बताया गया है। आज के दिन भक्त को पीले वस्त्र धारण कर माता को शहद का भोग लगाना चाहिए, जो माता को अत्यंत प्रिय है।

अंबाला छावनी में छठे नवरात्र पर मां कात्यायनी की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद