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Bhiwani News: न्याय के लिए पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:51 AM IST
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भिवानी। गांव नवा में घर में घुसकर अनुसूचित जाति परिवार पर हुए जानलेवा हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई ना होने से नाराज परिजनों व ग्रामीणों ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा। जूई कलां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नवा में बीते दिनों कुछ लोगों ने एक घर में घुसकर परिवार पर हमला किया था। इस हमले में सतीश नामक व्यक्ति को गंभीर चोटें आईं, जो वर्तमान में पीजीआई रोहतक में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के दौरान पीड़ित परिजनों ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन धाराएं बेहद हल्की लगाई गई हैं। आरोपियों ने घर में घुसकर ना केवल मारपीट की, बल्कि महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और जातिसूचक गालियां भी दीं। पीड़ित की हालत नाजुक है, फिर भी पुलिस ने अब तक बीएनएस की धारा 109 (1) (हत्या का प्रयास) और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वे मांग करते हैं कि जांच को निष्पक्ष बनाया जाए और धाराओं में तुरंत इजाफा किया जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुलिस ने उचित धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
वहीं ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन कौंसिल के चेयरमैन अधिवक्ता शिवकुमार बेडवाल व सचिव अधिवक्ता अजय सभ्रवाल यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और एक वर्ग विशेष को दबाने की कोशिश है। जब हमला जानलेवा था और मंशा हत्या की थी तो साधारण मारपीट की धाराओं का क्या औचित्य। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक को मेडिकल रिपोर्ट और एक्स-रे की कॉपियां सौंप दी गई तथा उनसे आग्रह किया है कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
उन्होंने मांग की कि घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए जानलेवा हमले की धारा जोड़ी जाए। इस अवसर पर जयभगवान सरपंच, पंच सुरेंद्र, पंच शारदा, सरिता, अनिता, उर्मिला, पंच जयीागवान, सुदेश, सत्यवान, कपिल, सोनू, रमेश, रामकिशन पूर्व ससरपंच, जोगेंद्र, संजय, नरेंद्र, सतीश मौजूद रहे।
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पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के दौरान पीड़ित परिजनों ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन धाराएं बेहद हल्की लगाई गई हैं। आरोपियों ने घर में घुसकर ना केवल मारपीट की, बल्कि महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और जातिसूचक गालियां भी दीं। पीड़ित की हालत नाजुक है, फिर भी पुलिस ने अब तक बीएनएस की धारा 109 (1) (हत्या का प्रयास) और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वे मांग करते हैं कि जांच को निष्पक्ष बनाया जाए और धाराओं में तुरंत इजाफा किया जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुलिस ने उचित धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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वहीं ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन कौंसिल के चेयरमैन अधिवक्ता शिवकुमार बेडवाल व सचिव अधिवक्ता अजय सभ्रवाल यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और एक वर्ग विशेष को दबाने की कोशिश है। जब हमला जानलेवा था और मंशा हत्या की थी तो साधारण मारपीट की धाराओं का क्या औचित्य। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक को मेडिकल रिपोर्ट और एक्स-रे की कॉपियां सौंप दी गई तथा उनसे आग्रह किया है कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
उन्होंने मांग की कि घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए जानलेवा हमले की धारा जोड़ी जाए। इस अवसर पर जयभगवान सरपंच, पंच सुरेंद्र, पंच शारदा, सरिता, अनिता, उर्मिला, पंच जयीागवान, सुदेश, सत्यवान, कपिल, सोनू, रमेश, रामकिशन पूर्व ससरपंच, जोगेंद्र, संजय, नरेंद्र, सतीश मौजूद रहे।