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Bhiwani News: राष्ट्रमंडल खेलों में खूब चल रहा छोटी काशी का पंच, सचिन-साक्षी ने पक्के किए पदक<bha>;</bha> स्वर्ण से एक कदम दूर
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साक्षी चौधरी
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भिवानी। राष्ट्रमंडल खेल ग्लासगो-2026 में छोटी काशी के पंच का जलवा लगातार जारी है। भिवानी के मुक्केबाज सचिन सिवाच जूनियर और धनाना की बेटी साक्षी चौधरी (ढांडा) ने अपने दमदार प्रदर्शन से भारत का नाम रोशन करते हुए पदक पक्के कर लिए हैं।
मिताथल निवासी भारतीय सेना के हवलदार सचिन सिवाच जूनियर ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग और भारतीय सेना की मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने महिला 51 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर मुक्केबाजी में भारत के लिए दो पदक सुनिश्चित कर दिए हैं। अब दोनों खिलाड़ी स्वर्ण पदक से एक कदम दूर हैं।
सचिन सिवाच जूनियर ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी को 5-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। सर्वसम्मत निर्णय से मिली इस जीत में सचिन ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक, सटीक पंच और आत्मविश्वास के दम पर प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को कोई मौका नहीं दिया।
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सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए एक पदक पक्का कर दिया है। अब उनकी नजर फाइनल में जगह बनाने और स्वर्ण पदक जीतने पर है। सचिन की इस उपलब्धि से गांव मिताथल सहित पूरे भिवानी और हरियाणा में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और ग्रामीणों ने सचिन को सेमीफाइनल मुकाबले के लिए शुभकामनाएं दी हैं। भारतीय सेना के इस मुक्केबाज से अब देश को स्वर्ण पदक की उम्मीद है।
मिताथल में परिवार ने मोबाइल पर देखा सचिन का मुकाबला
गांव मिताथल स्थित सचिन सिवाच के घर पर पिता अनिल सिवाच, मां सुमन, दादी सजनी देवी और चाची रीतू ने मोबाइल फोन पर बेटे का लाइव मुकाबला देखा। सचिन के दमदार पंच और शानदार प्रदर्शन को देखकर परिवार के सदस्य उत्साहित नजर आए। कोच टेकराम ने बताया कि सचिन का मुकाबला काफी बेहतरीन रहा। उन्होंने कहा कि सचिन ने अपनी तकनीक और आत्मविश्वास के दम पर शानदार जीत हासिल की है।
धनाना की बेटी साक्षी ने भी रचा इतिहास, 51 किलो वर्ग में भारत का पदक पक्का
जिले के गांव धनाना निवासी भारतीय सेना की मुक्केबाज साक्षी चौधरी (ढांडा) ने भी राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 51 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। साक्षी ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उत्तरी आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 (यूनानिमस डिसीजन) से हराकर भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित किया।
मुकाबले के दौरान साक्षी ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और अपनी सटीक पंचिंग व बेहतरीन फुटवर्क से प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा। तीसरे राउंड में अत्यधिक क्लिंचिंग के कारण उन्हें एक अंक की कटौती का सामना करना पड़ा, लेकिन इसका मुकाबले के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा। सभी पांच जजों ने साक्षी को विजेता घोषित किया।
साक्षी अब सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में जगह बनाने और स्वर्ण पदक की दौड़ में प्रवेश करने के लक्ष्य के साथ रिंग में उतरेंगी। उनकी इस उपलब्धि से गांव धनाना, भिवानी जिले, हरियाणा और भारतीय सेना में खुशी की लहर है।
खेल प्रेरक हरियाणा एवं अधिवक्ता राजनारायण पंघाल, जो राष्ट्रमंडल खेलों की कवरेज के लिए ग्लासगो में मौजूद हैं उन्होंने बताया कि साक्षी चौधरी ने पूरे आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ मुकाबला खेला। उन्होंने कहा कि भिवानी की इस बेटी ने एक बार फिर साबित किया है कि हरियाणा की बेटियां विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने में अग्रणी हैं।
साक्षी चौधरी ने बताया कि उसका 14 साल का मुक्केबाजी सफर रहा है। इस दौरान उसने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें परिजनों और गुरुजनों का पूरा सहयोग मिला। अब उसका सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार कड़ी मेहनत कर रही है।
सचिन और साक्षी की सफलता से भिवानी के खेल जगत में उत्साह का माहौल है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि छोटी काशी की धरती खेल प्रतिभाओं की खान है। देशवासियों की निगाहें अब दोनों मुक्केबाजों के सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं।
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मिताथल निवासी भारतीय सेना के हवलदार सचिन सिवाच जूनियर ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग और भारतीय सेना की मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने महिला 51 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर मुक्केबाजी में भारत के लिए दो पदक सुनिश्चित कर दिए हैं। अब दोनों खिलाड़ी स्वर्ण पदक से एक कदम दूर हैं।
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सचिन सिवाच जूनियर ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी को 5-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। सर्वसम्मत निर्णय से मिली इस जीत में सचिन ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक, सटीक पंच और आत्मविश्वास के दम पर प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को कोई मौका नहीं दिया।
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सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए एक पदक पक्का कर दिया है। अब उनकी नजर फाइनल में जगह बनाने और स्वर्ण पदक जीतने पर है। सचिन की इस उपलब्धि से गांव मिताथल सहित पूरे भिवानी और हरियाणा में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और ग्रामीणों ने सचिन को सेमीफाइनल मुकाबले के लिए शुभकामनाएं दी हैं। भारतीय सेना के इस मुक्केबाज से अब देश को स्वर्ण पदक की उम्मीद है।
मिताथल में परिवार ने मोबाइल पर देखा सचिन का मुकाबला
गांव मिताथल स्थित सचिन सिवाच के घर पर पिता अनिल सिवाच, मां सुमन, दादी सजनी देवी और चाची रीतू ने मोबाइल फोन पर बेटे का लाइव मुकाबला देखा। सचिन के दमदार पंच और शानदार प्रदर्शन को देखकर परिवार के सदस्य उत्साहित नजर आए। कोच टेकराम ने बताया कि सचिन का मुकाबला काफी बेहतरीन रहा। उन्होंने कहा कि सचिन ने अपनी तकनीक और आत्मविश्वास के दम पर शानदार जीत हासिल की है।
धनाना की बेटी साक्षी ने भी रचा इतिहास, 51 किलो वर्ग में भारत का पदक पक्का
जिले के गांव धनाना निवासी भारतीय सेना की मुक्केबाज साक्षी चौधरी (ढांडा) ने भी राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 51 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। साक्षी ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उत्तरी आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 (यूनानिमस डिसीजन) से हराकर भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित किया।
मुकाबले के दौरान साक्षी ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और अपनी सटीक पंचिंग व बेहतरीन फुटवर्क से प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा। तीसरे राउंड में अत्यधिक क्लिंचिंग के कारण उन्हें एक अंक की कटौती का सामना करना पड़ा, लेकिन इसका मुकाबले के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा। सभी पांच जजों ने साक्षी को विजेता घोषित किया।
साक्षी अब सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में जगह बनाने और स्वर्ण पदक की दौड़ में प्रवेश करने के लक्ष्य के साथ रिंग में उतरेंगी। उनकी इस उपलब्धि से गांव धनाना, भिवानी जिले, हरियाणा और भारतीय सेना में खुशी की लहर है।
खेल प्रेरक हरियाणा एवं अधिवक्ता राजनारायण पंघाल, जो राष्ट्रमंडल खेलों की कवरेज के लिए ग्लासगो में मौजूद हैं उन्होंने बताया कि साक्षी चौधरी ने पूरे आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ मुकाबला खेला। उन्होंने कहा कि भिवानी की इस बेटी ने एक बार फिर साबित किया है कि हरियाणा की बेटियां विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने में अग्रणी हैं।
साक्षी चौधरी ने बताया कि उसका 14 साल का मुक्केबाजी सफर रहा है। इस दौरान उसने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें परिजनों और गुरुजनों का पूरा सहयोग मिला। अब उसका सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार कड़ी मेहनत कर रही है।
सचिन और साक्षी की सफलता से भिवानी के खेल जगत में उत्साह का माहौल है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि छोटी काशी की धरती खेल प्रतिभाओं की खान है। देशवासियों की निगाहें अब दोनों मुक्केबाजों के सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं।

साक्षी चौधरी