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Bhiwani News: लापरवाही के खिलाफ गोरक्षा दल ने दिया धरना, वेटनरी पॉलीक्लीनिक के बाहर शव रखकर जताया विरोध
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भिवानी। बेजुबान जीवों की सेवा के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट से संचालित डायल 1962 एंबुलेंस सेवा अब केवल सफेद हाथी बनकर रह गई है। यह आरोप लगाते हुए बुधवार को गोरक्षा दल भिवानी ने स्थानीय राजकीय वेटनरी पॉलीक्लीनिक के सामने धरना दिया और लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नारेबाजी की।
इस दौरान गोरक्षा दल सदस्यों ने वेटनरी पॉलीक्लीनिक के बाहर मृत कुत्ता और बछड़ा रखकर विरोध प्रदर्शन भी किया। गोरक्षा दल भिवानी के प्रधान संजय परमार ने बताया कि एंबुलेंस कर्मचारियों की ड्यूटी दोपहर 12 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित है लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में बीमार जीवों के लिए 7 केस दर्ज करवाए गए थे लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे।
उनका आरोप है कि इसी लापरवाही के चलते समय पर इलाज न मिलने से दो कुत्तों और एक बछड़े की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। संजय परमार ने कहा कि डायल 1962 सेवा का उद्देश्य बीमार जीवों के लिए वरदान साबित होना था लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही ने इसे बेजुबानों के लिए अभिशाप बना दिया है। उन्होंने बताया कि गो सेवकों ने डिप्टी डायरेक्टर तक को फोन किया इसके बावजूद एंबुलेंस सेवा पर तैनात डॉक्टर ने उनके आदेशों की भी अवहेलना की और रात आठ बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और लापरवाह कर्मचारियों को निलंबित नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।इस अवसर पर अंकुर पालुवास, आदी तंवर, निखिल, मोहित उर्फ मोदी, सुमित, डॉ. गजेंद्र, दीपक, साहिल, हिमांशु, धन सिंह, कृष्ण नंदन आदि मौजूद रहे।
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इस दौरान गोरक्षा दल सदस्यों ने वेटनरी पॉलीक्लीनिक के बाहर मृत कुत्ता और बछड़ा रखकर विरोध प्रदर्शन भी किया। गोरक्षा दल भिवानी के प्रधान संजय परमार ने बताया कि एंबुलेंस कर्मचारियों की ड्यूटी दोपहर 12 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित है लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में बीमार जीवों के लिए 7 केस दर्ज करवाए गए थे लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे।
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उनका आरोप है कि इसी लापरवाही के चलते समय पर इलाज न मिलने से दो कुत्तों और एक बछड़े की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। संजय परमार ने कहा कि डायल 1962 सेवा का उद्देश्य बीमार जीवों के लिए वरदान साबित होना था लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही ने इसे बेजुबानों के लिए अभिशाप बना दिया है। उन्होंने बताया कि गो सेवकों ने डिप्टी डायरेक्टर तक को फोन किया इसके बावजूद एंबुलेंस सेवा पर तैनात डॉक्टर ने उनके आदेशों की भी अवहेलना की और रात आठ बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और लापरवाह कर्मचारियों को निलंबित नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।इस अवसर पर अंकुर पालुवास, आदी तंवर, निखिल, मोहित उर्फ मोदी, सुमित, डॉ. गजेंद्र, दीपक, साहिल, हिमांशु, धन सिंह, कृष्ण नंदन आदि मौजूद रहे।

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